महुआ, जामुन के पेड़ों के वजूद पर ख़तरा

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बाराबंकी। भारत में पेड़ो की पूजा होती है और पेड़ हमारे जीवन के लिए बहुत उपयोगी है। पेड़ो के बिना पृथ्वी पर जीवों की कल्पना नहीं की जा सकती है।

भारत में विभिन्न प्रकार के पेड़ पाये जाते हैं जिनमें से कुछ पेड़ों का महत्व हमारे जीवन में ज्यादा है। आजकल कुछ पेड़ों की प्रजातियां लुप्त होने के कगार पर हैं। यदि समय रहते इस पर ध्यान न दिया जायेगा तो ये भविष्य में कल्पना मात्र रह जायेगा।

हम बात कर रहे है जामुन, महुआ जैसे बहुपयोगी पेड़ो की। लोग महुआ, जामुन जैसे पेड़ नहीं लगाना चाहते क्योकि इन पेड़ों की तैयार होने में काफी समय लग जाता है जबकि यूकेलिप्टिस पॉपुलर जैसी व्यवसायिक प्रजातियां बहुत जल्द तैयार हो जाती है और कम समय में अधिक लाभ देती है। 

सिसवारा के बुजुर्ग संकटा प्रसाद (73 वर्ष) बताते हैं, “हमारे बचपन में महुआ के पेड़ों की पूरी-पूरी बागे हुआ करती थी। जिन्हें महुवारी कहा जाता था। जब पेड़ों में फूल जमीन पर गिरने लगते थे तो उधर से निकलने वाले प्रत्येक व्यक्ति को मनमोहक ख़ुशबू प्रदान होती थी लेकिन धीरे-धीरे ये पेड़ कम होते जा रहे है जो चिंता का विषय है।” दरअसल इन पेड़ों की कम संख्या होने का प्रमुख कारण यह है कि जो पेड़ पहले से लगे हैं उन्हें मनुष्य अपने लालच में बेच देता है। और नए पेड़ जामुन, महुआ न लगाकर व्यावसायिक पेड़ लगाता है जो उन्हें कम समय में ज्यादा मुनाफा दिलाता है। प्रशासन की नरमी के चलते भी पेड़ों का अस्तित्व खतरे में पड़ता जा रहा है

महुआ

यह मध्य भारत का उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन का एक प्रमुख पेड़ है। महुआ उत्तर भारत के मैदानी इलाकों और जंगलों में पाया जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम मधुका लोंगफोलिआ है। यह तेजी से बढ़ने वाला वृक्ष है जो लगभग 20 मीटर की ऊंचाई तक बढ़ सकता है। इसके पत्ते वर्ष भर हरे भरे रहते हैं। उपयोग: महुआ के बीजों फूलों और लकड़ी का प्रयोग किया जाता है। कच्चे फलों की सब्जी भी बनाई जाती है। पके हुए फलों का गूदा खाने में मीठा होता है। इसके तेल का प्रयोग त्वचा की देखभाल साबुन या डिटर्जेंट का निर्माण करने के लिए और वनस्पति मख्खन के रूप में किया जाता है। इसके सूखे फलों का उपयोग भारत के कुछ क्षेत्रों में शराब उत्पादन में भी किया जाता है। इसकी छाल का प्रयोग औषधीय प्रयोजनों के लिए किया जाता है। आदिवासी समुदायों में इस वृक्ष की पूजा भी की जाती है।

जामुन

जामुन एक सदाबहार पेड़ है। इसके फल बैगनी रंग के होते हैं। यह वृक्ष भारत के साथ-साथ दक्षिण एशिया के देशों में भी पाया जाता है। इसे जामुन, राजमन काला जामुन, जमाली ब्लैकबेरी आदि नामों से जाना जाता है। उपयोग: जामुन का फल 70 प्रतिशत खाने योग्य होता है इसमें ग्लूकोज और फ्रक्टोज दो मुख्य स्रोत होते है। फल में खनिजों की संख्या अधिक होती है। इसमें कम कैलोरी भी होती है। जामुन में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और कैल्शियम की अधिकता होती है। यह लोह का बड़ा स्रोत है। प्रति 100 ग्राम में एक से दो मिग्रा आयरन भी होता है, जो मानव स्वस्थ्य के लिए लाभदायक है।

रिपोर्टर - अरुण मिश्रा

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