मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए ध्यान रखें ये बातें

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कानपुर देहात। ज्यादातर किसानों ने मक्का की फसल काट ली है, फसल काटने के बाद किसान फसल अवशेष का सही प्रबंधन करने के बजाए उसे जला देते हैं जबकि फसल अवशेषों से खाद बनाकर अपने खेत की उर्वरता बढ़ा सकते हैं। कानपुर देहात जिला मुख्यालय से लगभग 40 किमी दूर उत्तर दिशा में बैरी दरियाव गाँव के किसान बाबुल (28 वर्ष) ने इस बार दस बीघा मक्का बोया था।

मक्के की फसल तैयार होने के बाद खेत में ही उसके डंठल को जला दिया। इस बारे में बाबुल बताते हैं, “ हम किराए पर खेत लेते हैं और जो हमें जून-जुलाई के महीने में छोड़ने होते हैं, अगर हमें अगले साल के लिए खेत मिलता है, तब हम सफाई करते हैं, अगर नहीं मिलता है तो मक्के के ठूंठ को खेत में ही जला देते हैं।” अधिकतर किसान हार्वेस्टर से फसल की कटाई करते हैं, जिससे उन क्षेत्रों में फसल के तने का अधिकर भाग खेत में ही रह जाता है। जायद की फसलों के कटने के बाद किसान उसे जला देते हैं, जिससे न तो फसल अवशेष काम का रह जाता है, साथ ही खेत की मिट्टी की उर्वरता भी कम हो जाती है।

केन्द्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान, लखनऊ के निदेशक विनय कुमार मिश्रा कहते हैं, “किसान मक्का, गेहूं, धान आदि फसलों का खेत में काफी अवशेष बच जाता है। ऐसे में फसल अवशेष को नहीं जलाना चाहिए। जलाने से मृदा में मौजूद कार्बन और जीवाणुओं पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है।”

जब गोबर की खाद नहीं मिलती है तो ऐसे में फसल अवशेष का समुचित प्रबंधन करना चाहिए। गेहूं के साथ ही दूसरे फसल अवशेष से भी खेत की उर्वरता बढ़ाई जाती है।  

ऐसे करें प्रबंधन

फसल अवशेषों का उचित प्रबन्ध करने के लिए आवश्यक है कि अवशेष (गन्ने की पत्तियों, मक्के और गेहूं के डंठलों) को खेत में जलाने के बजाय उनसे कम्पोस्ट तैयार कर खेत में प्रयोग करना चाहिए। उन क्षेत्रों में जहां चारे की कमी नहीं होती वहां धान की पुआल को खेत में ढेर बनाकर खुला छोड़ने के बजाय गड्ढ़ों में कम्पोस्ट बनाकर उपयोग कर सकते हैं। 

खेत में अवशेष प्रबंधन

फसल की कटाई के बाद खेत में बचे अवशेष को सड़ाने के लिए किसान फसल को काटने के बाद 20-25 किग्रा नाइट्रोजन प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़क कर कल्टीवेटर या रोटावेटर से मिट्टी में मिला देना चाहिए इस प्रकार अवशेष खेत में ही सड़ऩा शुरू हो जाएंगे। लगभग एक महीने में सड़कर आगे बोई जाने वाली फसल को पोषक तत्व प्रदान कर देंगे क्योंकि कटाई के बाद दी गई नाइट्रोजन अवशेषों में सड़न की क्रिया को तेज कर देती है।

स्वयं वालेंटियर: उमा शर्मा

स्कूल:प्रखर प्रतिभा इंटर कालेज 

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

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