मझाेले किसानों को भा रही सहफसली खेती

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बाराबंकी। छोटे और मझोले किसानों के लिए लहसुन और हरे मिर्च की सहफसली खेती वरदान साबित हो रही है। परंपरागत फसलों के साथ इस तरह की खेती किसानों को अतिरिक्त मुनाफा दिला रही है, जिससे उनका रूझान तेजी से सहफसली खेती की तरफ बढ़ रहा है।

बाराबंकी से लगभग 38 किमी दूर उत्तर दिशा में कस्बा बेलहरा, भटूनायक, सौरभा, भौकों में किसान रबी की फसल में पिछले कई वर्षों से लहसुन और मिर्च की खेती कर रहे हैं लेकिन हाईब्रिड मिर्च की कुछ किस्में सोलजर, यूएस 917 और गोमती के बाजार में आ जाने से अब उत्पादन और भी अच्छा मिलने लगा है। 

इस वर्ष बेलहरा क्षेत्र में हरे मिर्च का क्षेत्रफल काफी बढ़ गया है, जो 100 एकड़ से भी ज्यादा है। इस समय लगभग 30 से 40 रूपए प्रति किलो की दर चल रही है। एक एकड़ क्षेत्रफल से लगभग 100 कुंतल हरी मिर्च का उत्पादन हो जाता है, जो वर्तमान दर से 30 हजार से 40 हजार लाख तक होने की संभावना है।

अपने खेतों में मिर्च की खेती में काम कर रहे किसान चन्द्र मौयार् बताते हैं, “मैनें इस बार लगभग एक एकड़ में हरी मिर्च लगाई है, जिससे लगभग 20 लाख का उत्पादन होता है। अगर बारिश न हुई तो ज्यादा मुनाफा हो सकता है। वो आगे बताते हैं, मिर्च की खेती अगर ऊंची भूमि पर की जाए तो अच्छी आय मिल सकती है।”

इसमें दवाओं का काफी प्रयोग किया जाता है, जिसमें लगभग 5000 प्रति एकड़ का खर्च आता है। इस समय बेलहरा का क्षेत्र का मिर्च लखनऊ, फैजाबाद, गारेखपुर, बस्ती के अलावा गोमती प्रजाति की हरी मिर्च अरब देशों को निर्यात हो रही है, जिससे भविष्य में क्षेत्रफल में विस्तार की अपार संभावनाएं हें। 

वहीं दूसरे किसान बदेश मौयार् बताते हैं, “हमारे पास आधा एकड़ लहसुन और हरी मिर्च का खेत है, जिसमें लगभग 35 हजार की लागत लगी है और 100 कुतंल लहसुन का उत्पादन हुआ है, जिससे 30 से 40 हजार की आय हुई है और मिर्च अबतक लगभग 80 हजार की आमदनी दे चुकी है अगर फसल में कोई बीमारी न लगे तो फसल और अच्छी हो सकती है।”

रिपोर्टर - अरुण मिश्रा

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