मंडियों से बिचौलियों का खत्म होगा राज

मंडियों से बिचौलियों का खत्म होगा राजगाँव कनेक्शन

लखनऊ। फसल पैदा होने के बाद अनाज व फल-सब्जी में होने वाले नुकसान को बचाने के लिए ज़रूरी है कि प्रदेश में अधिक से अधिक कृषि आधारित उद्योग लगाए जाएं।

"बेहतर तकनीक का इस्तेमाल करके हम अनाज में 10 प्रतिशत और फल-सब्जी में 20 से 25 प्रतिशत तक होने वाले नुकसान को बचा सकते हैं। इससे किसानों का मुनाफा बढ़ेगा। साथ ही, देश में हो रही खाद्यान्न की क्षति को बचाया जा सकता है।" यूपी के कृषि उत्पादन आयुक्त प्रवीण कुमार ने गाँव कनेक्शन से कहा, "उपज के बेहतर मूल्य के लिए इसमें गुणात्मक सुधार होना ज़रूरी है।"  

किसानों को मंडियों में अपने उत्पाद का बेहतर मूल्य न मिल पाना भी बड़ी समस्या है। वहां तरह-तरह के शुल्क व बिचौलियों के एकाधिकार के बारे में कृषि उत्पादन आयुक्त प्रवीण कुमार ने कहा, "जहां वर्चस्व होगा, वहां उत्पीडऩ होता है। एकाधिकार खत्म करने के लिए हम एकीकृत लाइसेंस और ई-ट्रेडिंग की व्यवस्था करने जा रहे हैं।"

आगे बताते हैं, "हमारी कोशिश है कि गाजीपुर की मंडी में बैठा व्यापारी गाजियाबाद की मंडी में इंटरनेट के सहारे लाइव वेब स्क्रीनिंग के ज़रिए माल खरीद सके, किसानों का पैसा उनके खाते में और मंडी शुल्क मंडी के खाते में पहुंच जाएगा। इससे बिचौलियों का राज खत्म हो जाएगा।"  

प्रदेश में करीब 90 प्रतिशत छोटी जोत के किसान हैं, इनकी आमदनी बढ़ाने के लिए प्रवीण कुमार ने कहा, "किसानों को अब इंटीग्रेटेड फार्मिंग पर जोर देना चाहिए। हर जगह की अपनी विशेषता है। देखने की ज़रूरत है कि क्या ऐसा आर्थिक मॉडल हो कि हमारे किसान की आमदनी बढ़े।"

यूपी एग्रो किसानों की सुविधा के लिए मोबाइल सोलर पंप विकसित कर रहा है। जो कि उनके खेतों में पहुंच कर कम दाम में सौर ऊर्जा का प्रयोग करके सिंचाई कर सकेंगे। इसे एक जगह फिक्स भी नहीं करना पड़ेगा। 

"हम सौर ऊर्जा के प्रयोग पर काफी ध्यान दे रहे हैं। इसी को देखते हुए इस मोबाइल सोलर प्रणाली को विकसित किया जा रहा है। इसमें सौर ऊर्जा को संरक्षित भी किया जा सकेगा, जिसे बाद में किसान सुविधानुसार उपयोग कर सकेंगे। इसे किसानों और एनजीओ के माध्यम पहुंचाया जाएगा।" कृषि उत्पादन आयुक्त ने कहा।  

बुंदेलखंड और विंध्याचल क्षेत्र में बागवानी को बढ़ावा देने के लिए सरकार बाग लगाने वाले किसानों को आर्थिक मदद भी देगी। ''किसान को बाग लगाने के लिए हर माह तीन हज़ार रुपये प्रति हेक्टेयर दिए जाएंगे। किसान के बाग का सत्यापन हर तीसरे माह किया जाएगा।" प्रवीण कुमार ने बताया।

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