मंडलायुक्त के पहुंचने से पहले चकाचक हुआ गाँव

Arvind ShukklaArvind Shukkla   14 Jan 2016 5:30 AM GMT

मंडलायुक्त के पहुंचने से पहले चकाचक हुआ गाँवगाँव कनेक्शन

कसमंडा (सीतापुर)। विकास कार्यों की सुस्ती पर मंडलायुक्त महेश गुप्ता ने अधिकारियों को फटकार लगाई। मंडलायुक्त का दो दिवसीय दौरा अधिकारियों के लिए जरूर परेशानी भरा रहा, लेकिन हजारों लोगों की समस्याएं रातों-रात सुलझ गईं।

कसमंडा ब्लॉक के कसमंडा गाँव में रात करीब 7 बजे पहुंचे लखनऊ मंडल के आयुक्त महेश गुप्ता, जिलाधिकारी समेत और दूसरे अधिकारी खुली चौपाल के लिए पहुंचे तो 600 से ज्यादा ग्रामीण उनका इंतजार करते मिले। डीएम ने लाउडस्पीकर पर एक-एक मुद्दे पर लोगों से उनकी समस्याएं सुनीं और फिर तत्काल उनका निवारण भी किया।

“आपके गाँव में जो स्वास्थ्य केंद्र है वहां कोई दिक्कत, डॉक्टर मिलते हैं?” डीएम ने सवाल किया तो भीड़ से जोर से नहीं-नहीं की आवाज़ आई। लोगों ने कहा रात में तो दूर डॉक्टर शाम को ही नहीं मिलते। इसके बाद डीएम ने सीएमओ और संबंधित डॉक्टर को फटकार लगाई। डॉक्टर ने आवास न होने की मजबूरी गिनाई तो डीएम ने कहा, स्वास्थ्य केंद्र के बाद आप (डॉक्टर) हर हाल में कुछ दूरी पर स्थित कमलापुर स्वास्थ्य केंद्र में रात को आपातकाल में मौजूद मिलेंगे। इसके बाद भीड़ में काफी देर तक तालियां बजती रहीं।

इसी तरह राशन, पेंशन, बिजली, मनरेगा को लेकर अधिकारी लोगों से बोल-बोल कर समस्याएं पूछते रहे। मिट्टी के बर्तन बनाने के लिए कुम्हार ईश्वरदीन को पट्टा आवंटित था लेकिन ईश्वरदीन को इसकी खबर तक नहीं थी। इसके बाद नाराज डीएम ने लेखपाल सुरेश चंद्र मौर्य को जमकल तलाड़ लगाई और दूसरे दिन जाकर ईश्वरदीन को आवंतिट जमीन पहचान कराने का निर्देश दिया।

अधिकारियों ने न सिर्फ लोगों को उनकी समस्याएं पूछीं बल्कि आम आदमी दुर्घटना बीमा समेत दूसरी कई योजनाओं के लाभ भी गिनाए। इससे पहले छह मजरों वाली ग्राम पंचायत कसमंडा के कसमंडा गांव में सुबह से ही मेले जैसा माहौल था।

गाँव कनेक्शन ने कमिश्नर के आने से पहले कसमंडा गांव का हाल देखा। लखनऊ से करीब 75 किमी दक्षिण दिशा में कसमंडा गांव की सूरत दो दिन में ही बदल गई थी। वर्षों से बदहाल पड़ा बाहर का तालाब दुरुस्त कराया जा रहा था। मनरेगा के 74 मजदूरों को लगाया गया था। गांव की नालियां पक्की और साफ नजर आ रही थीं। दीवारों पर जगह-जगह स्लोगन और सरकारी योजनाओं की जानकारियां लिखी नजर आ रही थीं। पिछले कई दिनों से गांव में हूटर बजाती गाड़ियां चक्कर लगा रही थी। तालाब में मनरेगा के तहत काम कर रही जसमढ़ा गाँव की रेनू बताती हैं, “चलो जो भी आए कम से कम काम तो मिला है।” गांव की बदली सूरत से लोग काफी खुश दिखे। गांव के बाहर बकरियां चाराती मिलीं शकीला (50 वर्ष) बोलीं, “सुने हन बड़े साहब आवइ वाले हैं, तो जरूर कुछ अच्छई होई।” वहीं पास में खड़े श्याम सुंदर (62 वर्ष) ने बताया, “साहब जो दिखाई पड़ने वाला है, बस वहीं चूना-सफेदी दिख रही है। लेकिन चलो अच्छा है, इतना हो गया ये कम थोड़े है।” 

हालांकि लोग लोहिया आवास के आवंटन और पेंशन को लेकर नाराज थे। इस पर गाँव की प्रधान अनिता सिंह के प्रतिनिधि मुकेश सिंह ने बताया, “सबको नियमों के मुताबिक ही आवंटित हुए हैं। बीपीएल सूची 2002 के मुताबिक ही है, मैं उसमें क्या कर सकता था।”

इससे पहले मंडलायुक्त ने जिले में कई जगह निरीक्षण किया। पावर कॉर्पोरेशन के अधिशासी अभियंता को विद्युतीकरण कार्यों में लापरवाही बरतने व डिप्टी सीएमओ को आशा बहुओं के मानदेय भुगतान में शिथिलता बरतने के आरोप में प्रतिकूल प्रविष्टि के निर्देश दिए। इसके अलावा परियोजना निदेशक व डीसी मनरेगा को फटकार लगाते हुए विकास कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। कमिश्नर ने योजनाओं की मॉनिटरिंग ठीक से नहीं पर भी नाराजगी जताई। राज्य वित्त, मनरेगा सहित संचालित सभी योजनाओं का क्रियान्वयन शासन के निर्देशानुसार कराने पर जोर दिया। बसईडीह के पास सरायन नदी पर निर्माणाधीन पुल को 31 मार्च तक बनाकर तैयार करने के निर्देश कार्यदायी संस्था को दिए।

कॉटेज बनी चर्चा का विषय

कसमंडा गाँव में स्कूल के बाहर मंडलायुक्त के रूकने के लिए बनाई गई ‘कॉटेज’ ग्रामीणों के लिए कौतूहल और चर्चा का विषय बनी रही। 40 गुणा 40 फीट के एरिया में टेंट लगा कर विशेष कॉटेज बनाई गई थी। पूरी तरह सफेद चादर के कपड़े से बनाई गई इस कॉटेज में अंग्रेजी टॉयलेट और बड़ा बेड और सोफा तक थे। नाम न छापने की शर्त पर लोकनिर्माण विभाग के एक अधिकारी ने बताया कॉटेज बनाने-बनाने में ही एक लाख 20 हजार का खर्च आया है। बाकी बेड वगैरह अलग से हैं।

एसडीएम ने दिलाया महिलाओं को सम्मान

मंडलायुक्त को सुनने और अपनी समस्याएं सुनने के लिए सैकड़ों की संख्या में महिलाएं भी आईं थी। शाम करीब 6 बजे से ही पुरुष वहां पड़ी कुर्सियों पर बैठ गए थे, जबकि महिलाएं नीचे बिछी पर दरी पर बैठी थीं। इस पर नाराज़ एसडीएम सिधौली

श्रृष्टि धवन ने माइक संभाला और पुरुषों से महिलाओं को कुर्सी देने को कहा। “आप की मां, बहुएं और बच्चे नीचे जमीन पर बैठे हैं, आप लोगों को ये शोभा नहीं देता।” एसडीएम की नसीहत पर पुरुषों ने कुर्सियां छोड़ी तो बुजुर्ग महिलाओं ने एसडीएम को आशीर्वाद दिया। 

पुलिस के ‘व्यवहार’ से नहीं कोई समस्या

मंडलायुक्त के सामने जब अधिकारियों ने पंचायत के लोगों से इलाके के थाने में पुलिसकर्मियों के व्यवहार और उनसे समस्याओं के बारे में पूछा तो भीड़ से आवाज़ नहीं आई। हालांकि बाद में क्षेत्रीय जिला पंचायत सदस्य समेत कई दूसरे लोगों ने कहा कि कोई समस्या नहीं तो मौके पर मौजूद क्षेत्रीय पुलिसवालों ने राहत की सांस ली।

साहब! धान खरीद केंद्र हैं कहां

खुली चौपाल में जब अधिकारियों ने लोगों से धान की खरीद और केंद्र पर होने वाली समस्या के बारे पूछा तो भीड़ से खड़े होकर प्रताप सिंह (55 वर्ष) ने पूछा, “साहब समस्या तो तब बताएंगे पहले ये तो बता दीजिए इलाके में धान खरीद केंद्र है कहां?। इस पर संबंधित अधिकारी बगले झांकने लगो। इसके बाद एसडीएम सिधौली ने लोगों को खरीद केंद्रों की जानकारी दी।

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