मंदिर-ट्रस्ट की ज़मीन पर करा डाली प्लाटिंग

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बीकेटी। सरकारी भूमि पर कब्जा करने वालों की नजरें अब मंदिर और ट्रस्ट की ज़मीनों पर भी टेढ़ी हो गई हैं। ऐसे ही एक मामले में ट्रस्ट के मूल प्रपत्रों में फेरबदल कर करोड़ों की जमीन को कौडि़यों के भाव में बेचने और खरीदने की बात सामने आई है। मामले के कोर्ट में होने के बाद भी करीब 30 बीघा ज़मीन पर प्लांटिंग करा दी गई है। 

राजधानी लखनऊ में हनुमान जी के प्रमुख मंदिरों का संचालन रामानंदीय वैष्णव संत समाज मंडल द्वारा किया जाता है। शहर के सभी प्रमुख मंदिरों के पास उनकी अपनी संपत्तियां हैं जो की वर्तमान में करोड़ों की हैं।

मामला वर्ष 1996 का है। संत मंडल द्वारा तहसील सदर की ग्राम पंचायत अल्लू नगर दिगुरिया के मजरा ककौली स्थित मंदिर और उसकी करीब 300 बीघा संपत्ति की देखरेख के लिए बाबा अंजनी दास चेला अयोध्या दास को महंत नियुक्त किया गया और मंदिर की संपत्ति के देख रेख का दायित्व सौंपा गया। 

वर्ष 2006 में बाबा अंजनी दास ने पंकज त्रिपाठी नाम के एक व्यक्ति के साथ मिलकर समिति संख्या i48145 को श्री छाछी कुआं हनुमान जू मंदिर सेवा समिति के नाम से पंजीकृत करा लिया तथा मूल प्रपत्रों में गड़बड़ी कर हनुमान मंदिर की दाऊद नगर स्थित भूमि अपने नाम पर तथा ककौलु स्थित जमीन अपने मामा सर्वजीत दास और इंद्रजीत दास के नाम दाखिल खारिज करवा दी। जब रामानंदीय वैष्णव संत मंडल को इस विषय में जानकारी हुई तो संत मंडल ने हनुमान मंदिर की समस्त सम्पत्तियों का दाखिल-खारिज फिर से हनुमान जी के नाम पर करने हेतु न्यायालय में वाद दाखिल किया। मुकदमा लंबित होने का लाभ उठाते हुए बाबा अंजनी, सर्वजीत और इंद्रजीत ने ट्रस्ट की लगभग 30 बीघा जमीन को बेच डाला।

बाबा अंजनी दास को संत मंडल के सम्मुख तलब किया गया जहां अंजनी दास ने वर्ष 2009 में लिखित रूप से संत मंडल से क्षमा याचना करते हुए बताया कि संत मंडल और ट्रस्ट के नियमों के तहत मुझे हनुमान जी की संपत्ति को अपने और सर्वजीत और इंद्रजीत के नाम कराने का कोई अधिकार नहीं था। अंजनी दास ने बताया कि मामा सर्वजीत और इंद्रजीत के बहकावे में आकर संस्था के सचिव पंकज त्रिपाठी के साथ मिलकर मैंने जमीन 54 लाख में बेच दी।

रिपोर्टर - अश्वनी द्विवेदी

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