मोदी की शोपीस योजना में भाजपा शासित राज्य फिसड्डी

मोदी की शोपीस योजना में भाजपा शासित राज्य फिसड्डीgaoconnection

लखनऊ।देश के सभी 14 करोड़ किसानों को इस वित्तीय वर्ष के अंत तक मृदा स्वास्थ्य कार्ड देने की केंद्र की योजना को देश के 12 बड़े कृषि प्रधान राज्यों में ही धीमी गति का सामना करना पड़ रहा है। इसमें से ज्यादातर राज्य भाजपा शासित ही हैं।

कृषि मंत्रालय के तहत आने वाली मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना की वेबसाइट (soilhealth.dac.gov.in) पर उपलब्ध 24 मई 2016 तक के प्रगति के आंकड़ों के अनुसार भाजपा-शासित और उसकी गठबंधन सरकारों वाले राज्य मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, हरियाणा, पंजाब, जम्मू एवं कश्मीर, असम (हाल ही में सत्ता में आई) सबसे बुरा प्रदर्शन करने वाले राज्यों में शामिल हैं। इसी सूची में उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, बिहार, पश्चिम बंगाल और केरल जैसे कृषि प्रधान राज्य भी हैं।  मार्च 2017 तक 1.27 करोड़ कार्ड के लक्ष्य के मुकाबले एमपी 9.7 प्रतिशत कार्ड बांट पाया है। 

इसी तरह राजस्थान 1.29 करोड़ के लक्ष्य का केवल 9.4 प्रतिशत, छत्तीसगढ़ 38.90 लाख के लक्ष्य का 17 प्रतिशत, हरियाणा 40.36 लाख लक्ष्य का दो प्रतिशत, पंजाब 40.62 लाख कार्ड के लक्ष्य का 7.6 प्रतिशत, जम्मू और कश्मीर 9 लाख के लक्ष्य का 3.9 प्रतिशत और असम के 10.54 लक्ष्य में से लगभग एक प्रतिशत कार्ड ही 24 मई तक बांट सका है।

इसी तरह उत्तर प्रदेश के 2.6 करोड़ लक्ष्य में से 5.3 प्रतिशत, कर्नाटक के 90.21 लाख लक्ष्य में से महज़ आधा यानि 0.5 प्रतिशत, बिहार 72.36 लाख लक्ष्य का 17 प्रतिशत, पश्चिम बंगाल 70.19 लाख के लक्ष्य का एक प्रतिशत और केरल सात लाख के लक्ष्य का आठ प्रतिशत कार्ड ही बांट पाया है। महाराष्ट्र ने अपने 1.2 करोड़ कार्ड वितरण के लक्ष्य का सबसे ज्यादा 26 प्रतिशत काम पूरा कर लिया है।

पूरे देश के कुल कार्ड वितरण की बात करें तो सभी 14 करोड़ कार्डों में से अब तक तीन करोड़ मृदा स्वास्थ्य कार्ड ही बांटे जा सके हैं। पांच दिसम्बर 2015 को शुरू हुई इस योजना का निर्धारित लक्ष्य पूरा होने में केवल 10 महीने का ही समय बचा है और अभी 10 करोड़ कार्ड बांटे जाने हैं। मृदा परीक्षण के लिए मिट्टी के नमूने साल में दो बार ही लिए जा सकते हैं, एक बार खरीफ फसल के पहले और दूसरा रबी फसल के पहले। इस समय आमतौर पर खेतों में कोई फसल नहीं होती।

व्यापार पर लिखने वाले राष्ट्रीय अखबार बिज़नेस स्टैण्डर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार केंद्र अपनी समीक्षा में इस धीमी गति का कारण राज्यों द्वारा योजना के बजट का उनका हिस्सा रिलीज़ करने में की जा रही देरी, परीक्षण प्रयोगशालाओं की स्थापना और टेक्नीशियन और वैज्ञानिक नियुक्त करने में देरी, साथ ही साथ किसानों को योजना के प्रति जागरूक न करने को बता रहा है। इस योजना के लिए केंद्र एक राज्य को पूरे बजट का 60 प्रतिशत हिस्सा देता है, शेष 40 प्रतिशत राज्य को देना होता है।केंद्र जल्द ही धीमी रफ्तार वाले राज्यों पर नज़र रखने के लिए एक संयुक्त सचिव की नियुक्ति भी कर सकता है।

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