मोदी ने भाजपा-सपा मिलीभगत पर पर्दा डालने की कोशिश: मायावती

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लखनऊ (भाषा)। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की मुखिया मायावती ने पार्टी पर भ्रष्टाचार को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) से गलबहियां करने का आरोप के संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर पलटवार करते हुए आज कहा कि बसपा ने हमेशा सपा के भ्रष्टाचार की जांच करायी है और मोदी ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर जो भी कहा वह वास्तव में सपा और भाजपा की मिलीभगत पर पर्दा डालने की कोशिश है।

मायावती ने भाजपा पर कैराना से कथित रुप से हिन्दू परिवारों के पलायन के मुद्दे को गर्माकर हिन्दू-मुस्लिम फसाद कराने की साजिश रचने का भी आरोप लगाया और कहा कि इस षड्यंत्र को मीडिया ने ही विफल किया।

बसपा प्रमुख ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कल इलाहाबाद में अपनी रैली के दौरान बसपा और सपा के बीच लूट का कांट्रैक्ट होने की बात कही, जो सरासर गलत है। उन्होंने कहा, ‘‘सपा की पिछली सरकार के शासनकाल के बहुचर्चित पुलिस भर्ती घोटाले और मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष में हुए भ्रष्टाचार की जांच मेरी ही सरकार ने करायी थी। स्पष्ट है कि मेरे शासनकाल में सपा के घोटालों की जांच करायी गयी है। इसके बावजूद मोदी ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर जो भी कहा वह वास्तव में  सपा-भाजपा की मिलीभगत पर पर्दा डालने की कोशिश है।'' मायावती ने कहा कि राज्यसभा और विधान परिषद चुनाव में अपने दो प्रत्याशियों की हार के बाद भाजपा बुरी तरह से जमीन पर आ गयी है। इससे ध्यान हटाने के लिये उसने कैराना का मुद्दा उठाया।

उन्होंने कहा, ‘‘एक सोची समझी साजिश के तहत कैराना क्षेत्र के कुछ लोगों के पलायन का मामला कुछ ही घंटे में मीडिया में गर्म करके पूरे प्रदेश में ऐसा प्रचार किया गया जैसे वहां मुसलमानों ने हिन्दुओं को जबरन पलायन के लिये मजबूर किया हो। यह हिन्दू-मुस्लिम फसाद कराने की साजिश थी। इस घिनौनी राजनीतिक साजिश को मीडिया ने ही विफल किया।''

मायावती ने आरोप लगाया कि कांग्रेस, सपा और भाजपा के शासनकाल में उत्तर प्रदेश से बड़े पैमाने पर पलायन हुआ। अंतर केवल इतना है कि कांग्रेस के शासनकाल में रोजी-रोटी के लिये बड़े शहरों में पलायन हुआ लेकिन वर्तमान सपा सरकार के शासनकाल में कैराना से ही नहीं बल्कि अन्य जिलों खासकर बुंदेलखण्ड क्षेत्र से बड़े पैमाने पर पलायन हुआ। उसका प्रमुख कारण सपा के लोगों की गुंडागर्दी के साथ स्थानीय लोगों की गरीबी और भुखमरी है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के लगभग 50 जिलों खासकर बुंदेलखण्ड में सूखे की अत्यन्त खराब स्थिति होने के कारण अत्यधिक पलायन हुआ है। लोकसभा चुनाव में प्रदेश से भारी जीत के कारण ही केंद्र में बहुमत की सरकार बनाने वाली भाजपा की भी इस मामले में जिम्मेदारी बनती है।

मायावती ने उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग एक बार फिर करते हुए कहा, ‘‘केंद्रीय मंत्री उत्तर प्रदेश में आकर कोरी बयानबाजी करते हैं लेकिन भाजपा इस प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने की हिम्मत नहीं जुटा पायी। राष्ट्रीय कार्यकारिणी में भाजपा ने बहुत घड़ियाली आंसू रोये लेकिन वह प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू करने की चेतावनी देने की हिम्मत नहीं जुटा पायी।'' उन्होंने कहा कि भाजपा प्रदेश की सपा सरकार से मिलीभगत करके अगला विधानसभा चुनाव लड़ने में ही अपना भला देख रही है। जबकि केंद्र को चाहिए कि वह सपा सरकार को बर्खास्त करके चुनाव कराए।

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