क्या आप जानते हैं मॉनसून में रहता है आँखों को बीमारियों का खतरा

मॉनसून में आँखों का रखिए ख़ास ख्याल, जानिए किन बातों का रखें ध्यान

क्या आप जानते हैं मॉनसून में रहता है आँखों को बीमारियों का खतरा

ज़रा संभल कर ये मॉनसून का मौसम है। आप सोच रहे होंगे आखिर मॉनसून में संभलना क्यों। दरअसल अपने साथ हल्की बारिश का खुशनुमा मौसम लाने वाला ये मॉनसून आपकी आँखों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। जी बिल्कुल, मॉनसून के दौरान आंखें लाल होना, आंखों में खुजली, आंखों से पानी आना, आंखों में दर्द और आँखों से चिपचिपा पदार्थ निकलने जैसी परेशानियों से आपको रुबरु होना पड़ सकता है, ये मॉनसून स्पेशल बीमारियां हैं।



नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ आलोक माहेश्वरी बताते हैं बरसात के दिनों में आंखों की बीमारियां होना आम है। आंखों की बीमारियों में सबसे कॉमन कंजंक्टिवाइटिस है। आंख के ग्लोब पर (बीच के कॉर्निया एरिया को छोड़कर) एक महीन झिल्ली चढ़ी होती है, जिसे कंजंक्टाइवा कहते हैं। कंजंक्टाइवा में किसी भी तरह के इंफेक्शन या एलर्जी होने पर सूजन आ जाती है, जिसे कंजंक्टिवाइटिस कहा जाता है। इसे आई फ्लू भी कहा जाता है। कंजंक्टिवाइटिस 3 तरह का होता है-- वायरल, एलर्जिक और बैक्टीरियल।

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घबराइए मत कुछ बातों को ध्यान में रखकर आप इन बीमारियों से अपनी आँखों का बचाव कर सकते हैं। जैसे

- बचाव के लिए साफ-सफाई रखना सबसे जरूरी है। इस मौसम में किसी से भी, जिसे कंजंक्टिवाइटिस हो हाथ मिलाने से भी बचें क्योंकि हाथों के जरिए बीमारियां फैल सकती हैं। दूसरों की चीजों का भी इस्तेमाल न करें।

-आंखों को दिन में 5-6 बार ताजे पानी से धोएं। अच्छी क्वॉलिटी का धूप का चश्मा पहनें। चश्मा आंख को तेज़ धूप, धूल और गंदगी से बचाता है, जो एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस के कारण होते हैं।

-सुबह के वक्त आंख चिपकी मिलती है और कीचड़ आने लगता है, तो यह बैक्टिरियल कंजंक्टिवाइटिस का लक्षण हो सकता है। इसमें ब्रॉड स्पेक्ट्रम ऐंटिबायॉटिक आई-ड्रॉप्स जैसे सिप्रोफ्लॉक्सोसिन, ऑफ्लोक्सेसिन, स्पारफ्लोक्सेसिन का इस्तेमाल कर सकते हैं। एक-एक बूंद दिन में तीन से चार बार डाल सकते हैं। दो से तीन दिन में अगर ठीक नहीं होते तो किसी आंखों के डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

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-अगर आंख लाल हो जाती है और उससे पानी गिरने लगता है, तो यह वायरल और एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस हो सकता है। वायरल कंजंक्टिवाइटिस अपने आप 5-7 दिन में ठीक हो जाता है लेकिन इसमें बैक्टीरियल इन्फेक्शन न हो, इसलिए ब्रॉड स्पेक्ट्रम ऐंटिबायॉटिक आई-ड्रॉप का इस्तेमाल करते रहना चाहिए।

-आंखों को दिन में 5-6 बार साफ पानी से धोएं। आंखों को मसलें नहीं, क्योंकि इससे रेटिना में जख्म हो सकता है। ज्यादा समस्या होने पर खुद इलाज करने के बजाय डॉक्टर की सलाह लें। आई-ड्रॉप्स सिर्फ डॉक्टर के कहने पर ही डालें।

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