मरीजों को इलाज के नाम पर मिल रही तारीख़

मरीजों को इलाज के नाम पर मिल रही तारीख़gaonconnection

लखनऊ।केजीएमयू के डॉक्टर कमल कुमार: बुधवार को आना मेरी ड्यूटी बुधवार को लगती है तब देखेंगे मरीज कैसा है।

मरीज के पिता दावालामा: ठीक है डॉक्टर साहब तब तक कोई दवा ही लिख दीजिए। 

डॉक्टर कमल: हम ऐसे कैसे दवा लिख दें, बुधवार को ही देखेंगे। जाओ अगले हफ्ते आना।  

यह बातचीत केजीएमयू के डॉक्टर कमल कुमार और एक मरीज के पिता दावालामा की है, जिसकी बेटी रेशमा (16 वर्ष) को पीलिया हो गया और वह इतनी गंभीर है कि उसकी जिन्दगी का कोई भरोसा नहीं क्योंकि इलाज तीन महीने पहले भी केजीएमयू से चल रहा था, जिस कारण तबीयत बिगड़ने पर वह फिर केजीएमयू लेकर दौड़े।

केजीएमयू और ट्रामा सेंटर के डॉक्टर इलाज के लिए आए मरीजों को सिर्फ तारीख ही दे रहे हैं। नेपाल के रहने वाले दावालामा (35 वर्ष) का कहना है, “तीन महीने पहले लड़की को पीलिया हो गया था तो केजीएमयू से डॉक्टर कमल कुमार का इलाज चल रहा था। इलाज के बावजूद लड़की की तबीयत बिगड़ती गई। बिटिया के पेट में पानी भर गया और हाथ पैर एकदम पीले पड़ गये तो हम लोग उसे फिर केजीएमयू लेकर आए हैं। यहां ओपीडी में मौजूद डॉक्टर ने कहा कि यह जिस डॉक्टर का केस है वह ही देखेंगे।

ढूढ़ते-ढूढ़ते हम किसी तरह डॉक्टर के पास पहुंचे तो उन्होंने बुधवार को देखने की बात कह कर वापस लौटा दिया और कहा मरीज बहुत गंभीर हालत में है। इसे ट्रामा सेन्टर में भर्ती करा दो। ट्रामा सेन्टर में लाने पर यहां भर्ती ही नहीं कर रहे। बस एक पर्चा बना दिया और डॉक्टर नीरज कुमार सिंह को दिखा दिया।” दावालामा आगे बताते हैं, “डॉक्टर नीरज कुमार सिंह ने एक पर्चे पर अल्ट्रासाउंड के लिए लिख दिया। अल्ट्रासाउंड कराने गए तो उसने केजीएमयू भेज दिया। वहां पीआरओ ने अल्ट्रासाउंड की पांच अगस्त 2016 की तारीख दे दी। और बोले की ज्यादा जल्दी हो तो बाहर से करा आओ। अब हम गरीब जाएं भी तो कहां जाएं। एक तरफ बिटिया का दर्द नहीं देखा जाता दूसरी तरफ इलाज के लिए अस्पताल के सिर्फ चक्कर कटवा रहे हैं।”

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