मथुरा में बवाल, एसओ की गोली लगने से मौत

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लखनऊ। कब्जा की गई जमीन को मुक्त कराने गए पुलिस बल पर प्रदर्शन कर रहे आंदोलनकारियों ने अचानक हमला बोल दिया। फायरिंग और हथगोलों से किए गए हमले में एसपी सिटी को गोली लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। फायरिंग में फरह थानाध्यक्ष को भी गोली लगी, जिन्होंने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। 

मथुरा जिले के जवाहर बाग इलाके में सरकारी जमीन पर आजाद भारत विधिक वैचारिक सत्याग्रही नामक एक संगठन दो साल से कब्जा जमाए हुए है। यहां करीब तीन हजार लोग रह रहे थे। हाईकोर्ट के आदेश पर प्रशासन पिछले दो महीने से इस जमीन को खाली कराने की तैयारियों में लगा हुआ था। यह जवाहर बाग उद्यान विभाग की संपत्ति है। पूर्व में भी कई बार इस जमीन को खाली कराने की कोशिश की गई थी लेकिन प्रदर्शनकारियों के विरोध के चलते प्रशासन को पीछे हटना पड़ा था।

गुरुवार को प्रशासन और पुलिस की टीम इस कब्जे को हटाने के लिए पहुंची थी, लेकिन पुलिस बल को देखते ही प्रदर्शनकारियों ने फायरिंग करना शुरू कर दी। करीब चार बजे पहुंची टीम पर अचानक हुए हमले में गोली फरह थानाध्यक्ष संतोष यादव को लगी और वह शहीद हो गए। इस दौरान एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी को भी सिर में गोली लग गई, उन्हें नोएडा रेफर कर दिया गया है। देर रात फायरिंग के बाद पुलिस ने बाग को खाली करा लिया। आंदोलन का नेतृत्व रामवृक्ष यादव कर रहा था। पुलिस ने करीब तीन सौ आंदोलनकारियों को गिरफ्तार किया है।

दो साल से कब्जा जमाए थे सत्याग्रही

पिछले दो साल से राजकीय उद्यान जवाहर बाग पर कब्जा जमाए सत्याग्रहियों को हटाने की तैयारी प्रशासन दो महीने से कर रही थी। गुरुवार दोपहर डीएम राजेश कुमार एवं एसएसपी राकेश ने संयुक्त रूप से प्रेसवार्ता कर ऑपरेशन किसी भी क्षण शुरू करने की बात कही। शाम करीब सवा पांच बजे सुरक्षाबलों को लेकर अफसरों ने जवाहरबाग को चारों ओर से घेर लिया और अंदर घुस गए। वहां जमे सत्याग्रहियों ने नारेबाजी करते हुए जबरदस्त प्रतिरोध किया और हथियारों के साथ पुलिस बल पर टूट पड़े। पुलिस बल के अंदर प्रवेश करते ही सत्याग्रहियों ने मोर्चा संभाल कर अचानक फायरिंग शुरू कर दी। जवाब में पुलिस ने भी फायर झोंके। इसके बाद गोलियों की तड़तड़ाहट के बीच ही जवाहरबाग से विस्फोट के धमाके होने लगे। सत्याग्रहियों की ओर से जबरदस्त फायरिंग के आगे सुरक्षा बल के जवान संभल नहीं पाए और घायल हो गए। 

पेड़ों पर चढ़कर फायरिंग

सुरक्षा बलों और सत्याग्रहियों में संघर्ष के दौरान सत्याग्रही पेड़ों पर चढ़कर फायरिंग कर रहे थे। गोलियों के बीच जवाहरबाग से धमाके भी हो रहे थे। सुरक्षा बल बाग में सत्याग्रहियों के ठिकाने की ओर बढ़ रहे थे, तभी वहां आग लगा दी गई। महिलाएं और बच्चे दहशत के मारे भागने लगे। शाम करीब सात बजे तक घायल एक दर्जन जवान अस्पतालों में भर्ती कराए जा चुके थे। ऑपरेशन जवाहरबाग के लिए बढ़ाई गई फोर्स के बाद सत्याग्रही फायरिंग रोकने की अपील माइक से करने लगे। कार्रवाई के पहले दौर में छह सत्याग्रही गोली लगने से घायल हुए हैं। कार्रवाई को लेकर पूरे शहर में अफरातफरी का माहौल और अफवाहों का बाजार गर्म है।

यह है जवाहरबाग मामला

यह जवाहरबाग कभी उद्यान विभाग का पार्क हुआ करता था, जो अब पूरी तरह से नष्ट हो चुका है। जवाहरबाग में सौ एकड़ से अधिक जमीन पर सत्याग्रहियों का कब्जा है। इसमें आम, बेल और आमला के वृक्ष थे। इन वृक्षों की लकड़ियां भी काट गई हैं। यहां स्थापित दो नलकूपों पर कब्जा है। सत्याग्रहियों का जवाहर बाग में कब्जा हो जाने के बाद से यहां किसानों का आना-जाना लगभग बंद हैं। यहां तक कि कर्मचारियों के साथ सत्याग्रहियों के आए दिन झगड़े और मारपीट की घटनाओं के कारण कर्मचारियों ने कार्यालय जाना ही बंद कर दिया है। कार्यालय के मुख्य द्वार पर ताला है। पिछले गेट का उपयोग कर्मचारी करते हैं।

कौन हैं ये लोग

दो साल से अधिक समय पहले, बाबा जय गुरुदेव से अलग हुए समूह के कार्यकर्ताओं ने खुद को ‘‘आजाद भारत विधिक विचारक क्रांति सत्याग्रही'' घोषित किया था और धरने की आड़ में जवाहर बाग की सैकड़ों एकड़ भूमि पर कब्जा कर लिया था। उनकी मांगों में भारत के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री का चुनाव रद्द करना, वर्तमान करेन्सी की जगह ‘आजाद हिंद फौज' करेन्सी शुरू करना, एक रुपये में 60 लीटर डीजल और एक रुपये में 40 लीटर पेट्रोल की बिक्री करना शामिल है।

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