मुर्दा हो चुके क्षेत्रों में नई जान फूकने का प्रयास

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जालौन (उत्तर प्रदेश)। वर्ष 2000 के बाद से तेरहवां सूखा झेल रहे बुंदेलखंड के जालौन जि़ले में दूर तक फैले नीले रंग के सौर ऊर्जा के पैनल बुंदेलखंड की आशा हैं।

कानपुर से जालौन जिले के मुख्यालय उरई को मिलाने वाले बारिश से ढके राष्ट्रीय राजमार्ग 25 से कुछ ही किमी अंदर सौ एकड़ में फैले इस यूपी के सबसे बड़े सौर ऊर्जा पार्क से बुंदेलखंड में मुर्दा हो चुके उद्योगों के क्षेत्र में जान फूंकने की कोशिश की जा रही है। बुंदेलखंड के भाग को यूपी का सौर ऊर्जा उत्पादन का केंद्र बनाने की ओर कदम बढ़ाया जा रहा है।

जहां तक नज़र पहुंचे सिर्फ चटख़ीले नीले रंगे के सूरज की ऊष्मा को बिजली में परिवर्तित करने वाले पैनल ही पैनल, 250 एकड़ में दिखेंगे। इन पैनलों का आकार आपके घर की छतों में जो छोटे सौर ऊर्जा पैनल लगते हैं उनसे कम से कम दस गुना ज्यादा है। 

बुंदेलखंड के कुल 13 और यूपी बुंदेलखंड के सात जिलों में से एक जालौन बुंदेलखंड में उद्योगों का प्रवेश द्वारा बन सकता है, क्योंकि कानपुर व कानपुर देहात के बाद अब उद्योग धीरे-धीरे इस जिले की ओर खिसक रहे हैं। जानकारों के अनुसार अभी तक बुंदेलखंड में उद्योग न आने के पीछे बिजली की कमी बहुत हद तक जिम्मेदार है, ऐसे में जालौन का ये सौर ऊर्जा पार्क इस पूरे क्षेत्र की बहुत बड़ी समस्या का हल खोजता दिखता है। 

“अगर केवल तुरंत की ही संभावनाओं की बात करें तो बुंदेलखंड केवल सोलर ऊर्जा से बिजली बनाकर ही पांच हज़ार करोड़  रुपए तक कमा सकता है, जो कि इतने बड़े क्षेत्र के लिए कम है, लेकिन इसके बूते जब सरकार यहां अन्य उद्योगों को आकर्षित करेगी, तो वो बड़ा काम होगा,” यूपी में उद्योगों के संगठन ‘फिक्की’ के यूपी चेयरमैन एलके झुनझुनवाला ने गाँव कनेक्शन से कहा। 

वे स्वयं बुंदेलखंड के महोबा जिले में सोलर ऊर्जा उत्पादन प्लांट लगाने के लिए ज़मीन खरीद चुके हैं। आज़ादी के बाद से ही उद्योगों का अकाल झेल रहे बुंदेलखंड में यूपी सरकार यहां की अभिशाप, तेज़ गर्मी को यहां की ताकत में बदलना चाहती है। इसी उद्देश्य से उसने अपनी औद्योगिक नीति और सौर ऊर्जा नीति में बुंदेलखंड में सौर ऊर्जा  उत्पादन में आगे आने वाली कंपनियों को भारी रियायत देने का प्रावधान किया है। सरकार की ये मेहनत रंग ला रही है। 

सितम्बर 2015 में शुरू होने के बाद जालौन के सौर ऊर्जा पार्क में अब तक दो कंपनियों ने 50-50 मेगावॉट के सौलर प्लांट स्थापित करके बिजली उत्पादन शुरू भी कर दिया है। वर्तमान समय में यह पार्क 100 मेगा वॉट बिजली उत्पादित कर रहा है। इतनी बिजली से 10,000 घरों में एक बल्ब (100 वॉट) जलाया जा सकता है। आने वाले समय में इस पार्क में कई अन्य बड़ी कंपनियां भी अपना प्लांट स्थापित करने वाली हैं।

जालौन सोलर पार्क के लिए राज्य की कैबिनेट ने यूपीनेडा द्वारा एप्रूव किए गए 15 प्रोजेक्ट्स को पहले ही अनुमति दे दी है। इन प्रोजेक्ट्स के ज़रिए यह सोलर प्लांट लगभग 215 मेगावॉट बिजली उत्पन्न कर पाएगा। इससे प्रदेश में खूब निवेश भी आएगा क्योंकि एक 50 मेगावॉट का प्लांट स्थापित करने में 300 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च आता है।

इन प्रोजेक्ट्स को लगाने वाली कंपनियों में अडानी ग्रुप, सुखवीर एग्रो एनर्जी, ज़ी का ऐस्सल ग्रुप, सहसधारा एनर्जी प्रा.लि. (चेन्नई), सुधाकरा इंफोटेक प्रा लि (हैदराबाद) के साथ-साथ कई अन्य ग्रुप शामिल हैं। इनके अलावा यूपी पावर कार्पोरेशन लि. स्वयं झांसी में 30 मेगावॉट का प्लांट स्थापित करेगा। ऐसा ही 50 मेगावॉट का एक अन्य प्लांट जालौन की परासन तहसील में केंद्र सरकार से संबद्ध कंपनी सौर ऊर्जा लि. द्वारा स्थापित किया जा रहा है।

सोलर हब बनने से पनपेगा रोज़गार: उन्नीस वर्ष का जीतू जालौन शहर में एक कैब सर्विस में काम करता है। कुछ सालों पहले तक जीतू काम की तलाश में जिले से बाहर जाता था। लेकिन पिछले साल सब सोलर पार्क बनना शुरू हुआ तो जीतू को पार्क में पैनल सेट करने का काम मिल गया। उसे रोज़ के 300 रुपए मिलते थे। जीतू ने बताया, “सोलर पार्क की वजह से यहीं रुक गए थे। अच्छा काम था, पैनल सेट करना जल्दी सीख लिया था, फिर यही काम करने लगे।”

पार्क का काम छोड़ा क्यों, इसके जवाब में जीतू ने बताया, “कार का काम ज्यादा  पैसे हैं, लेकिन काम वो भी ठीक था, कम से कम से जालौन में रुकने को तो मिल गया था।”

अप्रत्यक्ष रूप से ही सही लेकिन सोलर पार्क अभी भी जीतू को रोज़गार दे रहा है। दरअसल पार्क की स्थिति की जानकारी होने की वजह से जब भी कोई मुआइना करने आता है, या पार्क को देखना चाहता है तो कैब सर्विस जीतू को ही भेजती है।

सिर्फ इस सोलर पार्क में नहीं बल्कि पूरे बुंदेलखंड में सोलर उत्पादन उद्योग आने से रोज़गार बढ़ने की स्थिति के बारे में बताते हुए जालौन के पार्क में सोलर उत्पादन कर रही कंपनी ‘एस्सेल गुप’ (ज़ी मीडिया समूह की मालिक कंपनी) के प्लांट प्रमुख योगेश ने गाँव कनेक्शन से कहा, “सोलर इंडस्ट्री से अथाह रोज़गार के अवसर आएंगे। हमें इतने बड़ पार्क को बनाने फिर उसे व्यवस्थित रखने के लिए कई लोग चाहिए होते हैं। अगर आस-पास से ही ट्रेन्ड या फिर तकनीकी ज्ञान वाले कर्मी मिल जाते हैं तो इससे बढ़िया स्थिति कुछ नहीं हो सकती।” 

सोलर पावर उत्पादन प्लांट पर मिलने वाली छूट: सोलर प्लांट लगाने के इच्छुक हर उद्योग के लिए सिंगल विंडो सिस्टम है। यानि ज़मीन से लेकर सरकारी विभागों से अनुमति और उपकरणों की खरीद तक के लिए एक नोडल एजेंसी मददगार होगी। यूपी में नोडल एजेंसी उत्तर प्रदेश नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी यानि यूपीनेडा है। 

यदि सोलर फार्म में 500 करोड़ से ज्यादा का निवेश किया जा रहा है तो उद्योग को खास रियायतें भी दी जाएंगी।  सरकार सोलर प्लांट से उत्पादित बिजली खरीदने का अनुबंध करेगी। बिलती आम दर छह रुपए प्रति यूनिट से ज्यादा नौ रुपए प्रति यूनिट में बिजली कंपनियों से खरीदेगी। सोलर प्लांट से ग्रिड तक बिजली ले जाने के लिए खंबों और तार का जाल बिछाने का काम सरकार खुद करेगी।

उत्तर प्रदेश सरकार की इंडस्ट्री पॉलिसी 2012 के तहत जितनी रियायतें दी जाती  हैं, वो भी सोलर ऊर्जा के क्षेत्र में आने वाले उद्योगों को दी जाएंगी। यानि मुख्यत: ज़मीन खरीदने से जुड़ी रियायतें। सरकार शैक्षिक संस्थानों के साथ मिलकर सौर ऊर्जा उद्योग के लिए ज़रूरी हुनर के साथ मैनपावर विकसित करने में मदद करेगी। प्लांट स्थापित करने में लगने वाले कच्चे माल पर सरकार सब्सिडी भी देगी।

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