नाले से होती है फसलों की सिंचाई

नाले से होती है फसलों की सिंचाईगांव कनेक्शन, इलाहाबाद, नाले की समस्या

इलाहाबाद। शहर का गन्दा पानी गंगा नदी में मिलने से पहले सफाई के लिए फिल्टर होने के लिए प्लांट में जाता है और फिर वहां से गंगा में जाने में दस किलो मीटर का रास्ता तय करता है। इन दस किलोमीटर के रस्ते में कई एकड़ खेत आते हैं, जिनकी सिंचाई में इसी नाले का पानी काम आता है। यूं तो आम लोग इस नाले को नाला ही कहेंगे, लेकिन यहां रहने वाले किसान इस नाले को नहर कहते हैं और इस नहर को अपनी फसलों की सिंचाई का ज़रिया बनाया है। 

 इस नाले के किनारे हर तरह की फसल होती है, जहां से नाला शुरू होता है वहां पर लोग इस पानी का इस्तेमाल फूलों की सिंचाई के लिए करते हैं। गंगा के किनारे हर तरह के फूल उगाये जाते हैं और उन फूलों की सिंचाई के लिए इसी पानी का प्रयोग होता है। धान के मौसम में धान की सिंचाई के साथ-साथ गेहूं के लिए भी यही माध्यम होता है। नाच्चु यादव (45 वर्ष) जो की पांच बीघे में गेहूं की खेती करते हैं, वो बताते हैं, ''यहां पर सिंचाई के लिए सिर्फ यही एक माध्यम है। दूसरों के लिए तो ये नाला है पर हमारे लिए तो यह हमारी नहर है। खेत गंगा के किनारे होने पर हमारी पैदावार भी अच्छी होती है। यहां पर हमे एक बीघे में करीब 15 कुंटल गेहूं मिलता है और मेहनत भी कम करनी पड़ती है।"

 ये सारे खेत गंगा और यमुना के किनारे हैं इसलिए इन खेतों में नमी बनी रहती और मिट्टी अच्छी होने के कारन किसानों को अच्छा मुनाफा  होता है। महेश पुरी (35 वर्ष) जो की यहीं पर किसानी करते हैं, वो बताते हैं, ''यहां के सारे खेत खुले में हैं और सबसे ज्यादा परेशानी हमें नील गाय से होती है। रात में नील गाय खेत में घुस कर फसल बर्बाद कर देती हैं, यहां पर अपने खेतों की सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती होती है।"

''इलाहाबाद में गंगा में पानी छोड़े जाने का हमेशा से ही विरोध हो रहा है, लेकिन कहीं न कहीं ये गंदे पानी का नाला कुछ लोगों के काम आ रहा है और किसानों ने इसे अपनी एक जरूरी काम का जरिया बना लिया है।" महेश आगे बताते हैं।

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