Nalin Chauhan

Nalin Chauhan

Nalin is literature enthusiast working with the gov of Delhi.


  • दिल्ली की देहरी : शायर-शायरी की जुबानी, उर्दू की कहानी

    नलिन चौहानअमीर खुसरो को उर्दू भाषा का प्रथम कवि माना जाता है। पटियाली (अवध) में पैदा हुए खुसरो ने सबसे पहले उर्दू में कविताएं कीं। उर्दू की सबसे पहली गजल अमीर खुसरो की ही है। इस गजल की विशेषता यह है कि इसकी एक पंक्ति फारसी की है तो दूसरी उर्दू की।जहाल मस्कीं मकुन तगाफुल दुराय,नैना बनाय...

  • 'दिल्ली की देहरी' : 'नई दिल्ली' की बसने की कहानी 

    किसी भी भारतीय को यह बात जानकर हैरानी होगी कि आज की नई दिल्ली, किसी परंपरा के अनुसार अथवा स्वतंत्र भारत के राजनीतिक नेताओं की वजह से नहीं बल्कि एक सौ साल (वर्ष १९११) पहले आयोजित तीसरे दिल्ली दरबार में अंग्रेज़ सम्राट जार्ज पंचम की घोषणा के कारण देश की राजधानी बनी। इस दिल्ली दरबार की सर्वाधिक...

  • सुभाष चंद्र बोस  पर विशेष : आज़ाद हिन्द फौज का दिल्ली मुक़दमा 

    सुभाष चंद्र बोस के जन्मदिन पर विशेष: अंग्रेज वायसराय वावेल हमेशा आज़ाद हिंद फौज को 'एक डरपोक और कमजोर व्यक्तियों के समूह' बताता था।दूसरे विश्व युद्व के दौरान अंग्रेज थलसेना की 14 वीं टुकड़ी ने वर्ष 1943 में बर्मा को जापानी सेना से दोबारा जीत लिया। इस जीत के साथ सेना के साथ गए युद्ध संवाददाताओं के...

  • दिवाली और साहित्य: कविता, शेर और कहानियां में जगमग रही है दिवाली

    किसी भी देश की सांस्कृतिक विरासत उसकी अपनी भाषा में प्रकट होता है। यही कारण है कि हिंदी समाज का समृद्व देशज वैभव हिंदी में परिलक्षित होता है। उर्दू में नज्म लिखने वाले पहले कवि माने जाने वाले नजीर अकबराबादी ने अपनी 'दीवाली' शीर्षक कविता में प्रकाश के इस त्यौहार और जनसामान्य के संबंध को कुछ इस तरह...

  • दिल्ली की देहरी : कपूर खानदान का दिल्ली से नाता

    देश में संविधान के लागू होने के बाद जब दिल्ली के संसद भवन से दो सदनीय संसदीय प्रणाली लागू हुई तो वर्ष 1952 में रंगमंच-सिने अभिनेता पृथ्वीराज कपूर सहित शिक्षाविद डॉ. जाकिर हुसैन, वैज्ञानिक डॉ. सत्येंद नाथ बोस, कवि मैथिलीशरण गुप्त को पहली बार राज्यसभा के लिए मनोनीत किया गया।पृथ्वीराज कपूर उच्च सदन के...

  • दिल्ली की देहरी: दिल्ली से अटल का साहित्यिक नाता

    यह बात कम लोग जानते हैं कि हिन्दी के सुप्रसिद्व कवि डॉ. शिवमंगल सिंह सुमन कभी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के अध्यापक रहे थे। सन् 1999 की जनवरी में शिवमंगल सिंह को पद्मभूषण से सम्मानित किया गया। परम्परा के अनुसार सम्मान समारोह राष्ट्रपति भवन के अशोक हाल में आयोजित था। अलंकृत किए जाने वाले...

  • दिल्ली की देहरी: जब पहली बार दिल्ली में गूंजी थी रेल की सीटी

    अंतिम मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर (1837-1857) दिल्ली में रेल शुरू किए जाने की संभावना से ही बेहद परेशान थे। उन्हें परिवहन के इस नए अविष्कार से शहर की शांति के भंग होने की आशंका थी। यही कारण था कि जफर ने दिल्ली के दक्षिण-पूर्व हिस्से से वाया रिज पर बनी छावनी से उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर रेल लाइन बिछाने...

  • दिल्ली की देहरी : गुड़गांव से गुरूग्राम की ऐतिहासिक यात्रा  

    आज राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में दिल्ली और गुड़गांव भौगोलिक निकटता के कारण एक दूसरे के सहोदर शहर कहे जा सकते हैं। जबकि गाजियाबाद और फरीदाबाद के भी इस क्षेत्र में होने के कारण यह जुड़ाव नहीं है। दोनों शहरों के संबंधों के इस सूत्र की कहानी इतिहास में छिपी है। दुनिया भर की आई टी कंपनियों में साइबर सिटी...

  • दिल्ली की देहरी में पढ़िए कैसी थी रस्किन बॉन्ड की दिल्ली

    प्रसिद्ध अंग्रेजी लेखक रस्किन बॉन्ड ने अपने लिखे गद्य साहित्य में आजादी से पहले अंग्रेजों की नई दिल्ली, पुरानी दिल्ली और भारत विभाजन के बाद पाकिस्तान से उजड़कर आए हिन्दू-सिख शरणार्थी आबादी से बसी बाहरी दिल्ली के इलाके सहित तत्कालीन जनजीवन और समाज का प्रमाणिक वर्णन किया है।रस्किन तब की नई दिल्ली के...

  • दिल्ली की देहरी : दिल्ली में बिजली आने की कहानी  

    देश में सबसे पहला बिजली उत्पादन कलकत्ता इलेक्ट्रिक सप्लाई कॉरपोरेशन ने 1899 में शुरु किया था जबकि 20 वीं शताब्दी की शुरूआत में दिल्ली में बिजली पहुंची और राजनीतिक कारणों से शहर का महत्व बढ़ा।ये भी पढ़ें- दिल्ली की देहरी : जब दिल्ली वालों ने अपनाया, पाइप वाला पानी नारायणी गुप्ता की पुस्तक 'दिल्ली...

  • दिल्ली में हिंदुओं की उच्च शिक्षा का पहला केंद्र: हिंदू कॉलेज  

    दिल्ली के हिंदुओं में 1860 के दशक के बीच में लगातार अकाल पड़ने के कारण ईसाई मिशनरियों की मतांतरण गतिविधियों के बढ़ने की गंभीर चिंता थी। खासकर मिशनरियों के गरीब परिवारों को भौतिक सहायता के बदले में मंतातरण करवाए जाने की आशंका थी। जबकि एक असली डर यह था कि मिशनरी संचालित शैक्षिक संस्थानों का मंतातरण के...

  • दिल्ली की देहरी : जब दिल्ली वालों ने अपनाया, पाइप वाला पानी 

    जब अंग्रेज सरकार ने पहली बार पाइप से आबादी वाले इलाकों में पानी को पहुंचाने की योजना बनाई तो उनके दिल में खटका था। सरकार इस बात को लेकर दुविधा में थी कि क्या यमुना के जल को शुद्व मानने वाले हिंदू, लोहे के पाइप में आने वाले पानी को सहजता से स्वीकार करेंगे। दूसरा, क्या वे इस पानी का मोल चुकाने के लिए...

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