घर के सारे शीशे हटा दिए थे ताकि चेहरा न देख पाऊं: लक्ष्मी 

Neetu SinghNeetu Singh   2 Oct 2016 12:16 PM GMT

घर के सारे शीशे हटा दिए थे ताकि चेहरा न देख पाऊं: लक्ष्मी लक्ष्मी (एसिड अटैक पीड़िता)

लखनऊ। “घर में लगे सारे शीशे और वो सभी चीजें हटा दी गईं जिसमें हम अपना चेहरा देख सकें। सर्जरी के ढाई महीने बाद मैं अपने चेहरे को देखने के लिए बहुत उत्साहित थी पर अफ़सोस घर के किसी कोने पर कोई शीशा नहीं था। एक दिन पापा के साथ उनके किसी मित्र के घर गये, तब पहली बार शीशा में चेहरा देखा। यकीन ही नहीं हो रहा था कि ये मै हूँ, पैरों तले जमीन खिसक गई।” देश भर में एसिड अटैक पीड़िताओं का हौसला बढ़ाने का अभियान चलाने वाली लक्ष्मी ने बताया। लक्ष्मी खुद भी एसिड अटैक पीड़िता हैं।

बचपन से ही सिंगर बनने का शौक रखने वाली लक्ष्मी का सपना 21 अप्रैल 2005 को टूट गया

लक्ष्मी ने बताया, “15 साल की उम्र में मुझे दोगुनी उम्र के एक लड़के ने शादी के लिए प्रपोज किया। मैंने मना कर दिया तो उस लड़के ने अपने छोटे भाई की गर्लफ्रेंड के साथ मिलकर मेरे चेहरे पर तेज़ाब डाल दिया”।

लक्ष्मी शीरोज़ कैफे में मिल में तमाम महिलाओं को अपने बारे में खुश होकर बताती हैं कि वर्ष 2005 में जब मेरे ऊपर तेज़ाब डाला गया, तब मुझे लगता था कि मै पहली लड़की हूं जिसके साथ ये हादसा हुआ है।

शीरोज़ कैफे में आयोजित समारोह में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागी।

लक्ष्मी ने बताया, “जैसे-जैसे मै बाहर निकली, मैंने अपने जैसी तमाम लडकियों को इस हादसे का शिकार पाया, तब मुझमे हिम्मत आयी कि मैं अकेली इस लड़ाई में नहीं हूं।”

इस एसिड अटैक में मै 45 प्रतिशत जल गई थी। कई वर्षों तक चेहरा खोलकर घर से बाहर नहीं निकली। मेरे बहुत रिश्तेदार, समाज के तमाम लोग ताने देते थे और कहते थे ऐसों के साथ ऐसा ही होता है। सोसायटी के लोग मुझे बेचारी कहने लगे थे। सभी लोगों ने हमारी फैमली से रिश्ते समाप्त कर दिए। मेरे मम्मी-पापा ने मुझे आगे बढ़ने में बहुत सपोर्ट किया।
लक्ष्मी, एसिड अटैक पीड़िता

लक्ष्मी ने बताया कि वर्ष 2012 में मेरा भाई बीमार हो गया, डॉक्टर बोले कि अब ये नहीं बचेगा ये सुनकर हमारे पापा को अटैक आया और वो इस दुनिया से चले गये। घर का खर्च चलाना अब मुश्किल था। भाई का इलाज भी चल रहा था। मैं कई संस्थानों में गई, कई जगह इंटरव्यू दिए, महीनों नौकरी तलाशी पर मेरी सूरत देखकर मुझे किसी ने भी नौकरी नहीं दी। लक्ष्मी उत्साहित होकर बताती हैं कि वर्ष 2014 में मै कुछ ऐसे लोगों से मिली जो जिन्दगी में कभी देख नहीं सकते हैं, मुझ जैसी तमाम लड़कियां मिली। तब मुझे लगा कि मै अकेली नहीं हूं, मुझे हारना नहीं है और इस लड़ाई को आगे बढ़ाना है।

लक्ष्मी का कहना है सिरोज इंडिया की पहली ऐसी संस्था है जो एसिड अटैक महिलाओं के लिए काम करती है| कानपुर की रेशमा, मेरठ की नाजमा, फतेहपुर की गरिमा और प्रीती सभी एसिड अटैक की शिकार हैं, जिन्दगी से हार गयी थी पर आज सिरोज कैफे को अपने दम पर चला रही हैं।

जब लक्ष्मी से एक महिला ने पूंछा जिस लड़के ने और लड़की ने तुम्हारे ऊपर एसिड डाला उन्हें क्या सजा मिली, इस बात के जबाब में लक्ष्मी ने कहा कि लड़के को 10 साल और लड़की को सात साल की सजा दी गयी है। लक्ष्मी कहती हैं कि मै विक्टिम नहीं हूं कि मुझे डर लगेगा। आज मै फाइटर बन गयी हूँ और मुँह तोड़ जबाब देने में सक्षम हूँ। इस भेट वार्ता में लक्ष्मी ने एक बहुत ही खूबसूरत गीत गाया।

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