मिलिये अवध की शान अंजलि सिंह से जिन्होंने सैकड़ों महिलाआें की ज़िंदगी बदल दी

Mohit AsthanaMohit Asthana   2 Jun 2017 8:56 AM GMT

मिलिये अवध की शान अंजलि सिंह से जिन्होंने सैकड़ों महिलाआें की ज़िंदगी बदल दीराज्यपाल राम नाइक द्वारा अवार्ड प्राप्त करती अंजलि सिंह।

लखनऊ। लखनऊ की एक ऐसी महिला जिन्होने कुछ ऐसा कर दिखाया जो शायद पुरूषों के लिये भी मुश्किल साबित हो। हम बात कर रहे है अंजली सिंह की। हाल ही में अंजलि को महिला उद्यमी की श्रेणी में सफलता हासिल करने के लिये राज्यपाल राम नाइक द्वारा फिक्की फ्लो अवॉर्ड से नवाजा गया है।

अंजली ने अपने मुकाम को हासिल करने के लिये नौकरी भी छोड़ दी और शुरू कर दिया जूट का बिजनेस। इस बिजनेस के जरिये अंजली ने खुद तो अपनी पहचान बनाई ही साथ उन महिलाओं को जिनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी उनको भी अपने बिजनेस से जोड़ा और रोजगार का जरिया दिया। उनकी ये पहल लोगों के लिये एक मिसाल साबित हो रही है।

अंजलि सिंह

गांव कनेक्शन से हुई बातचीत के दौरान जब उनसे पूछा गया जूट के ही बिजनेस का ख्याल क्यों आया तो उन्होने बताया नेशनल जूट बोर्ड मिनिस्ट्री आफ टेक्सटाइल की तरफ से एक प्रोजेक्ट चल रहा था जिसके तहत करीब ढाई हजार महिलाओं को वहां ट्रेनिंग दी जा रही थी। जब मैने देखा कि इतनी संख्या में महिलाएं ट्रेनिंग कर रही है तो मेरे दिमाग में इस बिजनेस को करने का विचार आया क्योकि मुझे यहीं से महिलाएं भी मिल रहीं थी।

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उन महिलाओं की आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं थी कि वो खुद से बिजनेस शुरू कर पायें इसलिये मैने इस बिजनेस को शुरू करके उन महिलाओं को रोजगार देने का निर्णय लिया। अच्छी बात ये रही उन दिनों पाँलीथीन बैन हो चुकी थी इसलिये इस बिजनेस में फायदा भी नजर आया। हालाकि शुरूवात में महिलाओं को बिजनेस में जोड़ने के लिये काफी समझाना पड़ा क्योंकि उनके घर का माहौल ऐसा नहीं था उनको नौकरी के लिये घर से बाहर भेजे लेकिन मेहनत रंग लाई और जूट आर्टीजन्स गिल्ड एसोसियेशन संस्था के नाम से जूट का बिजनेस शुरू कर दिया। इस समय मेरे साथ दो सौ महिलाएं काम कर रही है।

वर्कशॉप के काम करती महिलाएं ।

बातचीत जारी रखते हुए अंजली ने अपने बिजनेस की शुरूवात के दिनों की बात साझा करते हुए बताया बिजनेस की शुरूआत में सबसे बड़ा चैलेंज था कच्चा माल मंगाना क्योंकि फैमली में भी पहले किसी ने बिजनेस किया नहीं था और फाइनेंशियली कन्डीशन बहूत मजबूत भी नहीं थी। उस दौरान हमने छोटे छोटे डीलरों को पकड़ा जो कानपुर और दिल्ली में थे उन्होने हमें कच्चा माल उपलब्ध कराया इसके अलावा उन महिलाओं को सैलरी भी देनी होती थी इस कारण थोड़ा मुश्किल तो होती थी।

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इसका एक कारण ये भी था माल डिलीवरी के करीब तीन से चार महीने बाद में हमें पेमेंट मिल पाता था। बातचीत के दौरान अंजली ने बाताया धीरे धीरे जब हमारा बिजनेस बढने लगा तब हमने बैंक से लोन के लिये अप्लाई किया बैंक ने जब सर्वे किया इतनी महिलाओं को काम करते हुए देखा तो वो भी आश्वस्त हुए इस तरह से हमें बैक से लोन मिल गया।

जूट आर्टीजन्स गिल्ड एसोसियेशन संस्था द्वारा बनाये गए बैग।

माल की डिलीवरी के बारे में अंजली बताती है कि केवल सरकारी आर्डर पर ही माल तैयार करती है और बेचती है आज अंजली का जूट के बैग, शॉपिंग बैग, डेलीगेट किट बनाने का बिजनेस बड़ा मुकाम हासिल कर चुका है और अब वो कच्चा माल सीधे जूट मिल कलकत्ता से ही उठाती है। अपने बिजनेस में प्रोफिट के बारे में अंजली बताती है सारे खर्चे निकालकर तकरीबन सात से आठ प्रतिशत की बचत हो जाती है क्योंकि अपने माल को हम ज्यादा मंहगे दाम में नहीं बेच सकते है अगर मंहगें दाम में बेचेंगे तो कोई लेगा नहीं। आज ज्यादा से ज्यादा लोग मुझसे जुड़ रहे है तो कीमत और क्वालिटी पर विशेष ध्यान रखना पड़ता है।

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भविष्य के बारे में अंजली बताती है इसी बिजनेस को आगे बढाना है और जरूरत मंदो को ट्रेनिंग देना है। ट्रेनिंग के बाद अगर वो चाहे तो हमारे यहां काम कर सकते है या खुद का बिजनेस करना चाहे तो कच्चा माल हमसे ले सकते है कलकत्ता के रेट में इसमें मुझे कोई प्राफिट नहीं चाहिये।

जूट से निर्मित बैग देखती महिला ।

कुछ अवार्ड भी किये अपने नाम

  • 8 मार्च को ही इस्टर्न मसाला कंपनी की तरफ से भी बेस्ट विमेन आंत्रेप्रेन्योर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया, साथ ही मई 2017 में HT मीडिया द्वारा अवॉर्ड के लिए नोमिनेट भी किया जा चुका है।
  • 8 मार्च 2017 को लखनऊ मैनेजमेंट एसोशिएशन ने बेस्ट वुमन आंत्रेप्रन्योर अवॉर्ड से सम्मानित किया।
  • अंजली को 29 अप्रैल 2017 को गवर्नर राम नाइक ने आउटस्टैंडिंग वुमन आंत्रेप्रेन्योर के लिए फिक्की फ्लो अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।

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