कॉर्पोरेट जगत की नौकरी छोड़ बनी फुल टाइम किसान

Deepak AcharyaDeepak Acharya   7 Nov 2016 1:34 PM GMT

कॉर्पोरेट जगत की नौकरी छोड़ बनी फुल टाइम किसानअंकिता कुमावत

गाँव शहरों में तब्दील हुए जा रहे हैं और विकास की इस अंधाधुंध प्रक्रिया में हम जिस क्षेत्र में पिछड़ने लगे हैं वो है खेती किसानी। वहीं, कॉर्पोरेट जगत की ऐश और आराम वाली नौकरी को छोड़ खेत खलिहान की तरफ चलना किसी साहस से कम नहीं। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट कोलकाता से पढ़ाई के बाद वापस अपने पैतृक गाँव आकर खेती किसानी को अपना मूल व्यवसाय बनाने, इसे व्यवस्थित तौर-तरीके और आधुनिक विज्ञान की मदद से संचालित करने का बीड़ा उठाया है अजमेर की अंकिता कुमावत ने। अंकिता ने “मातृत्व डेरी एंड ऑर्गनिक फूड” के माध्यम से डेरी और ऑर्गनिक खेती को नए अंज़ाम तक पहुंचाने का जिम्मा उठाया है। खेती किसानी में नई मिसाल पेश करने वाली इस प्रगतिशील किसान युवती से बात की डॉ दीपक आचार्य ने..

1. प्रश्न: व्यवसायी बनकर कैसा लगता है?

उत्तर: बहुत अच्छा लगता है, पहले किसी की नौकरी करते थे आैर अब दूसरों को नौकरी दे रहे हैं। लेकिन ये सफर फूलों की सेज सा नहीं था, यहां रास्तों में कांटे ज्यादा थे। कमाई के नाम पर ज्यादा कुछ नहीं होता था। कई बार, कई महीनों तक खुद के जेब से रकम निकालकर व्यवसाय करना होता हैI ऐसा कहा जाता है कि एक सफल व्यवसायी बनने के लिए कम से कम 1000 दिनों का कठोर परिश्रम आवश्यक है। मैंने इस कठोर समय का आधे से ज्यादा हिस्सा संघर्ष के साथ हंसते हुए निकाल दिया है, सफलता तो आनी ही आनी है।

2. प्रश्न: पिछले कुछ वर्षों में मातृत्व डेरी की सफलता से जुड़ी कोई जानकारी देना चाहेंगी?

उत्तर: पहले हम सिर्फ डेयरी से जुड़ा व्यवसाय कर रह थे और तब हम सिर्फ अपने काउंटर से ही बिक्री करते थे। जब से मैं इससे जुड़ी, हमने लोगों को उनके घरों तक होम डिलीवरी के जरिये डेरी उत्पादों को पहुंचाना शुरु किया। साथ ही ओर्गेनिक फार्मिंग से प्राप्त फसलोत्पादों जैसे सब्जियां, अनाज, आटा, शहद, मसाले आदि को भी घर पहुंच सुविधा के साथ बेचने लगे हैं।

3. प्रश्न: आपकी प्राथमिक और औपचारिक शिक्षा कहां हुई?

उत्तर: सेंट मैरी कॉन्वेंट अजमेर से मेरी स्कूली शिक्षा पूरी हुई है और बाद में इंटरनेशनल कॉलेज फॉर गर्ल्स (जयपुर) से मैंने आर्टस (ऑनर्स) में ग्रेजुएशन किया और फिर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, कोलकाता से एक्ज़ीक्यूटिव पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम इन मैनेजमेंट का कोर्स किया।

4. प्रश्न: क्या आप पहली पीढ़ी की व्यवसायी हैं?

उत्तर: जी हां।

5. प्रश्न: “मातृत्व डेरी एंड ऑर्गनिक फूड” के संपादन की बात हो या इसकी सफलता और कारोबार की, 10 में से कितने अंक देंगी आप इसे?

कारपोरेट की नौकरी छोड़ कर बनीं किसान

उत्तर: यदि आप हमारे उद्यम के वर्तमान कुल कारोबार को मेरे लहज़े से समझना चाहें तो इसे मैं 10 में 6 अंक दूंगी और जहां तक इसकी सफलता और संचालन की बात हो, 10 में से 8 अंक देना चाहूंगी। मैं मानती हूं कि कारोबार के मामले में हम संभल रहे हैं लेकिन जिस तरह इस उद्यम को संचालित किया जा रहा है, इसकी सफलता तय है। जिन लोगों को हम अपने उत्पाद दे रहें हैं उन्हें यह बताना कि हम कैसे दूसरों से अलग हैं, सबसे ज्यादा मेहनत का काम है। ग्राहकों के लिए हमारी डेयरी का दूध आम दूध विक्रेताओं की तरह ही समझ पड़ता है। उन्हें इस बात से कतई फर्क नहीं पड़ता कि गायें सड़कों पर घूम फिर रहीं, पॉलीथीन खा रहीं या कचरे- कूड़े चबा जा रही। कई ग्राहकों को दूध के स्वाद से भी लेना देना नहीं होता, उनके लिए ये सिर्फ एक सफेद द्रव है। कई लोग तो गाय और भैंस के अंतर को भी नहीं समझ पाते। हमारे समाज और समाज की सोच में दिन प्रतिदिन बदलाव आ रहा है, लोगों के रहन-सहन में भी बदलाव आया है और उनके खर्च करने के तरीकों में भी इज़ाफा हुया, लेकिन जब भी डेयरी और ऑर्गेनिक उत्पादों की बात आती है तो विचार दकियानुसी हो जाते हैं। इन सब के चलते अपने उत्पादों की जानकारी देना, ऑर्गेनिक खेती की समझा और तमाम पहलुओं को संजीदगी से प्रस्तुत करना बेहद चुनौतीपूर्ण है।

6. प्रश्न: आप आईआईएम कोलकाता से पढ़कर निकलीं है, यहां से निकलकर अक्सर लोग सीधे बहुराष्ट्रीय कंपनियों की शरण में चल देते हैं, आप कैसे डेयरी और ऑर्गेनिक खेती के तरफ खुद को मोड़ गईं?

उत्तर: हर लड़की की तरह मुझे भी सफेद कॉलर वाली नौकरी, देश विदेश का भ्रमण और अत्याधुनिक सुविधाओं को भोगने का मन करता था लेकिन अपने पिता की लगन देखकर मुझे महसूस हु्आ कि मुझे उनका साथ देना चाहिए। मेरे पिता शासकीय कर्मचारी रहे हैं, चार्टर्ड सिविल इंजिनियर के पद से वोलंटरी रिटायरमेंट स्कीम के तहत उन्होने नौकरी छोड़ दी और डेयरी को बतौर व्यवसाय चुना और इस डेयरी को फलता फूलता किया। अपने घर की बड़ी बिटिया होने के नाते ये मेरी नैतिक जिम्मेदारी थी, और है, कि मैं अपने पिता की ताकत को दुगुना करूं और इस डेयरी को सफलता के नए पायदान पर लेकर जाऊं।

7. प्रश्न: क्या कभी कॉर्पोरेट नौकरी या मल्टीनेशनल कंपनी मे जॉब या किसी अन्य व्यवसाय के बारे में आपने सोचा था?

उत्तर: मैं अपने पिता के इस उद्यम से 2014 से जुड़ी हूं, इससे पहले मैं एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में ही नौकरी कर रही थी। हिंदुस्तान और हिन्दुस्तान के बाहर छह महीनों तक काम भी किया। मैं शायद अपने वर्तमान व्यवसाय से जुड़ती भी नहीं, लेकिन पिता को मेरी जरूरत थी और मुझे उनकी फिक्र भी, आखिर पिता की ताकत बनना कौन बेटी न चाहेगी?

8. प्रश्न: अंकिता, आप “मातृत्व डेरी एंड ऑर्गनिक फूड” की सह-संचालिका हैं, इस उपक्रम की शुरुआत कब हुई थी?

उत्तर: नब्बे के शुरुआती दशक में मैं लंबे समय तक बीमार रही थी और मुझे डॉक्टर्स ने गाय का दूध पीने की सलाह दी थी। मेरे पिता ने एक गाय खरीदी और इसी के साथ हमारी डेयरी की नींव भी तैयार हो गई। साल दर साल गायों की संख्या बढ़ती गई और अब हमारे अजमेर स्थित फार्म पर करीब 50 गाएं और भैंस हैं। करीब दो साल पहले ही मैंने इस डेयरी और खेती के व्यवसाय में खुद को झोंक दिया है।

9. प्रश्न: आपके इस उद्यम का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?

उत्तर: बाज़ार में मिलावट से भरपूर दूध और खाद्य पदार्थों की भरमार है। ऐसे में सभी उपभोक्ताओं को सचेत तो रहना ही होगा लेकिन जो व्यवसायी हैं उन्हें मुनाफे की फिक्र किए बगैर ये तय करना होगा कि समाज के हर वर्ग के लोगों को शुद्ध उत्पाद मिले। हमारा उद्देश्य है हम शुद्ध व रसायनमुक्त दूध सही कीमत पर लोगों को दें।

10. प्रश्न: आप तमाम बंधनों और मिथक को तोड़कर खेती और डेरी व्यवसाय में कूद गईं हैं, दूसरी लड़कियों के लिए कुछ खास बात कहना चाहेंगी?

उत्तर: ऐसा कोई काम नहीं है जो सिर्फ पुरुष ही कर सकते हैं, महिलाएं नहीं। ये बात गौर करनी चाहिए कि हम उस समाज में रह रहें हैं जहां महिलाएं ओलंपिक मेडल जीतकर आ रहीं हैं और पुरुष सौंदर्य प्रतियोगिताओं में भाग ले रहे और जीतकर भी आ रहे। हमें खुद पर भरोसा करते हुए सफलताओं की सीढ़ियों पर चढ़ना होगा।

11. प्रश्न: आपकी सफलता की दौड़ में आपके परिवार ने क्या भूमिका निभाई, समाज और आस-पड़ोस के लोगों की क्या प्रतिक्रिया थी जब आप इस व्यवसाय से जुड़ीं?

उत्तर: मेरे माता-पिता मेरे आदर्श हैं और इस व्यवसाय में आने की वजहें भी वही थे। दूसरों के लिए जरूर ये चौंकाने वाली बात थी कि कॉर्पोरेट जगत की नौकरी छोड़कर मैं एक ऐसे व्यवसाय को अपनाने जा रही थी जिसके बारे में मुझे कोई खासी जानकारी नहीं थी और इस तरह के व्यवसाय को पढ़े लिखे लोगों के लिए सही नहीं माना जाता रहा है। दुर्भाग्य की बात है कि अब किसान खुद गाँव छोड़कर शहरों में बसने लगें हैं, नौकरियां खोज रहे हैं और मेरे मामले में ये पूरी तरह उलट था। मैं नौकरी छोड़कर खेती करने चल पड़ी, समाज के बुजुर्ग इस बात को समझ नहीं पा रहे थे।

12. प्रश्न: ऑर्गेनिक फूड के बारे में आपके और आपके ग्राहकों के क्या विचार होते हैं?

उत्तर: बहुत से लोगों को यह महंगा लगता है और उत्पादन को लेकर भी लोग काफी शंका जताते हैं, क्योंकि उन्हें नहीं पता होता कि वाकई कोई उत्पाद ऑर्गेनिक है या नहीं। बंद पैकेट में रखे उत्पाद को आखिर ग्राहक ऑर्गेनिक माने भी तो कैसे? रही बात ऑर्गेनिक सर्टिफाइड प्रोड्क्ट्स की, तो भी लोग सवाल करने से चूकते कहां हैं? धीमे धीमें हम लोगों को समझाने का प्रयास कर रहे हैं और लोग समझने की कोशिशें भी करने लगे हैं। सच कहूं तो मेरे लिए ये जवाब देना आसान नहीं क्योंकि हम खुद संघर्षरत हैं, कई समस्याओं को हम अपने स्तर पर ही सुलझा देते हैं और कुछ जवाब देने में हम भी खुद को सक्षम नहीं पाते। इस तरह की चुनौतियां सिर्फ हमारे लिए नहीं हैं अपितु ऑर्गनिक खेती को अंजाम दे रहे हर किसान के साथ कुछ चुनौतियां लगातार बनी पड़ी हैं। हम इतने बड़े भी संस्थान नहीं हैं कि हमारे खेतों और डेयरी से तैयार होने वाले उत्पादों का परिक्षण करवाकर साबित करें कि ये सब रसायनमुक्त हैं।

कई बाहरी एजेंसियां ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन का काम करती हैं लेकिन ये जरूरी नहीं कि हर वो फार्म जो ऑर्गेनिक है या सर्टिफाई हो चुका है, सर्टिफिकेशन के बाद भी ऑर्गेनिक रहे। कई तरह के कीट, जीव जंतु और फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले संक्रामक सूक्ष्मजीवों से बचने के लिए रसायनों का छिड़काव करना कई बार मजबूरी भी बन जाती है। इन रसायनों का अत्यधिक उपयोग ना सिर्फ भूमि बल्कि मानव स्वास्थ्य पर भी पड़ता है इसीलिए मेरा मानना है कि हमें GAP यानी गुड एग्रीकल्चर प्रेक्टिसेस को अपनाना चाहिए जिसमें रसायनों का इस्तमाल कम से कम हो ताकि इनसे किसी को भी नुकसान न हो। अपनी भूमि की उर्वरकता और पोषक तत्वों की उपलब्धता को बेहतर बनाए रखने के लिए ये बेहद जरूरी है।

13. प्रश्न: इस क्षेत्र में व्यवसाय का क्या भविष्य है?

उत्तर: इस क्षेत्र में संभावनाओं की भरमार हैं। लोग भोजन करना नहीं छोड़ सकते, ये जीवनयापन के लिए सबसे अहम है। अब तो बड़ी-बड़ी इंडस्ट्रीज खेती और सौर ऊर्जा से जुड़े व्यवसायों की तरफ कूच कर चुकी हैं। इन दोनो व्यवसायों के लिए कारोबार और मुनाफे की संभावनाओं की कमी नहीं है। इन व्यवसायों में मुझे भारतीय युवाओं और युवतियों के लिए उज्जवल भविष्य दिखता है। वर्तमान दौर खेती और खेती से जुड़े व्यवसायों से जुड़ने के लिए सबसे उत्तम है।

14. प्रश्न: पांच साल बाद मातृत्व डेयरी एंड ऑर्गेनिक फूड को आप किस मुकाम पर देखती हैं?

उत्तर: मैं अपने उद्यम के लिए ईश्वर से ज्यादा कुछ नहीं मांगती लेकिन मेरे ख्वाहिश है कि मातृत्व एक बड़ा ब्रांड बने। अजमेर और आस-पास के लोग इसे शुद्धता और क्वालिटी के लिए पहचानेंI अब तक के सफर की तकलीफों से मैं रूबरू हूं इसलिए सिर्फ इतना ही हो जाए तो मुझे बेहद प्रसन्नता होगी। छोटी जगहों पर लोगों को शुद्धता और ऑर्गेनिक उत्पाद के नाम पर ग्राहक बनाना आसान नहीं है।

(लेखक गाँव कनेक्शन के कन्सल्टिंग एडिटर हैं।)

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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