खूबसूरती बढ़ाने का दावा करने वाले ये उत्पाद कहीं छीन न लें आपकी रंगत

Shrinkhala PandeyShrinkhala Pandey   28 Dec 2017 6:15 PM GMT

खूबसूरती बढ़ाने का दावा करने वाले ये उत्पाद कहीं छीन न लें आपकी रंगतखतरनाक है ज्यादा  कास्मेटिक का इस्तेमाल। 

हर महिला खूबसूरत दिखना चाहती है। ऐसे में वो कई बार तरह-तरह के विज्ञापन देखकर व बाजार से ब्यूटी प्रोडेक्ट खरीदकर इस्तेमाल करती हैं। लेकिन इन कास्मेटिक उत्पादों में कितनी मिलावट है और ये हमारी त्वचा पर कितना बुरा असर डाल सकती है, इसकी जानकारी सबको नहीं होती है।

लखनऊ के इंदिरानगर की रहने वाली ज्योति शुक्ला (22वर्ष) बताती हैं, “लगातार काजल लगाने के कारण आंखों में अजीब से खुजली होने लगी, आंख से पानी भी आने लगा। मैनें जब डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने मुझे कुछ समय तक काजल बिल्कुल भी न लगाने की सलाह दी।”

ऐसे कई तरह के केस आते हैं जिनमें लगातार कोई ब्यूटी प्रोडेक्ट इस्तेमाल करना आपपर भारी पड़ सकता है। लिपस्टिक में हार्ड मेटल जैसे- लेड, आर्सेनिक, कोबाल्ट, निकेल और क्रोमियम शामिल पाया गया। लखनऊ के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ नीरज पाण्डेय बताते हैं, “बाजार में तरह तरह के ब्यूटी प्रोडेक्ट आते हैं जिनका इस्तेमाल पहले महिलाएं और अब तो पुरूष भी बहुत ज्यादा करते हैं। इसमें जो कैमिकल मिलाए जाते हैं, उनके लिए मानक निर्धारित होते हैं लेकिन कंपनियां खासकर जो लोकल उत्पाद बनाती हैं कोई भी मानक नहीं मानती।”

डॉ पाण्डेय आगे बताते हैं, “कभी बहुत सारे मरीज आते हैं जिनके कहीं दाग हो रहा है, कभी होंठ सफेद हो गए हैं, या काले पड़ गए हैं, चेहरे पर बड़े बड़े दाने या चकत्ते निकल आए हैं तो ये सब कई बार इन रसायनों के इस्तेमाल से भी होता है।” वो आगे कहते हैं कि जैसे हम उदाहरण के लिए अगर काजल लें तो काजल में मौजूद रसायन की मात्रा जब आंखों तक पंहुचती है तो इंफेक्टिव कन्‍जेक्विाइटिस, ग्‍लूकोमा, ड्राई आई और कन्‍जेक्टिवाइटल डिसकोलोरेशन आदि बीमारियां हो सकती हैं।

फॉर्मास्युटिकल साईंसेज एंड रिसर्च यूनिवर्सिटी, दिल्ली ने कॉस्मेटिक प्रोडेक्ट के 16 सैंपल्स की जांच की रिपोर्ट के मुताबिक इनमें नामी ब्रैंड के कॉस्मेटिक भी शामिल हैं। रिपोर्ट में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है नामी ब्रैंड के शैंपू और हेयर डाई में भी प्रतिबंधिक घातक केमिकल पाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक मिलावटी कॉस्मेटिक ब्रैंड सस्ते और लोकल यानि स्थानीय हैं। लेकिन नामी ब्रैंड के प्रोडेक्ट भी इस मिलावट से अछूते नहीं हैं।

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सीएसई की एक रिपोर्ट के अनुसार बहुत सारी बड़ी कंपनियों के कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स में हैवी मेटल जैसे अर्सेनिक, कैडमियम, लेड, मरकरी, निकेल आदि पाए गए हैं। ये वो मेटल हैं, जो शरीर से लंबे समय तक टच में रहें, तो कैंसर और त्वचा संबंधी अन्य समस्याओं को बढ़ा सकते हैं।

इस रिपोर्ट पर सीएसई की प्रमुख सुनीता नारायण का कहना था कि ब्यूटी प्रोडक्ट में खतरनाक रसायनों के इस्तेमाल को रोकने के लिए देश में कोई सख्त कानून नहीं है। मरकरी का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित है, इसे तुरंत बंद किया जाना चाहिए।

दिल्ली की रहने वाली आराधना मिश्रा (27 वर्ष) बताती हैं, “मैं एक प्राइवेट कंपनी में बतौर काम करती हूं और मुझे हमेशा तैयार होकर रहना पड़ता था जिसके लिए बहुत मेकअप भी करती थी लेकिन इसका मेरी त्वचा पर उल्टा असर पड़ने लगा।” वो आगे बताती हैं, “ लिपिस्टिक से मेरे होंठ अजीब खुरदुरे से हो गए और काले धब्बे भी पड़ गए। डॉक्टर से इलाज के बाद सही हुआ। उसके बाद से मैं सावधानी बरतती हूं। ”

इन ब्यूटी उत्पादों में होती है ये मिलावटें

लिपस्टिक

लिपस्टिक का ज्यादा इस्तेमाल करने से होंठों का स्वाभाविक रंग खत्म हो जाता है। यहां तक कि होंठ काले भी पड़ जाते हैं। इसमें इओसिन नामक रंग लैनोनिन रसायन के साथ बनाया जाता है।

आंखों के ब्यूटी प्रोडेक्ट

आंखों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले प्रसाधनों में आई पेंसिल, आई लाइनर, आई शैडो, मस्कारा, काजल, सुरमा न केवल आंखों में खारिश पैदा करते हैं, बल्कि आंखों को नुकसान भी पहुंचाते हैं। क्योंकि इनमें सीसा, कोलतार के रंग जैसे हानिकारक तत्व मिले होते हैं। मस्कारा के नियमित प्रयोग से आंखों के आस-पास की त्वचा में जलन होने लगती है। आई लाइनर से आंखों की झिल्ली के खराब होने का खतरा होता है।

आंखों पर भी पड़ता है बुरा असर।

हेयर शैम्पू

साबुन आधारित शैम्पू में पानी के खनिज के कारण बाल कड़क, रूखे और भूरे हो जाते हैं। इनके लगाने से बालों को पोषण, मजबूती और सुरक्षा प्रदान नहीं होती। इसमें सेल्टोल्स और डाइ-आक्सीजन जैसी जहरीली अशुद्धियां होती हैं, जिनसे एलर्जी हो सकती है। ये शैम्पू आंखों में जलन, बालों के झड़ने जैसी बीमारियां भी पैदा कर सकते हैं।

फेस क्रीम

चेहरे पर लगाई जाने वाली क्रीम यदि वसा अथवा तेल आदि सामानों से बनाई जाए, तब तो ठीक है, नहीं तो क्रीमों में या तो नमी सोख लेने वाले तत्व होते हैं अथवा उनमें ऐसे तत्वों की मिलावट होती है, जो त्वचा के रोमकूपों को बंद कर देते हैं, जिससे शरीर से पसीना, अन्य जहरीले तत्वों का बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है।

बिंदी

माथे पर लगाई जाने वाली बिंदी का चिपचिपा पदार्थ त्वचा को प्रभावित करता है और इसके नियमित प्रयोग से उस स्थान पर खुजली और त्वचा रोग भी हो सकते हैं, दानें उभर सकते हैं। कभी-कभी तो सफेद दाग तक पड़ जाते हैं।

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सिंदूर

‘सिंदूर” में साधारणतया लेड आक्साइड रसायन रहता है, जो एक विषैली धातु है। इसे मांग में भरने से सिर की त्वचा निरन्तर अनेक वर्षों तक इसके संपर्क में आती रहती है, जिससे बाल झड़ने, टूटने, छोटे पड़ने तथा जल्दी सफेद होने लगते हैं। त्वचा के छेदों के साथ यह रसायन दिमाग के भीतर पंहुच जाता है जो अनिंद्रा सिरदर्द, चिडचिड़ापन पैदा करता है।

सस्ते व नकली उत्पादों से बचें

आजकल की महंगाई में हर कोई ब्रांडेड व महंगा उत्पाद नहीं खरीद सकता है। ऐसे में महिलाएं भी उसका सस्ता विकल्प ढूंढती हैं लेकिन इन उत्पादों में सबसे ज्यादा मिलावट होती है। इसलिए इनको नियमित इस्तेमाल न करें। इसके अलावा अब बड़ी कंपनियां भी क्रीम या शैंपू के पाउच बनाती है जिससे आप देख सकते हैं कि ये आपको सूट कर रहा है या नहीं।

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