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'बच्चा नहीं हो रहा, जरूर कुछ कमी होगी' इस ताने के पीछे और आगे है एक लंबी कहानी'

डियर मां... जब से खुद मां बनी हूं, तब से आपको और बेहतर तरीके से समझने लगी हूं। आप हमेशा मेरी दोस्त रहीं हैं। लेकिन मां बनने के बाद मैंने जाना कि कितना कुछ था, जो आपने सिर्फ सहा और मुझसे कभी नहीं कहा। अब उसी दौर से गुजरते हुए मैंने सोचा है कि मैं उन सारी बातों के बारे में बात करुंगी, जिनके बारे में एक मां अपने बच्चे को शायद कभी नहीं बताती। ये सीरीज हर उस औरत के नाम एक खुला खत है, जो मां है, मां बनने वाली है या मां बनना चाहती है। पहली किश्त

बच्चा नहीं हो रहा, जरूर कुछ कमी होगी इस ताने के पीछे और आगे है एक लंबी कहानी

डियर मां, गांव कनेक्शन की नई सीरीज है, जिसमें मातृत्व से जुड़े कई पहलुओं पर चर्चा होगी। 

मेरी शादी के एक साल तक घरवालों ने मुझसे मां बनने या परिवार आगे बढ़ाने को लेकर कोई बात नहीं की। इस मामले में मेरे पति भी हमेशा सपोर्टिव रहे और मेरे पूछने के बाद भी उन्होंने यही कहा, जब तुम चाहो, सिर्फ तभी मां बनने का फैसला लेना। मगर जब शादी के कुछ साल तक बच्चा नहीं होता, तो लोगों के दिमाग में सिर्फ एक ही बात आती है कि कुछ कमी होगी। ये कमी पुरुष में भी हो सकती है, लेकिन इस कमी का इशारा सिर्फ महिला की तरफ ही होता है।

मुद्दा ये है कि आज भी कई लोगों को गर्भनिरोधक और फैमिली प्लानिंग के बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्हें लगता है कि बस शादी हुई और बच्चा हो जाना चाहिए। नहीं हुआ है, तो कोई कमी होगी।

खैर शादी के कुछ साल तक हमने फैमिली प्लानिंग की, फिर वो समय भी आया, जब मुझे लगा कि अब मैं मां बनना चाहती हूं और मैंने अपने पति से इस बारे में बात की। इसके बाद शुरू होती है वो कहानी, जहां कई लोगों की जिंदगी एक नये ही रास्ते पर मुड़ जाती है।

कुछ दंपत्ति बच्चे की प्लानिंग करते हैं और उनका माता-पिता बनने का सफर आसानी से शुरू हो जाता है। वहीं कुछ दंपत्तियों को कई कोशिशों के बाद भी ये खुशी मिलने में एक अरसा लग जाता है। और उन्हें सुनने पड़ते हैं इस तरह के ताने, कुछ कमी होगी। इस सीरीज की इस पहली किश्त की शुरुआत इसी बात से कर रही हूं कि गर्भावस्था आखिर होती क्या है और इस तक पहुंचने के लिए किन अहम बातों की जानकारी होना जरूरी है।

कई रिसर्च और तथ्यों से गुजरने के बाद मैंने ये जाना कि गर्भावस्था का पूरा मामला हार्मोन्स के एक ऐसे बायोलॉजिकल डांस पर टिका होता है, जिसकी एक भी बीट आपको मिस नहीं करनी चाहिए। वरना फिर सिर्फ अगले महीने का इंतजार करने के अलावा कोई चारा नहीं रह जाता है। अगला महीना यानी अगला ऑव्युलेशन पीरियड।

गर्भावस्था का अहसास और इसकी पूरी प्रक्रिया से लेकर बच्चे के मां के हाथों में आने तक ये सब कुछ इतना जादुई है कि बहुत कुछ समझकर भी बहुत कुछ छूट जाता है। एक छोटे से तथ्य को ही लीजिए-एक सामान्य लड़की में यूट्रस यानी गर्भाश्य में सिर्फ दस मिलीलीटर यानी दो चम्मच पानी समाने जितनी क्षमता होती है। लेकिन जब गर्भावस्था का समय आता है, तब इसकी क्षमता बढ़कर इतनी ज्यादा हो जाती है कि इसमें लगभग पांच लीटर फ्लूड आ जाता है। गर्भाश्य खुद को इतना ज्यादा फैला लेता है कि इसमें बढ़ते बच्चे के लिए पूरी जगह बनने लगती है।

गर्भाश्य को इस अवस्था तक लाने के लिए यानी एक औरत के मां बनने के लिए दंपत्ति का सिर्फ शारीरिक संबंध बनाना ही काफी नहीं है। ये संबंध महिला का ऑव्युलेशन पीरियड शुरू होने और खत्म होने से पहले बनाना जरूरी होता है। कई लड़कियों को ऑव्युलेशन पीरियड के बारे में भी जानकारी नहीं होती है, इसलिए मां बनने की उनकी इच्छा सही समय के इंतजार में एक गैरजरूरी राह तकती रह जाती है।

कई रिसर्च और तथ्यों से गुजरने के बाद मैंने ये जाना कि गर्भावस्था का पूरा मामला हार्मोन्स के एक ऐसे बायोलॉजिकल डांस पर टिका होता है, जिसकी एक भी बीट आपको मिस नहीं करनी चाहिए। वरना फिर सिर्फ अगले महीने का इंतजार करने के अलावा कोई चारा नहीं रह जाता है। अगला महीना यानी अगला ऑव्युलेशन पीरियड।

खुद मेरी प्रेग्नेंसी को लेकर भी हमने छह महीने तक इस बीट को पकड़ने के लिए राह तकी है। गर्भावस्था की बेसिक साइंस कहती है कि ये सिर्फ एक एग और स्पर्म के मिलने की प्रक्रिया है, लेकिन इसके पीछे शरीर के भीतर बहुत कुछ घटित होता है। इस बारे में ज्यादा बात नहीं की जाती, जो कि की जानी चाहिए ताकि हर दंपत्ति में इसे लेकर जागरुकता हो।

साइंस की भाषा में गर्भावस्था तब शुरू होती है, जब एक फर्टिलाइज एग गर्भाश्य में प्रवेश करता है। इस स्थिति तक पहुंचना कई पड़ावों से जुड़ा है। इसकी शुरुआत बेशक स्पर्म सेल और एग से होती है, लेकिन ये इतना भी आसान नहीं है। स्पर्म एक प्रकार के माइक्रोस्कोपिक सेल होते हैं, जो टेस्टिक्लस में बनते हैं। स्पर्म अन्य फ्लूड्स के साथ मिलकर सीमन तैयार करता है, जो इजेक्यूलेशऩ के दौरान पुरुष जननांग से बाहर निकलता है। जितनी बार इजेक्यूलेशन होता है, उतनी बार लाखों की संख्या में स्पर्म निकलते हैं, लेकिन गर्भावस्था के लिए सिर्फ एक स्पर्म और एग के मिलने की जरूरत होती है।

एग्स ओवरीज में होते हैं और जो हार्मोन्स महिलाओं के मासिक चक्र के लिए जिम्मेदार होते हैं, उनकी वजह से हर महीने कुछ एग मैच्योर हो जाते हैं। जब आपका एग मैच्योर होता है, इसका मतलब है कि वो स्पर्म के साथ फर्टिलाइज होने के लिए तैयार है। इन हार्मोन्स की वजह से आपके गर्भाश्य की बाहरी सतह भी थोड़ी मोटी हो जाती है, जिससे कि आपका शरीर गर्भावस्था के लिए तैयार होता है।

दिल्ली के एम्स में डिपार्टमेंट ऑफ ओब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. निलांचलि सिंह कहती हैं ''कोई भी लड़की जब मां बनने का या प्रेग्नेंट होने का फैसला करती है, तो फैमिली हिस्ट्री और लड़की की मेडिकल हिस्ट्री इत्यादि काफी मायने रखती है। इसमें माहवारी का नियमित होना भी अहम भूमिका निभाता है। इसी से ऑव्युलेशन पीरियड की अवधि बढ़ती है और सही समय पर संबंध बनाने से गर्भवती होने की संभावना भी।''

लेखक हिमानी दीवान हाल ही में खुद मां बनी हैं।

ये है ऑव्यूलेशन पीरियड और गर्भावस्था

दरअसल मासिक चक्र शुरू होने से कुछ दिनों पहले एक मैच्योर एग ओवरी से बाहर निकलता है और फैलोपियन ट्यूब से होते हुए आपके यूट्रस में प्रवेश करता है, जिसे ऑव्यूलेशन पीरियड कहा जाता है। आसान भाषा में कहा जाए तो पीरियड्स खत्म होने के एक हफ्ते बाद 5 से 7 दिन का समय गर्भधारण के लिए सबसे अनुकूल समझा जाता है। इस दौरान गर्भवती होने की संभावना सबसे ज्यादा होती है। इस दौरान स्पर्म के आसपास मिलने के बाद स्पर्म और एग जुड़ते हैं। इसे फर्टिलाइजेशऩ कहा जाता है।

स्पर्म आपके गर्भाश्य और फैलोपियन ट्यूब में 6-7 दिन तक रह सकता है, इसलिए एग और स्पर्म को मिलने में कई बार एक सप्ताह का समय लग जाता है। जब ये फर्टिलाइज्ड एग गर्भाश्य की तरफ जाता है, तब वह ज्यादा से ज्यादा सेल्स में विभाजित होने लगता है, जिसे एक बॉलनुमा आकृति बन जाती है। कोशिकाओं की ये गेंदनुमा आकृति फर्टिलाइजेशन के 3-4 दिन बाद गर्भाश्य में प्रवेश करती है। जब ये गर्भाश्य की दीवार से जुड़ जाती है, इसे इंप्लांटेशन कहा जाता है, जो कि गर्भावस्था की आधिकारिक यानी ऑफिशियल शुरुआत होती है।

जब एक फर्टिलाइज्ड एग गर्भाश्य में इंप्लांट हो जाता है, तब प्रेग्नेंसी हार्मोंस की वजह से पीरियड्स रुक जाते हैं। लेकिन अगर एग स्पर्म से नहीं जुड़ता है या फर्टिलाइज्ड एग यूट्रस में इंप्लांट नहीं होता है, तो पीरियड्स के दौरान ये फर्टिलाइज्ड एग्स भी बाहर निकल जाते हैं और गर्भवती होने के लिए अगले महीने का इंतजार जरूरी हो जाता है।

कई बार महीनों तक इन कोशिशों से जूझने के बाद भी जब गर्भावस्था की स्थिति सामने नहीं आती, तब मोटापा और ज्यादा उम्र के अलावा पीसीओएस (पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम) या पीसीओडी जैसे कारण गर्भावस्था में बाधा के तौर पर सामने आते हैं। ये एक प्रकार का हार्मोनल विकार है, जिसमें दो खास दो खास हार्मोन्स (Hormones) प्रोजेस्ट्रोन और एस्ट्रोजन के बीच संतुलन बिगड़ जाता है और कई बार अंडाशय में सिस्ट (गांठ) बनने लगते हैं. इससे शरीर में कई समस्याएं होने लगती हैं।

'क्योंकि कमी सिर्फ महिला में ही नहीं, पुरुष में भी हो सकती है।

इस बारे में डॉ. निलांचलि बताती हैं, ''शादी के कुछ ही महीनों बाद बच्चे की जल्दी करने या निराश होने के मामले काफी सामने आते हैं, जबकि सब कुछ सही होने पर भी दंपत्ति को छह महीने से एक साल का समय गर्भावस्था की स्थिति तक पहुंचने में लग सकता है। इससे ज्यादा समय लगने पर जरूर डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए और उसी के अनुसार दवा व उपचार किया जाना चाहिए। 'क्योंकि कमी सिर्फ महिला में ही नहीं, पुरुष में भी हो सकती है। हालांकि इन समस्याओं का उपचार भी संभव है, बशर्ते लोग इस बारे में खुलकर सामने आएं और इलाज कराएं।'

नोट-डियर मां की दूसरी किश्त में पढ़ें- प्रेग्नेंसी टेस्ट किट की कहानी और उसके मायने

परिचय- लेखिका, दिल्ली में रहने वाली पत्रकार हैं। उपरोक्त उनके निजी विचार और अनुभव हैं

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