महिला दिवस: "जब हम आबादी में 50 फीसदी हैं तो संसद और विधानसभा में आरक्षण भी 50 फीसदी हो"

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस ( WomensDay) के मौके पर संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण की शुरुआत हुई। इस दौरान महिला सांसदों को विशेष तौर से बोलने का मौका मिला, जिसमें उन्हें महिला आरक्षण की बात की। जानिए किस महिला सांसद ने क्या कहा..

महाराष्ट्र से शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा सदन में कहा, "24 साल पहले संसद से शुरुआत हुई थी कि हम महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण लाएंगे। मैं मानती हूं कि 24 साल के बाद ये आंकड़ा 50 फीसदी कर देना चाहिए, जब हम 50 फीसदी आबादी हैं तो 50 फीसदी हमारा प्रतिनिधित्व संसद और विधानसभा में क्यों न हो?"

उन्होंने आगे कहा कि कोविड महामारी का सबसे ज्यादा असर महिलाओं पर पड़ा है। उनका पर काम बढ़ा है। घरेलू हिंसा बढ़ी है। कम उम्र में शादियां बढ़ी हैं, उनकी मेंटल हेल्थ की समस्या बढ़ी है। पढ़ाई करने वाली महिलाओं की पढ़ाई छुड़वाई गई है। मैं चाहती हूं कि संसद में इस मुद्दे पर एक चर्चा हो।"

"आधे से अधिक हूं, पर अधिकार से वंचित हूं। सोनल मान सिंह

अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस मनाए जाने की मांग भी रखी

राज्यसभा की नामित सदस्य, भारतनाट्यम और ओडिसी की प्रख्यात नृत्यांगना, वक्ता सोनल मान सिंह ने इस दौरान राज्यसभा के सभापति का आभार जताया कि उन्होंने महिला दिवस के मौके पर महिलाओं को बोलने का मौका दिया। उन्होंने कहा, "अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2 जर्मन महिलाओं ने शुरु किया था। और आज मैं इस सदन के पटल से ये मांग रखती हूं कि अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस मनाया जाए, क्योंकि हम बराबरी की बात करते हैं।"

महिलाओं के आरक्षण के मुद्दे पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि, "आधे से अधिक हूं, पर अधिकार से वंचित हूं। तो ये जो सारे क्षेत्रों में बराबरी की बात हो रही है, जहा पॉलिसी बनती हैं, नीतियां गढ़ी जाती है। वहां इस निष्कर्ष नहीं पहुंचे हैं कि कितना फीसदी स्त्रियों का होना चाहिए। ये कौन अधिकार देता है ये मैं पूछना चाहती हूं इस,पर विचार किया जाएगा।"

इस दौरान उन्होंने एक महिला सशक्तिकरण से जुड़ी एक घटना का जिक्र किया का। उन्होंने बताया कि, "पहली बार एक टैंकरशिप, जिसमें कैंप्टन से लेकर क्रू तक सब महिलाएं हैं। वो शिप मुंबई से वडीनार गया है। ये दुनिया में पहली घटना है। दुनियाभर के संस्थानों ने इसे सराहा है।"

एनसीपी की राज्यसभा सांसद फौजिया खान ने कहा-"महिलाएं हर मुसीबत का सामना करने में आगे रहे है लेकिन सामाजिक रुढीवादियों, सोशियो इनमॉमिक और धार्मिक-सांस्कृतिक बधाओं ने महिलाओं को ऐसी जगह आने से, ऐसी कुर्सी पर बैठने से रोका है जहां वो फैसले ले सकें।"


संसद के ऊपरी सदन में महिला दिवस पर बोलते हुए छत्तीसगढ़ से बीजेपी सांसद सरोज पांडे ने कहा बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ मुहिम के लिए प्रधानमंत्री सराहना की तो तीन तलाक कानून को महिला सशक्तिकरण के लिए बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा, "पिछले कुछ वर्षों में महिलाएं बहुत सशक्त हुई हैं। क्योंकि इस देश के कई राज्यों में जब बच्ची पैदा होती थी। ये पुरातन समय से चला आ रहा था कि अगर घर में बेटी पैदा होने वाली होती थी या तो उसे जन्म से पहले मार देते थे या जन्म लेने के बाद, अनुपात (महिला-पुरुष) बिगड़ गया था लेकिन बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ की शुरुआत हुई। और अब देखिए ये अनुपात भी सुधरा है।

छत्तीसगढ़ से कांग्रेस सांसद छाया वर्मा ने भी महिलाओं को आरक्षण की वकालत की। तो सांसद फूलो देवी ने कहा कि महिलाओं की किचन का बजट बिगड़ रहा है। इसलिए संसद में इस मुद्दे पर चर्चा कर उन्हें निजात दिलाई जाए।

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