जानिए इस महिला के बारे में जिसने अब तक 2000 से ज्यादा साइबर क्राइम के मामले निपटाए

Shrinkhala PandeyShrinkhala Pandey   9 Dec 2017 5:47 PM GMT

जानिए इस महिला के बारे में जिसने अब तक 2000 से ज्यादा साइबर क्राइम के मामले निपटाएबरक्राइम इंवेस्टीगेटर पट्टाथील धान्या मेनन ।

सोशलमीडिया का समय है और ऐसे में इसके जितने फायदे हैं उतने नुकसान भी हैं। साइबर क्राइम को रोकने के लिए कई तरह के कानून व सेल बनाए गए हैं जिससे ऐसे अपराधों को बढ़ावा न मिले। पट्टाथील धान्या मेनन भी एक ऐसी साइबरक्राइम इंवेस्टीगेटर महिला हैं जो साइबर अपराधों को रोकती हैं।

वर्ष 2010 में धान्या ने केरल में अवॉन्ज़ो नामक अपनी साइबर-सिक्योरिटी कंपनी बनाई। ये कंपनी साइबरक्राइम का शिकार हुए लोगों की मदद करती है। पट्टाथील बताती हैं, ‘‘हम लोगों का पुलिस से कोई संबंध नहीं है इसलिए हम कोई शिकायत नहीं दर्ज करते सिर्फ उन्हें कानूनी सलाह देते हैं। वो बताती हैं, ‘‘जब हमने शुरुआत की थी, तब हमारे पास महीने में आठ मामले आते थे। लेकिन अब हम हर सप्ताह क़रीब 200 केस देखते हैं।”

शुरूआत में आपको किन प्रोफ़ेशनल चुनौतियों का सामना करना पड़ता है? पूछे जाने पर वे कहती हैं,‘‘कई बार आपके आसपास के लोग ही बाधक होते हैं, वे अपनी समस्याओं का शॉर्टकट समाधान चाहते हैं। वे जानकारी तो चाहते हैं, पर थोड़ी मेहनत करके मामले को क़ानूनी स्तर तक ले जाने की ज़हमत नहीं उठाते।’’

ये फैसला कब और कैसे लिया। इस पर वो बताती हैं, वह ऑर्कुट का समय था। जब पहला ये मामला आया। वह प्रोफ़ाइल एक छोटे बच्‍चे ने बनाया था, उसने अपनी टीचर और मां को सबक सिखाने के लिए बनाया था, क्योंकि दोनों उसे अक्सर डांटते रहते थे। तभी मेरे दिमाग में आया कि मैं अब इसी क्षेत्र में करियर बनाऊं।

धान्या को क़ानूनी मसलों में ज़्यादा दिलचस्पी नहीं थी, बावजूद इसके कि उनके दादाजी के बड़े भाई सुप्रीम कोर्ट में वक़ील थे।उन्हीं की सलाह को मानते हुए धान्या ने यह राह चुनी। त्रिशूर, केरल से कम्प्यूटर साइंस में ग्रैजुएशन करनेवाली धान्या ने रीटेल मैनेजमेंट में एमबीए किया था। जब भारत में डिजिटल इंडिया की शुरूआत हुई तो उन्होंने करियर में बड़ा बदलाव करते हुए साइबरक्राइम के मामलों में दिलचस्पी लेनी शुरू की।

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वो कहती हैं, मैंने इस क्षेत्र में काफ़ी समय बाद आने का फ़ैसला किया, वो भी अपने दादाजी की सलाह पर। उनका मानना था कि साइबर लॉ में भविष्य अच्छा है। आमतौर पर मैं उनकी बातें अनसुनी कर दिया करती थी, लेकिन इस बार मैंने उनकी बात मान ली।’’ उसके बाद मैनें एशियन स्कूल ऑफ़ साइबर लॉ, पुणे से साइबर लॉ ऐंड इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स इन साइबर स्पेस में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया।

लोगों को ट्रेनिंग देते हुए पट्टाथील।

बतौर साइबरक्राइम इन्वेस्टिगेटर अपने 15 वर्षों के कार्यकाल के दौरान धान्या के पास केंद्र सरकार के सलाहकार के रूप में काम करने का भी अनुभव है। इस बीच उन्होंने फ़ेक प्रोफ़ाइल्स, विशुअल मॉर्फ़िंग, आइडेंटिटी थेफ़्ट, अश्लीलता, साइबर स्टॉकिंग से जुड़े 2,000 से अधिक मामलों की जांच-पड़ताल की। उनके पास आए जटिल मामलों में से एक था वर्ष 2006 का केरल का वह केस, जब तीन स्कूली लड़कियों ने दूसरे स्कूल के लड़कों द्वारा मोबाइल से खींचे गए फ़ोटोज़ से ब्लैकमेल किए जाने से तंग आकर आत्महत्या कर ली थी।

इतने अनुभव के बावजूद धान्या ख़ुद को साइबरक्राइम विशेषज्ञ नहीं मानतीं। वे कहती हैं,‘‘मुझे लगता है कि मैं विशेषज्ञ नहीं, एक पोस्ट-मार्टम डॉक्टर हूं। वैसे इस क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करने के कई विकल्प हैं। आप चाहे जो भी विकल्प चुनें, सफल होने के लिए आपको अपना सौ फ़ीसदी देना ही होगा।’’

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