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तलाक़ के फैसले जल्द हों तो शुरू हो नई ज़िंदगी

Swati ShuklaSwati Shukla   14 April 2017 3:53 PM GMT

तलाक़ के फैसले जल्द हों तो शुरू हो नई ज़िंदगीअदालतों की कमी के कारण भी तलाक में समय लगता हैं।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। जहां एक तरफ तीन बार तलाक बोलने से तलाक मिल जाता है, वहीं दूसरी तरफ तलाक पाने के लिए 10 साल गुजर जाते हैं। परिवारिक न्यायालयों में तलाक के मामले बहुत दिनों तक चला करते हैं, जिसका सबसे बड़ा कारण है, अदालतों की कमी होना। लेकिन इस्लाम धर्म के अनुसार, तलाक देने में तीन महीने का भी समय नहीं लग रहा है। तलाक जल्दी हो या देर से, इसमें बहुत सी महिलाओं की जिंदगी बर्बाद हो जाती है। अगर समय रहते तलाक हो जाएं तो लोग दोबारा से अपनी जिंदगी शुरू कर सकते हैं।

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रेनु सिंह (30 वर्ष) बताती हैं, “शादी के एक महीने बाद मारपीट होने लगी। दहेज को लेकर आए दिन मेरे पति मारपीट करते रहते थे। एक दो बार मेरे मायके वालों ने इनकी मांगें पूरी की, लेकिन जब ज्यादा मांग करने लगे तो हमने विरोध किया तो घर से निकाल दिया। उसके बाद तलाक देने का फैसला किया। लेकिन अभी तक तलाक नहीं हो पाया। चार वर्षों से कोर्ट के चक्कर काट रहे हैं।”

दूसरी ओर, बालागंज की रहने वाली मुस्लिम महिला बताती हैं, “मेरे एक बेटा है, मैं पढ़ने में बहुत अच्छी थी, लेकिन मेरे शौहर पढ़े-लिखे नहीं हैं। आए दिन पढ़ाई को लेकर लड़ाई करते थे। एक दिन गुस्से में आकर तलाक दे दिया। तलाक के बाद मैंने बहुत पढ़ाई की और आज मैं शोध कर रही हूं।”

वहीं पारिवारिक न्यायालय में तलाक के लिए आई परमीत यादव (44 वर्ष) बताती हैं, पूरे सात साल हो गए हैं तलाक का मुकदमा दर्ज कराएं, अभी तक सिर्फ सुनवाई हो रही है। तारीख साल में दो बार मिली है।

हमारी कोर्ट में अभी बहुत से ऐसे मामले आए हैं, जो 20-20 साल पुराने हैं। हमारा प्रयास रहता हैं कि लोगों को सही न्याय मिले। अगर दोनों पक्ष आपसी सहमति से अलग होना चाहते हैं, उनके 18 माह में तलाक हो जाते हैं। लम्बे चलने वाले मुकदमे तभी चलते हैं, जब एक पक्ष तलाक नहीं देता।
पल्लवी अग्रवाल, जज, फास्ट ट्रेक कोर्ट

कानून और नियम इतने बने हैं, लेकिन सब एक समय पर आकर बेकार हैं। महीनों तारीख के लिए इतंजार करना पड़ता है, लेकिन वहां पर कोई न कोई कारण से काम रुक जाता है। जिसके वजह से तलाक नहीं हो पाता है। जिला मुख्यालय से 8 किमी. दूर फैज्जुलागंज की रहने वाली गुड़िया (25 वर्ष) बताती हैं, मेरी जिस लड़के से शादी हुई वो पहले से ही शादीशुदा है। दहेज के लालच में घर वालों ने शादी कर ली। जब ये बात हमको पता चली तो तलाक के लिए मुकदमा दर्ज कराया, आज तीन साल हो गए तलाक नहीं हो पाया।

कोर्ट में तलाक के मामले दस-दस साल से ज्यादा चलते हैं क्योंकि इनका कोई टाइम नहीं होता है। दोनों पक्षों की बात को बिना सुने फैसला नहीं दिया जाता है। पांच-पांच महीने के बाद तारीख मिलती है। जिसके कारण मामले इतने लम्बे चलते हैं। कभी-कभी एक पक्ष तलाक नहीं चाहता तो तलाक जल्दी नहीं मिल पाता।
सुरेश नारायण मिश्रा, अधिवक्ता, पारिवारिक न्यायालय बार एशोसिएशन

तीन गुना से ज्यादा तेजी से बढ़े तलाक

इंटरनेशनल सेंटर फॉर रिसर्च ऑन वूमेन (आईसीआरडब्ल्यू) के सर्वे में सामने आया है कि देश में तेजी से बढ़ रहे तलाक के मामले में केरल अन्य राज्यों से आगे है। यहां हर साल तलाक साढ़े तीन गुना तेजी से बढ़ रहे हैं। तलाक के मामले में पंजाब और हरियाणा इस मामले में दूसरे नंबर पर है।

20 हजार मामले अभी भी लंबित

राजधानी के परिवारिक न्यायालय में हर रोज 80 से 100 लोग तलाक के लिए मुकदमा फाइल करते हैं। जिसमें से एक दिन में 20 या 30 मामले पर काम हो पाता है क्योंकि न्यायधीशों की ज्यादा कमी है। पांच-पांच महीने के बाद तारीख मिलती है, जिसके कारण मामले इतने लम्बे चलते हैं। दोनों पक्षों की बात जब तक पूरी तरह नहीं सुनी जाती तब तक तलाक नहीं हो सकता। 20 हजार मामले तलाक लम्बित है। जिनके लिए कम से कम 30 अदालतों का होना जरुरी है।

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