इसलिए गर्भावस्था में जरूरी है एचआईवी टेस्ट कराना

इसलिए गर्भावस्था में जरूरी है एचआईवी टेस्ट करानागर्भवती महिला के लिए क्यों जरूरी है से टेस्ट

किरन के आठ माह के बेटे की मौत एचआईवी से हुई क्योंकि किरन और उसके पति दोनों को एड्स था। किरन जब गर्भवती थीं तो उन्हें ये बात नहीं पता थी और इसका नतीजा ये हुआ कि कुछ समय बाद ही उसे अपना बेटा खोना पड़ा।

एचआईवी यानि एड्स एक जानलेवा बीमारी है। इसके फैलने के कई कारण है जिनमें से एक संक्रमित मां से बच्चे का होना भी है, इसे लेकर लोगों के कई सवाल हैं। जैसे क्या संक्रमित मां द्वारा दवाएं लेने के बावजूद बच्चे को एचआईवी संक्रमण फैल सकता है?

वर्ष 2015 में भारत में एचआईवी एस्टीमेशन नामक रिपोर्ट के माध्यम से हाल ही में जारी किए गए आंकड़े बताते हैं कि भारत में 15-49 वर्ष के बीच के वयस्कों में एचआईवी फैलने की दर 0.26% है। यह दर पुरुषों में 0.30% और महिलाओं में 0.22% है जबकि उत्तर प्रदेश में यह दर 0.12% के करीब है।

उत्तर प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी (UPSACS) के अपर परियोजना निदेशक श्री उमेश मिश्र का कहना है, “यदि हम माँ से बच्चे में होने वाले संकरण के इस लक्ष्य को रोकने में सक्षम हो जाते हैं तो हम तकरीबन 3000 बच्चों को संक्रमित होने से बचा पाएंगे।”

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हालांकि गर्भवती महिला चाहे तो सही समय पर इलाज करा कर अपने बच्चे को इस बीमारी से बचा सकती है लेकिन इसके लिए सबसे ज्यादा जरूरी है जागरूकता। इस बारे में लखनऊ की स्त्रीरोग विशेषज्ञ डॉ पुष्पा जायसवाल बताती हैं, “अगर आप गर्भवती हैं और आपको एचआईवी स्टेटस की जानकारी नहीं है, तो आप एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी करा सकती हैं। यह संक्रमण की गंभीरता पर निर्भर करता है और आपको डिलीवरी से पहले दवाएं लेने की सलाह दी जाती है। यहां तक की डिलीवरी के बाद भी आपको दवा लेनी पड़ सकती है।”

डॉ जायसवाल आगे बताती हैं, “इसमें डॉक्टर कुछ ऐसी दवाएं देते हैं जिससे भ्रूण को एचआईवी के जोखिम से बचाया जा सके। इसके अलावा यह ध्यान रखा जाता है कि एचआईवी दवाओं से भ्रूण पर किसी तरह का प्रभाव ना पड़े।”

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डॉक्टर प्रीती पाठक जो उत्तर प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी (UPSACS) में आई.सी.टी.सी./ पी.पी.टी.सी.टी. की प्रमुख हैं बताती हैं, “भारत सरकार वर्ष 2020 तक आई एचआईवी और सिफलिस के संचरण को बच्चों में पूर्ण रूप रोकने के लिए प्रतिबद्ध है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए राज्य स्तर पर एक कार्यकारी समिति का गठन किया गया जिसके द्वारा इस लक्ष्य को हासिल करने की योजना बनाई गई है। सरकार ने वर्ष 2017-18 में 45% अनुमानित गर्भवती महिलाओं को वर्ष 2018-19 में 75% गर्भवती महिलाओं को और 2019-20 में 95% को कवर करने की योजना बनाई है।“

बच्चे को स्तनपान कराने से भी हो सकता है संक्रमण

गर्भावस्था, प्रसव या स्तनपान के दौरान एचआईवी पॉजिटिव मां से उसके बच्चे में संक्रमण की सबसे अधिक संभावना होती है यदि कोई प्रयास नहीं किया जाए तो इसके संचरण की दर 15% से लेकर 45% तक होती है परन्तु प्रभावी रूप से प्रयास किये जाने पर यही दर 5% से भी कम हो सकती है। वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन के अनुसार, अगर महिला रिप्लेसमेंट फीडिंग कर सकती है, तो उसे ब्रेस्टफीडिंग कराने से बचना चाहिए। यानि अगर आप ब्रेस्ट मिल्क की बजाय फार्मूला फीड करा सकती हैं, तो आपको स्तनपान कराने से बचना चाहिए। हालांकि डॉक्टर फार्मूला फीड नहीं कराने की भी सलाह देते हैं। लेकिन इस स्थिति में डॉक्टर आपको इसकी सलाह दे सकता है।

गर्भावस्था में एचआईवी टेस्ट कराएं

गर्भावस्था के दौरान आपको हर तिमाही में एचआईवी टेस्ट कराना चाहिए। वास्तव में पहली तिमाही के दौरान एचआईवी और अन्य इन्फेक्शन के टेस्ट शामिल हैं। इसके अलावा मां-बाप दोनों को गर्भावस्था की पहली, दूसरी और तीसरी तिमाही में क्लिनिकल परीक्षण के लिए जाना चाहिए।

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First Published: 2017-12-06 17:50:03.0

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