ज़ीरो फ़िगर की चाह में लड़कियां हो रहीं कुपोषित

ज़ीरो फ़िगर की चाह में लड़कियां हो रहीं कुपोषितगाँव कनेक्शन

कामिनी ने बड़ी मुश्किल से अपने दिल पर काबू किया। अपने पसंदीदा समोसों से भरी प्लेट ठुकराना उसे बुरा तो बहुत लगा। फिर भी उसने यह त्याग करना ज़रूरी समझा। सुबह से सिर्फ शहद नींबू का पानी पिए हुए कामिनी को चक्कर आ रहे थे। फिर भी उसने कुछ न खाने की कसम खा रखी थी।

कामिनी की तरह हमारे शहर देहात में लाखों लड़कियां पतली होने की इच्छा में डायटिंग कर रही हैं। सभी के मन में करीना कपूर या कटरीना कैफ जैसा दिखने की ललक है। सच तो यह है, पूरा माहौल ही पतला दिखने पर तुला है। चाहे वो फैशन आइकॉन हों या फ़िल्मी अभिनेत्रियां, हर ओर से लड़कियों व महिलाओं के दिमाग पर अति दुबली पतली दिखने का प्रेशर है। हर फैशन, स्टाइल व कपड़े भी (हाथ, अगरबत्ती, पैर मोमबत्ती) जैसी महिलाओं के लिए ही बने हैं। बचपन से ही हर बच्ची के मन में यह डर भर दिया जाता है कि, हाय कहीं मोटी न हो जाए।

वे ये नहीं जानतीं कि पतली होने की चाहत में ये किशोरियां कुपोषण की शिकार हो रही हैं। आए दिन डाक्टरों के पास आ रही लड़कियां खून की कमी व कमज़ोरी से ग्रसित हैं। अधिकतर ये खुद ही डाइटिंग के कारण कमज़ोरी व अन्य बीमारियों को बुलावा दे रही हैं। कुपोषण के कारण हार्मोनल विकार भी हो जाते हैं। कई मरीजों में मासिक चक्र भी अनियमित हो जाता है। बाल झडऩे लगते हैं, नज़र कमज़ोर हो जाती है, हड्डियां खोखली हो जाती हैं। तेजहीन, कांतिहीन व स्फूर्तिहीन व किशोरी गृहस्थी और फिर मातृत्व की दहलीज़ पर कदम रखती है। अत्यधिक डाइटिंग एक मनोरिग है। जिस तरह हमारे चेहरे-मोहरे अलग-अलग होते हैं, इसी प्रकार हमारे शरीर की बनावट भी अलग होती है। अधिक डाइटिंग करके हम अपने शरीर को दुर्बल कर लेते हैं। याद रखिए संतुलित आहार और नियमित व्यायाम ही स्वस्थ शरीर दे सकते हैं।

महिलाएं क्यों करती हैं डाइटिंग?

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