महिला दिवस: पिता की मौत के बाद 3 बहनों की शादी और घर चलाने के लिए युवती ने पकड़ ली ट्रैक्टर की स्टेयरिंग

महिला दिवस: पिता की मौत के बाद 3 बहनों की शादी और घर चलाने के लिए युवती ने पकड़ ली ट्रैक्टर की स्टेयरिंगमहिला किसान नन्नी राजा।

सुखवेंद्र सिंह परिहार, कम्यूनिटी जर्नलिस्ट

ललितपुर (बुंदेलखंड)। सूखे बुंदेलखंड में कुछ किसान अपनी मेहनत के बदल पर न सिर्फ जमीन को हरा-भरा किए हैं बल्कि दूसरों के लिए प्रेरणा भी बन रहे हैं। रोजगार के अभाव में जब हजारों लोग शहरों की ओर भाग रहे थे ये किसान अपने खेतों में मुनाफे की फसल काट रहे थे। इनमें कई महिला किसान भी हैं। ललितपुर जिले की महिला किसान नन्नी राजा उन्हीं में से एक हैं।

सिंचाई के लिए पंपिंग सेट चालू करती नन्नी।

ललितपुर जनपद से पूर्व उत्तर मे 54 किमी बार ब्लॉक के बानपुर गाँव की नन्नी राजा (28 वर्ष) के पिता की मृत्यु चार वर्ष पहले हो गई थी। उस दुख की घड़ी में साहस का परिचय देते हुए नन्नी ने पिता को मुखाग्नी दी और अपने परिवार को संभाला।

हम चार बहने है, पिता सिर्फ बड़ी बहन की शादी कर पाए थे। उनकी मृत्यु के बाद परिवार आर्थिक तंगी में जूझने लगा और खेती भी चौपट हो गई। हमारा कोई भाई नहीं है इसलिए खेती और घर की देखरेख की जि़म्मेदारी मेरे सिर पर आ गई तो मैंने उसे ही रोज़गार बना लिया।
नन्नी राजा, महिला किसान, ललितपुर

कक्षा 9वी तक पढ़ाई कर चुकी नन्नी राजा बताती हैं, ''हम चार बहने है, पिता ने बड़ी बहन की शादी अपने सामने कर दी थी। उनकी मृत्यु के बाद परिवार आर्थिक तंगी में जूझने लगा और खेती भी चौपट हो गई। हमारा कोई भाई नहीं है इसलिए खेती और घर की देखरेख की जि़म्मेदारी मेरे सिर पर आ गई।"

आज ललितपुर जनपद में संपन्न किसानों की श्रेणी में आने वाली नन्नी राजा अपनी खेती के साथ-साथ खुद कई महिलाओं को खेती से जोड़ चुकी हैं। नन्नी राजा खेती में आधुनिक कृषि यंत्रों के बेहतर प्रयोग के प्रति अपने क्षेत्र के किसानों को जागरुक भी कर रही हैं।

अपने खेत के ज्यादातर काम खुद करती हैं नन्नी।

नन्नी राजा बताती हैं, ''हमने अपनी तीसरी बहन की शादी इसी माह की है। अभी हमारे पास पैसों की कमी है, इसलिए मैं खुद शादी नहीं की हूं। पहले गाँव के लोग मेरा मज़ाक उड़ाते थे, वही लोग आज मेरी तारीफ कर रहे हैं।"

कृषि क्षेत्र में नन्नी राजा के सहयोग को सराहते हुए कृषि विशेषज्ञ डॉ. मोहन सिंह बताते हैं, ''ग्रामीण इलाकों मे जब परिवार का मुखिया ना हो ऐसे मे महिलाएं टूट जाती हैं। ऐसी घड़ी मे नन्नी राजा ने अपने परिवार को संभाला और अदम्य साहस का परिचय दिया और मिसाल क़ायम की। नन्नी राजा की वजह से क्षेत्र की महिलाएं संकोच छोड़ आगे आने लगी हैं।"

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