यहां घर-घर में सुलगती हैं भट्टियां , टल्ली होकर पड़े रहते हैं पुरुष, महिलाएं चलाती हैं घर 

Neetu SinghNeetu Singh   26 May 2017 8:28 PM GMT

यहां घर-घर में सुलगती हैं भट्टियां , टल्ली होकर पड़े रहते हैं पुरुष, महिलाएं चलाती हैं घर अपनी परेशानियों को लेकर महिला समाख्या पहुंची ग्रामीण महिलाएं। 

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

मुजफ्फरनगर। शराब के नशे ने लोगों को इस कदर अपनी आगोश में ले रखा है कि उन्होंने रिश्तों को भी ताक पर रख दिया है। नशे में गालियां देना बीवी के साथ मारपीट करना तो जैसे आम बात है। गौर करने वाली बात तो यह है कि मारखाने के बाद भी सुबह उठकर पेट की भूख मिटाने के लिये मजदूरी करने निकल जाती हैं। गाँव कनेक्शन की टीम ने अपने सर्वे में ये बात जानी....

“सुबह उठते ही गालियां मिलती हैं, और मारपीट होने लगती है। बेचारी महिलाएं मार खाकर मजदूरी करने निकल जाती हैं, जिससे उनका घर चल सके।” पश्चिमी यूपी के जिले मुजफ्फरनगर के पुरकाजी ब्लॉक के खेड़की गाँव की एक 19 वर्ष की लड़की ने कुछ ऐसे अपने गाँव के हालात बयां किए। कुछ ऐसी है पश्चिमी यूपी के गाँवों में रहने वाली लाखों महिलाओं की ज़िंदगी, जिनके पति कच्ची शराब गाँव में ही बनाते हैं और उसी के नशे में धुत रह कर गाली-गलौज और मारपीट करते हैं।

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जिन क्षेत्रों में कच्ची शराब बन रही है उन क्षेत्रों में लगातार दबिश दी जा रही है। हमारी कोशिश लगातार जारी है कि ये भट्टियाँ बंद हों ।
अखिलेश कुमार सिंह, जिला आबकारी अधिकारी, मुज्जफरनगर

महिला समाख्या की महिलाओं की ट्रेनिंग के दौरान मुजफ्फरनगर जिले के पांच ब्लॉक की दर्जनों महिलाओं से 'गाँव कनेक्शन' ने बात की तो उन सभी ने अपने-अपने कार्यक्षेत्र के गाँवों की हकीकत बयां की। मुजफ्फरनगर जिले में महिला समाख्या में काम कर रही जूनियर रिसोर्स पर्सन स्नेहलता श्रीवास्तव (30 वर्ष) जिले के पांच ब्लॉक जानसठ, पुरकाजी, मोरना, चरथावल, ऊन (जो शामली जिले में है) के दर्जनों गाँव जहां शराब का कारोबार होता है, वहां की महिलाओं और बच्चों को पढ़ाई और अपनी आवाज उठाने के लिए जागरुकता कार्यक्रम चला रही हैं। वह कहती हैं, “कुछ गाँव जंगल क्षेत्र में होने की वजह से मुख्य सड़क से बहुत दूर हैं।

जहाँ प्रशासन के अधिकारी नहीं पहुंचपाते हैं, जिस वजह से इन गाँवों के पुरुषों को कोई डर नहीं है। महिलाएं विरोध करती हैं तो उनके साथ मारपीट की जाती है। लड़कियाँ स्कूल पढ़ने नहीं जा पाती हैं, बच्चों का सही से पालन-पोषण नहीं हो पाता न ही उन्हें शिक्षा मिल पा रही है।”

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मुजफ्फरनगर जिले के एक गाँव में रहने वाली लड़की ने नाम न छापने की शर्त पर कहा,“पुलिस का हफ्ता और महीना बंधा है। सभी अधिकारीयों को पता है यहां हर गाँव में कच्ची शराब बनती है। लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती है। हमारी आवाज़ मुख्यमंत्री तक पहुंचे और हमारे गाँव की शराब बंद हो हम बस यही चाहते हैं ।”

महिला समाख्या से जुड़ी रचना देवी (24 वर्ष) कहती हैं, “मेरे चार बच्चे हैं। दोनों टाइम चूल्हा जल जाये बड़ी बात है । पति सुबह से शराब पी लेते हैं। उन्हें लड़के-बच्चों से कोई मतलब नहीं है। मैं खेतों में काम करके जितना कमा पाती हूँ उससे सिर्फ बच्चों का पेट भर पाते हैं उन्हें पढ़ाना तो बहुत दूर की बात है ।”

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