बेटी को पहले ही दी माहवारी की जानकारी ताकि वक़्त आने पर वो घबराये ना

भारत में 35.5 करोड़ महिलाएं और किशोरियां हर महीने माहवारी की प्रक्रिया से गुज़रती हैं जिनमे से 71% को माहवारी आने से पहले इस प्रक्रिया के बारे में पता ही नहीं होता और 82% माहवारी के दिनों में असुरक्षित विकल्पों का प्रयोग करती हैं।

Jigyasa MishraJigyasa Mishra   3 Oct 2018 6:55 AM GMT

बेटी को पहले ही दी माहवारी की जानकारी ताकि वक़्त आने पर वो घबराये ना

लखनऊ: सीतापुर की रहने वाली सुनीता की बेटी अब 12 साल की हो चुकी है, इसलिए सुनीता में उसे माहवारी की पूरी जानकारी दी है। "हमने गुनगुन को सब समझा दिया है ताकि जब उसको पहली बार माहवारी हो तो वह उस से घबराये ना, बल्कि तैयार रहे। हमें तो इस बारे में अम्मा ने कुछ नहीं बताया था जब हम छोटे थे लेकिन यह ज़रूरी बात हमने गुनगुन को अभी से बता दी है," सुनीता ख़ुशी से बताती है।

भारत में 35.5 करोड़ महिलाएं और किशोरियां हर महीने माहवारी की प्रक्रिया से गुज़रती हैं जिनमे से 71% को माहवारी आने से पहले इस प्रक्रिया के बारे में पता ही नहीं होता और 82% माहवारी के दिनों में असुरक्षित विकल्पों का प्रयोग करती हैं।

Photo: Jigyasa Mishra/ Gaon Connection

किशोरावस्था में लड़कियों में माहवारी आना उनके मातृत्व की ओर बढ़ने की प्राकृतिक प्रक्रिया है और इस दौरान उन्हें उचित मार्गदर्शन के साथ ही स्वच्छ सैनेटरी पैड मिलना एक बुनियादी जरूरत है, लेकिन यह एक निराशाजनक तथ्य है कि हमारे देश में बड़ी संख्या में लड़कियां माहवारी के समय कपड़ा, टाट, रेत या राख आदि का इस्तेमाल करती हैं, जो स्वास्थ्य और स्वच्छता के लिए बेहद नुकसानदेह है। नाइन के आंकड़ों के मुताबिक आज भी मात्र 18 प्रतिशत महिलाएं सेनेटरी नैपकिन का इस्तेमाल करती हैं और 6,30,00,000 महिलाओं के पास शौचालय तक उपलब्ध नहीं है।

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आज भी भारत में ज्यादातर लड़कियों को माहवारी आने से पहले इस प्रक्रिया के बारे में पता ही नहीं होने की मुख्य वजह यही होती है की इस बारे में बात करना अच्छा या सहज नहीं माना जाता। यही वजह है कि कठिनता से भरे इन चार-पांच दिनों में उनकी बुनियादी जरूरत को पूरा करने पर भी ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता।

हालाँकि सरकारी स्तर पर और विभन्नि गैर सरकारी संगठनों के साथ ही 'पैडमैन' जैसी फिल्म बनाकर बॉलीवुड भी हालात को बेहतर करने में एक सराहनीय कदम आगे बढ़ाया है। सैनेटरी पैड बनाने वाली कंपनी 'नाइन' ने भारत में इन्हीं प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए महिलाओं को माहवारी के दौरान स्वच्छता के प्रति जागरूक करने और बहुत कम कीमत पर सैनेटरी पैड उपलब्ध कराने का बीड़ा उठाया है। कंपनी ने रक्षा बंधन और शिक्षक दिवस पर इस दिशा में विशेष कार्यक्रमों का आयोजन भी किया था। इसी श्रृंखला में उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में किशोरियों और महिलाओं में माहवारी के दौरान स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिये विशेष अभियान शुरू किया गया है।

अभियान के तहत छात्राओं के कालेजों में सैनेटरी पैड की वेंडिंग मशीनें लगायी जा रही है। फिलहाल दिल्ली, आगरा और इलाहाबाद के कालेजों में सैनिटरी पैड की 130 वेडिंग मशीनें लगाई गई हैं और धीरे-धीरे इनका दायरा बढ़ाया जाएगा। इसके अलावा महिला कार्यकर्ता दूरदराज के गांवों में महिलाओं को सैनिटरी पैड के इस्तेमाल के बारे में जानकारी दे रही हैं। 'नाइन मूवमेंट' और नाइन पैड की मुख्य कार्यकारी अधिकारी रिचा सिंह ने गाँव कनेक्शन से फ़ोन पर बातचीत में कहा, ''हमारा उद्देश्य माहवारी और सैनिटरी पैड के बारे में समाज में व्याप्त झिझक को मिटाना है। देश में बड़ी संख्या में महिलायें सैनेटरी पैड का इस्तेमाल नहीं करतीं हैं जिनमें सिर्फ ग्रामीण इलाकों की ही नहीं, बल्कि शहरी महिलाओं की तादाद भी काफी ज्यादा है।''

उन्होंने बताया कि 'नाइन पैड आंदोलन' के तहत उत्तर प्रदेश के लखनऊ, गोरखपुर, कानपुर, आगरा, सीतापुर, फिरोजाबाद जिलों के ग्रामीण इलाकों में पिछले दो महीनो में करीब 50 हजार किशोरियों और महिलाओं को माहवारी के दौरान स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के साथ ही सैनेटरी पैड के इस्तेमाल का महत्व समझाया गया है।


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सिंह बताती हैं कि इस काम में स्वयं सेवी संस्थाओं की महिला कार्यकर्ताओं, आगंनवाड़ी कार्यकर्ताओ और आशा कार्यकतार्ओं की भी मदद ली जा रही है और घर-घर जाकर किशोरियों और महिलाओं को जागरूक करने का काम किया जा रहा है। "हम स्वंय सेवी संस्थाओं की मदद से किशोरियों और महिलाओं को उनके घर या स्कूल पर जो पैड का पैकेट उपलब्ध करा रहे हैं, उसकी कीमत मात्र पन्द्रह रूपये है। इस जागरूकता अभियान को जल्द ही पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार और हरियाणा में भी शुरू किया जायेगा। कंपनी ने कुछ माह पहले 'मेक इन इंडिया' अभियान के तहत गोरखपुर में एक फैक्टरी की स्थापना की है, जिसमें अगले दो से तीन साल में करीब 100 करोड़ रूपये के निवेश का लक्ष्य है। कंपनी ने इसी वर्ष फरवरी में उत्तर प्रदेश में हुई इन्वेस्टर्स समिट में प्रदेश सरकार के साथ अस्सी करोड़ रूपये के एमओयू (समझौता पत्र) पर हस्ताक्षर भी किये थे," सिंह ने बताया।



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