राजपथ पर परेड़ करेगी लखनऊ की बहादुर बेटी अंशिका

राजपथ पर परेड़ करेगी लखनऊ की बहादुर बेटी अंशिकाराजपथ पर परेड की शान बनेगी हमारी आंशिका पांडेय।

लखनऊ। महज 16 वर्ष की आशिका पांडेय की वीरता और साहस की सराहना करते हुए 23 जनवरी को भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने नेशनल काउंसिल फॉर चाइल्ड वेलफेयर नेशनल ब्रेवरी अवार्ड 2016 पुरस्कार दिया।

वर्ष 2015 में 14 सितंबर को उत्तर प्रदेश के लखनऊ जनपद के मड़ियांव थाना क्षेत्र के भरत नगर कालोनी में रहने वाली अंशिका पांडेय (15 वर्ष) रोज की तरह घर से स्कूल के लिए निकली (अंशिका उस समय सेक्टर क्यू अलीगंज के सेन्ट अंथोनी इंटर कालेज में कक्षा 9 की छात्रा थी), घर से करीब आधा किमी की दुरी पर दाल मिल से मोहिबुल्लापुर स्टेशन के तरफ जाने वाली सुनसान गली में चारपहिया वाहन सवार दो व्यक्तियों ने उससे आगे जाने का रास्ता पूछा, जैसे ही अंशिका रास्ता बताने के लिए गाड़ी के करीब पहुची तो गाड़ी पर सवार युवक ने अंशिका को गाड़ी में खीचने का प्रयास किया।

खुद पर खतरा देख नन्ही अंशिका ने अपने दोनों पैर गाड़ी के गेट में फंसा दिया और जोरा जोर से चिल्लाने के साथ ही अपहरण कर्ताओ से भिड़ गयी, जब बदमाश अंशिका को गाड़ी में खींच पाने में सफल नही हुए तो एक बदमाश ने अंशिका पर सर्जिकल चाकू से कई वार कर दिए, जिसे अंशिका ने अपने हाथों पर रोकने का प्रयास तो किया पर अंशिका के दोनों हाथों पर चाकू के वार से गहरे जख्म हो गए खुद को कामयाब न होता देख बदमाशो ने अंशिका की आँखों में कोई लिकविड डालने का प्रयास किया तो उनके इरादे भाप अंशिका ने आँखे बंद कर ली।

अंशिका ने बताया कि उस दिन पेपर था सुबह पौने आठ बजे वह रोज घर से निकलती थी और सहपाठी गरिमा मिश्रा रोज उसे मोहिबुल्लापुर स्टेशन के सामने मिल जाती और वहां से दोनों साथ ही स्कूल जाते है घटना वाले दिन जब मै टाइम पर स्टेशन रोड नही पहुची तो वहां पर मेरा इन्तजार कर रही मेरी सहेली गरिमा मिश्रा मुझे अंदर की तरफ गली में देखने चली आयी की मै आ रही हूं या नही, जब उसकी नजर मुझपे पड़ी तो मेरे दोनों हाथों से खून बहता देख व उन बदमाशो को देख गरिमा ने जोर-जोर से रोना और चिल्लाना सुरु कर दिया, जिस पर बदमाश मुझे छोड़ गाड़ी लेकर ताड़ीखाना रोड की तरफ भाग गए। गरिमा मुझे व मेरे बैग को लेकर मेरे घर गयी। उस दिन मेरे कारण गरिमा का भी पेपर छूट गया, गरिमा मेरी बेस्ट फ्रेंड है और मै उसके लिए गरिमा की आभारी हूं।

प्रधानमंत्री के साथ देश के बहादुर बच्चे।

पीएम ने अंशिका से पूछे सवाल

अंशिका ने बताया कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंशिका से पूछा की आप के दाहिने तरफ जो लड़का बैठा है उस की खासियत क्या है, अंशिका ने जबाब दिया की इस लडके का नाम विलीन है और ये मलयालम भाषी है और इसे इंग्लिश भी अच्छी आती है विलीन के साथ उसका एक दोस्त है जिसे सिर्फ मलयालम आती है तो विलीन हमारी बात उसे मलयालम में और उसकी बात हमे इंगिलश में समझाता है।

दूसरे प्रश्न में प्रधानमंत्री ने अंशिका से पूछा की अपनी एक खूबी बताओ जिस पर आशिका ने जबाब दिया की कितना भी बड़ा मंच हो और वहां पर कितनी भी भीड़ हो हम अपनी बात को अपने पक्ष को सहजता के साथ सबके सामने रख सकते है और ये मैंने अपने पापा से सीखा है, मोदी जी के पूछने पर अंशिका ने दर्शक दीर्घा में बैठे अपने पापा सशिकान्त पांडेय की तरफ इशारा किया तो मोदी जी ने सशिकान्त पांडेय की वेशभूषा की तारीफ करते हुए कहा कि पांडेय जी देखने में बड़े स्तर के नेता लगते हैं।

यहां काफी अच्छा लग रहा है हर रोज किसी न किसी से मुलाकात होती है

अंशिका ने बताया कि हम 16 जनवरी को पापा के साथ दिल्ली आ गए थे यहा देश से और जिन बच्चो को ब्रेवरी अवार्ड के लिए बुलाया गया है सबको एक साथ गांधी निकेतन में सरकार की तरफ से ठहराया गया है यहा रोज हमलोगों की किसी न किसी से मुलाकात कराई जाती है अब तक नेवी चीफ लाम्बा, आर्मी चीफ विपिन रावत, एयरफोर्स चीफ, दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया, महिला एवं बाल कल्याण मंत्री भारत सरकार मेनका गांधी, व् महाममहिम राष्ट्रपति महोदय से मुलाक़ात हो चुकी है और सब लोगो ने हमे गिफ्ट भी दिए है। आज हमारी मुलाक़ात उपराष्ट्रपति व मेनका गांधी जी से होगी।

अंशिका का युवतियों के लिए सन्देश

अंशिका से ये पूछने पर की आप देश की युवतियो को क्या सन्देश देना चाहती है तो अंशिका ने कहा, ''चाहे आपके पापा,भाई व परिवार के अन्य सदस्य कितने भी बड़े पद पर हो या कितने भी पावरफुल हो लेकिन अगर राह चलते आप किसी हादसे का शिकार होती है तो उस समय सिर्फ आपको आप की हिम्मत और सूझबूझ ही बचा सकती है, अपनी रक्षा स्वयं करने का साहस और जज्बा हर लड़की में स्वयं होना चाहिए। मेरे साथ जो हादसा हुआ उस समय मेरे मन में सिर्फ एक ही विचार था कि मुझे सिर्फ मैं ही बचा सकती हूं।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और राज्यपाल ने भी किया सम्मानित

इस घटना के बाद लगभग सभी समाचार पत्रों ने इस घटना की गंभीरता और छोटी सी बच्ची के साहस को प्रकाशित किया, जिसका संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आशिका पांडेय को रानी लक्ष्मी वीरता पुरस्कार से समान्नित किया और एक लाख रूपये की चेक दी। उत्तर प्रदेश के राज्यपाल रामनाईक ने भी अंशिका को राजभवन बुला कर सम्मनित किया।

सामान्य है पारिवारिक बैकग्राउंड

अंशिका एक सामान्य किंतु लोकप्रिय और प्रभावशाली किसान की बेटी है अंशिका के पिता शशिकांत पांडेय किसान है और मूलरूप से लखनऊ जनपद के बीकेटी तहसील अंतर्गत पंडित पुरवा, ग्राम पंचायत अरम्बा के निवासी है। परिवार में अंशिका के अलावा के दो बेटे और दो बेटियां है। उत्कृष्ट व्यक्तितित्व व समाज सेवा में सक्रिय भागीदारी निभाने वाले अंशिका के पिता शशिकांत पांडे लखनऊ जनपद में काफी लोकप्रिय है व मुन्नू दादा के नाम से प्रसिद्ध है।

यूपी पुलिस नहीं कर पायी घटना का खुलासा

एक तरफ जहा अंशिका को देश के प्रधानमंती वीरता पुरस्कार से नवाज रहे है वही दूसरी तरफ घटना से लेकर आज तक यूँपी पुलिस इस मामले में एक कदम भी नही चल पायी है, घटना के दिन ही मड़ियांव पुलिस ने इस घटना में कोई त्वरित एक्शन नही लिया, इस घटना की जांच को तत्कालीन एसएसपी राजेश पांडेय ने क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर किया लेकिन उदासीन पुलिसिया रवैये के चलते आज तक इस घटना का खुलासा नही हो सका, वही इस घटना का अनावरण न होने से अंशिका के परिजनों में एक अज्ञात भय सा है इस घटना के बाद से अब तक अंशिका को कोई न कोई घर का सदस्य स्कूल छोड़ने और लेने जाता है।

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