गर्भावस्‍था के 9 महीने: महिलाओं को अगर इन 7 हार्मोन के बारे में पता हो प्रेगनेंसी आसान हो जाती है

प्रेगनेंसी में उल्टी आना-जी मिचलाना इतना फिल्मी नहीं है, जितना दिखाते हैं। असल कहानी में ये तकलीफों का समंदर है। 'डियर मां' सीरीज के तीसरे पार्ट में पढ़िए वो 7 हार्मेन जो गर्भावस्था के दौरान लाते हैं कई खुशियां और कई बार दुख दर्द भी।

गर्भावस्‍था के 9 महीने: महिलाओं को अगर इन 7 हार्मोन के बारे में पता हो प्रेगनेंसी आसान हो जाती है

डियर मां...खुद मां बनने के बाद मैं समझ सकती हूं, मुझे जन्म देने के लिए आप किस दौर से गुजरी होंगी। मुझे नहीं मालूम उस दौरान आपको परिवार और डॉक्टर की तरफ से कितनी मदद मिली होगी। लेकिन हर होने वाली मां से यही गुजारिश करुंगी कि वह अपनी गर्भावस्था के प्रति सतर्क और सचेत रहे। अपने डॉक्टर और अनुभवी महिलाओं के संपर्क में रहे।

जब घर पर किए गए टेस्ट और अल्ट्रासाउंड दोनों तरह से ये कन्फर्म हो गया कि मैं मां बनने वाली हूं, तब मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था। 31 साल की उम्र में मुझे मां बनने की खुशखबरी मिली, लेकिन इस खुशी को मैं ज्यादा सेलिब्रेट नहीं कर पा रही थी। कुछ ही दिनों बाद मेरी तबियत खराब होने लगी। पहली प्रेग्नेंसी थी, इसलिए वो सारे लक्षण मुझे तबियत खराब होने जैसे ही लगे। जब मां और सास से बात की, तो उन्होंने मेरी सारी तकलीफों को हंसी में छू कर दिया। उनका कहना था कि ये तो होता ही है, इसमें क्या बड़ी बात है। किसी को ज्यादा होता है किसी को कम। मुझे बताया गया कि ये जी मिचलाना, चक्कर आना, उल्टी आना, पेट खराब होना, खाना ना पचना, कुछ खाने का मन ना होना... वगैरह तीन महीने तक चलेगा। किसी तरह मैंने ये तीन महीने गुजारे, लेकिन उसके बाद भी ये सिलसिला रुका नहीं। इस बार सास ने कहा कि कुछ औरतों को पूरी प्रेगनेंसी ऐसा होता है और मेरा केस शायद उन औरतों वाला ही है। सच भी यही था।

मेरी पूरी प्रेग्नेंसी pregnancy मुझे उल्टी, चक्कर और जी मिचलाने जैसी ही नहीं इसके अलावा भी कई परेशानियां हुईं। इन परेशानियों के चलते डिलीवरी से पहले ही मैं दो बार अस्पताल में भर्ती भी हुई। इस वक्त जब मैं उस वक्त को याद करके ये सब लिख रही हूं, तब भी उस दौर के बारे में सोचते हुए मेरी सांस फूल रही है। बेहद मुश्किल भरा, फिर भी बेहद यादगार वक्त था वो। तभी उन तकलीफों को लेकर काफी कुछ इंटरनेट पर सर्च करती रहती थी। उस सर्च का नतीजा शॉर्टकट में लिखूं तो सात शब्द कहूंगी- एचसीजी (HCG) , एस्ट्रोजन ( estrogen ) , प्रोजेस्ट्रोन- Progesterone, ऑक्सीटोसिन- Oxytocin , एंडोरफिंस- Endorphins, प्रोलेक्टिन Prolactin, रिलेक्सिन- Relaxin

ये हैं उन हार्मोंस के नाम, जो आपकी प्रेगनेंसी में मदद भी करते हैं और उन्हीं के ऊपर-नीचे होने की वजह से वो नौ महीने एक रोलरकोस्टर राइड जैसे भी बन जाते हैं। साइंस की भाषा में हार्मोंस के इस डांस को समझना जरूरी है। मगर आसान भाषा में समझें, तो बात ये है कि आपके शरीर का हर हिस्सा, हर मांसपेशी इस समय आपके बच्चे के लिए जगह बनाने में जुटे हैं। ऐसे में हार्मोंस तो ऊपर-नीचे होंगे ही और हार्मोंस ऊपर-नीचे होंगे, तो शरीर में बदलाव भी होंगे। उल्टी vomiting in pregnancy , जी मिचलाना, थकान होना, कुछ करने का मन ना करना, धुंधला सा दिखना, खुजली होना, सूजन होना जैसे लक्षण इसी का नतीजा हैं।

बीते 14 सालों से बिहार के बेगूसराय में बतौर गायनेकोलॉजिस्ट Gynaecologist अपने सेवाएं दे रहीं डॉ. मिनी सिंह बताती हैं 'एचसीजी प्रेगनेंसी से जुड़ा सबसे अहम हार्मोन है। 3 महीने तक ये हार्मोन ओवरी से निकलते हैं, तीन महीने बाद प्लेसेंटा के जरिए ये शरीर में प्रवेश करते हैं। तीन महीने बाद अगर इनकी मात्रा जितनी होनी चाहिए उससे ज्यादा हो जाती है, तब महिलाओं को उल्टी, जी मिचलाना इत्यादि जैसे लक्षण तीन महीने से ज्यादा या पूरी प्रेगनेंसी बने रहते हैं।"

वो आगे बताती हैं, "कई बार लिवर या ब्लड प्रेशर से जुड़ी समस्याओं की वजह से भी उल्टी, जी मिचलाना और खाना ना पचना जैसे लक्षण तीन महीने से ज्यादा समय तक नजर आते रहते हैं। प्रेगनेंसी में हार्मोन्स का संतुलन जरूरी है। प्रेगनेंसी हार्मोंस के उतार-चढ़ाव की वजह से कई परेशानियां होती हैं। ज्यादातर परेशानियां सामान्य रूप से ही ठीक हो जाती हैं, लेकिन कोई भी परेशानी बढ़ने लगे या आपकी दिनचर्या डिस्टर्ब हो, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए।"

इस बात में कोई शक नहीं कि फिल्मों और टीवी सीरियल्स में उल्टी आने और प्रेगनेंट होने के कनेक्शन को जिस खूबसूरती से दिखाया गया है, उसका असल जिंदगी से कोई नाता नहीं है। बार-बार उल्टी आना और जी मिचलाना हर तरह से एक थका देने वाला अनुभव होता है। ऐसे में जब वही फिल्मों और टीवी वाले सेलिब्रेटीज असल जिंदगी का अपना अनुभव बांटते हैं, तो तसल्ली मिलती है।

जिस वक्त मैं प्रेगनेंट थी, उन्हीं दिनों एक्ट्रेस अनुष्का शर्मा Anushka Sharma की भी प्रेगनेंसी चर्चा में थी। अनुष्का ने जब अपनी प्रेग्नेंसी की खबर और उससे जुड़ी बातें शेयर कीं, तो मुझे काफी तसल्ली सी हुई। इतनी बड़ी सेलिब्रेटी भी वही महसूस कर रही थी, जिस सबसे मैं गुजर रही थी। अपने पहले ट्राइमेस्टर के बारे में अनुष्का ने कहा था- "मुझे इतनी थकान पहले कभी महसूस नहीं हुई, जितनी कि प्रेगनेंसी के दौरान। किचन में खड़े होना मेरे लिए मुश्किल हो गया है, क्योंकि मैं कुछ चीजों की स्मेल बिलकुल बर्दाश्त नहीं कर पा रही। हर वक्त मुझे उल्टी जैसा महसूस होता रहता है।'' ये पढ़कर शायद मेरी परेशानी को कोई साथी मिल गया, लेकिन परेशानी कम नहीं हुई। अपनी प्रेग्नेंसी के दौरान मैंने ये सीखा कि किसी भी परेशानी को कम करने की सबसे ज्यादा ताकत होती है परेशानी से जुड़ी सही जानकारी में। कहते हैं ना- नॉलेज इज पावर।


प्रेगनेंसी में उल्टी और जी मिचलाने की वजह है एचसीजी

एचसीजी यानी ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन हार्मोन प्रेग्नेंसी के दौरान प्लेसेंटा में बनता है। एचसीजी शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रॉन के स्तर को बनाए रखने में मदद करता है। गर्भावस्था के 8वें से 11वें हफ्ते में इसकी मात्रा अपने सबसे उच्च स्तर पर होती है, क्योंकि ये एग के फर्टिलाइज होने के बाद उसे पोषण देने में मदद करता है। होने वाली मां के खून और पेशाब में एचसीजी की मात्रा पहली तिमाही के दौरान काफी बढ़ जाती है। इसी की वजह से प्रेग्नेंसी में उल्टी आना और जी मिचलाना शुरू हो जाता है। एचसीजी की ज्यादा मात्रा रिलीज होने के कारण ही बार-बार पेशाब आने की समस्या भी होती है।

प्रेगनेंसी में प्रोजेस्ट्रॉन बढ़ाता है थकान

इसका सबसे अहम रोल है गर्भाश्य की लाइनिंग को मोटा करना। हर महीने आपके गर्भाश्य का आकार बढ़ाने में भी प्रोजेस्ट्रॉन ही मदद करता है, तभी आपका बढ़ता बच्चा आपके गर्भ में आराम से रह पाता है। लेकिन इस हार्मोन की मात्रा कम या ज्यादा हो जाए, तो थकान, डिप्रेशन, चक्कर आना, बेचैनी होना जैसे लक्षण भी बढ़ जाते हैं।

प्रेगनेंसी में सबसे खास है एस्ट्रोजन

इसे महिलाओं का मुख्य हार्मोन यानी मेन फीमेल सेक्स हार्मोन कहा जाता है। महिलाओं में जहां एस्ट्रोजन प्रमुख हार्मोन होता है, वहीं पुरुषों में टेस्टोस्टेरॉन जहां तक गर्भावस्था की बात है, तो महिलाओं में एस्ट्रोजन प्रेगनेंसी के दौरान बेहद अहम भूमिका निभाता है। गर्भ में पल रहे बच्चे तक सारे जरूरी पोषक तत्व पहुंचे, इसकी पूरी जिम्मेदारी एस्टोरजन के ही कंधों पर होती है। हालांकि गर्भावस्था के दौरान शरीर पर बढ़ते और मोटे होते बालों के लिए भी आप एस्ट्रोजन को ही जिम्मेदारी ठहरा सकती हैं। डॉक्टरों की सलाह ये है कि इन अनैच्छिक बालों को हटाने के लिए गर्भावस्था में ब्लीच वगैरह का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। गर्भावस्था में अगर आपकी सूंघने की शक्ति और भूख बढ़ गई है, तो उसके पीछे भी एस्ट्रोजन ही है। ये भी जान लीजिए कि प्रेगनेंसी ग्लो भी एस्ट्रोजन की वजह से ही आता है। ये कंसीव करना में मदद करता है और मिसकैरेज से बचाता है।

ऑक्सीटोसिन है हमारा लव हार्मोन

ऑक्सीटोसिन को लव हार्मोन भी कहा जाता है। जब भी आप प्यार भरे अहसास को महसूस करते हैं, तब आपके ब्रेन में ये हार्मोन बनता है। बच्चे को जन्म देने से लेकर उसे दूध पिलाने तक हर पड़ाव पर ये अहम रोल अदा करता है। इसी की वजह से मिल्क प्रोडक्शन अच्छा होता है। जब आप बच्चे को दूध पिलाते हैं, तब भी आपका ब्रेन ऑक्सीटोसिन रिलीज करता है और इससे आपके और बच्चे के बीच गहरा जुड़ाव होने में मदद मिलती है। ऑक्सीटोसिन कम होने से तनाव और बेचैनी बढ़ने जैसी समस्या आ सकती हैं।

एंडोर्फिंस हैं नैचुरल पेन किलर

इसे नैचुरल पेन किलर कहा जाए, तो गलत नहीं होगा। ये हार्मोन लेबर औऱ तनाव से जुड़े दर्द को कम करने में मदद करता है। योगा और व्यायाम के जरिए इस हार्मोन की मात्रा को बढ़ाया जा सकता है। मगर गर्भावस्था में ऐसा कुछ भी करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

प्रोलेक्टिन जरूरी है इम्यून सिस्टम के लिए

इसे लेक्टोजेनिक हार्मोन भी कहा जाता है। ये मस्तिष्क की पीयूष ग्रंथि में बनता है। इस हार्मोन की वजह से लेक्टेशन यानी दूध पिलाना आसान होता है और ये महिला के इम्यून सिस्टम को भी दुरुस्त रखने में मददगार है।

रिलेक्सिन लाता है लचीलापन

ये हार्मोंस आपके लिगामेंट्स को लचीला बनाता है ताकि आपका बच्चा आपके भीतर आसानी से बढ़ सके। इसी हार्मोन की वजह से कुछ महिलाओं के पैर भी प्रेगनेंसी के दौरान आकार में कुछ बड़े हो जाते हैं या सूज जाते हैं।

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परिचय- लेखिका, दिल्ली में रहने वाली पत्रकार हैं। उपरोक्त उनके निजी विचार और अनुभव हैं

पार्ट-2 तब गेहूं और जौ पर होता था प्रेगनेंसी टेस्ट, लंबा है मां बनने के फैसले से जुड़ी आजादी का इतिहास

पार्ट-1 'बच्चा नहीं हो रहा, जरूर कुछ कमी होगी' इस ताने के पीछे और आगे है एक लंबी कहानी'

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