उसने भरी पंचायत में कहा- न तो मैं अपनी 3 साल में हुई शादी मानती हूं, न जुर्माना दूंगी

Neetu SinghNeetu Singh   14 April 2017 1:33 PM GMT

उसने भरी पंचायत में कहा- न तो मैं अपनी 3 साल में हुई शादी मानती हूं, न जुर्माना दूंगीबच्चों और उनके अधिकारों की जानकारी देती अन्नू।

जब मैं ससुराल नहीं गई और पंचों ने रात एक बजे पंचायत बुलाई, मैं वहां जबरन गई और कहा कि उसे ये शादी मंजूर नहीं। पंचों से जुर्माना की बात की तो मैंने साफ कर दिया, न शादी मानती हूं न ये जुर्माना दूंगा।
अन्नू कुमारी नायक, किशनगढ़, राजस्थान

लखनऊ। पंचायत में खुद जाकर अपनी शादी रोककर अन्नू कुमारी नायक ने समाज के सामने मिसाल पेश की। इस वजह से उसे पंचों ने बिरादरी से भी निकाल दिया, फिर भी वो अब महिलाओं और किशोरियों को उनके अधिकारों के लिए आवाज उठाने के लिए प्रेरित कर रही है।

राजस्थान के ‘अखिल भारतीय नायक समाज’ की पंचायत में लड़कियों और महिलाओं का प्रवेश पूरी तरह से वर्जित है। अन्नू कुमारी नायक इस समाज की पहली वो लड़की हैं जो पंचों के बीच पंचायत में न सिर्फ गयीं बल्कि अपनी शादी भी रोकी। “जब मैं तीन साल की थी तो मेरे माँ-बाप ने मेरी शादी कर दी थी। जब मैं आठवीं में पढ़ती थी तब मुझे पता चला मेरी शादी हो गयी है और मुझे ससुराल जाना है। ये कहना है राजस्थान के अजमेर की रहने वाली अन्नू कुमारी नायक (30 वर्ष) का, “ मैं पढ़ना चाहती थी पर ससुरालवालों ने पंचायत बिठाकर ये फरमान जारी कराया कि मैं पढ़ाई छोड़कर ससुराल जाऊं।

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जब मेरे घरवालों ने मना किया तो पंचों ने मोटी रकम का जुर्माना लगाया और हमें हमारी बिरादरी से बाहर निकाल दिया गया।” राजस्थान के अजमेर जिले से 29 किलोमीटर दूर किशनगढ़ शहर के आजादनगर मदनगंज मोहल्ले की रहने वाली अन्नू कुमारी नायक नौ बहनें और एक भाई है। अन्नू नवें नम्बर की है और भाई इनसे छोटा है।

अन्नू ने गाँव कनेक्शन को फ़ोन पर बताया, “ज्यादा बहनें होने की वजह से एक साथ शादी हो जाए जिससे ज्यादा खर्चा न हो इसलिए मेरी पांच बड़ी बहनों की शादी एक साथ एक मंडप के नीचे कर दी गयी, उस समय मेरी सबसे बड़ी बहन 10 वर्ष की थी बाकी सब छोटी थी, शादी के चार पांच साल बाद जब वो ससुराल चली गयी तो छठे नम्बर की बहन की शादी की बात आयी।”

वो आगे बताती हैं, “दोबारा भी यही हुआ कि एक साथ शादी कर दी जाए, पर मै उस समय तीन वर्ष की थी, उस समय तीन बहनों की शादी एक साथ होने की बात हुई पर तीन अंकों को अशुभ मानने की वजह से मेरी भी शादी तय कर दी गयी, एक ही मंडप के नीचे चारों बहनों की शादी हो गयी, जब मै मंडप में बैठी थी तब मेरी उम्र तीन साल की थी।”

अन्नू के माँ-बाप एक सूती कपड़ा फैक्ट्री में काम करते थे, कुछ वर्षों पहले फैक्ट्री बंद हो गयी तो दूसरों के यहाँ मजदूरी करने लगे, माँ अभी बीमार है जिससे वो मजदूरी करने नही जा रही है, पापा अभी भी सब्जी का ठेला लगाते हैं। अन्नू का कहना है, “जब मै आठवीं में थी तो ससुराल वाले लेने आये, उनका कहना था उनके घर में कोई काम करने वाला नहीं है इसलिए बहू को विदा कर दो, पहली बार मेरी माँ ने विरोध किया और बोली, ‘मेरी बेटी अभी छोटी है, जब वो पढ़ जायेगी तब भेजेंगे।”

“हमारे यहाँ का नियम है शादी के बाद अगर लड़की पढ़ाई कर रही है और वो फेल हो जाती है तो उसे ससुराल जाना पड़ेगा और वो आगे की पढ़ाई नहीं कर सकती हैं, जब मैं दसवीं में थी ससुराल वाले चाहते थे मैं फेल हो जाऊं और ससुराल चली जाऊं, पर ऐसा हुआ नहीं। मैं पास हो गयी और आगे पढ़ना चाहती थी, “अन्नू ने आगे बताया, “जब मै इंटर में थीउस वक्त ‘अखिल भारतीय नायक समाज’ की एक बहुत बड़ी पंचायत बैठी, पापा को बुलावा आया, जब पापा पंचायत में जा रहे थे मैंने उनसे सिर्फ इतना बोला कि पापा मै स्नातक पूरा करने के बाद ससुराल चली जाऊंगी।“

‘अखिल भारतीय नायक समाज’ की पंचायत में जब अन्नू के पिता ने ये कहा कि वो अपनी बेटी को तीन साल और पढ़ाना चाहते हैं तब तक वो 18 वर्ष की हो जाए उसे विदा कर दिया जाएगा। पंचों ने अन्नू के पिता को बहुत बुरा-भला कहा और ये फरमान जारी किया की जब तक ये अपनी बेटी को पढ़ाएंगे तब तक इन्हें नायक समाज से बाहर किया जाता है, कोई इनके घर नहीं जाएगा, और न ही समाज के किसी कार्यक्रम में इन्हें शामिल किया जाएगा।

तीन वर्षों तक परिवार को समाज में शामिल नहीं किया गया। इस दौरान अन्नू की मुलाकात अजमेर में काम कर रही एक सरकारी संस्था ‘महिला जन अधिकार समिति’ के साथियों से मुलाकात हुई जो महिला सशक्तिकरण के लिए काम कर रही थी, अन्नू ने यहाँ काम करना शुरू कर दिया। अन्नू अब पहले की तरह कमजोर नहीं थी, महिलाओं का एक समूह इनके साथ था, जब तीन साल बाद एक बड़ी पंचायत बैठी जिसमें अन्नू के ससुराल जाने का फैसला तय होना था। अन्नू बताती हैं, “पंचों को पता था मैं एक संस्था में काम कर रही हूँ, मेरे साथ महिलाओं का एक समूह है, हम कुछ बवाल न करे इसलिए पंचों ने बैठक रात के एक बजे रखी जिसमे मेरे पिता को बुलाया गया, पापा ने मुझे जाने से मना किया पर मैं पापा के पीछे-पीछे चली गयी, पंचायत में लड़की या महिला का जाना सख्त वर्जित है, मुझे देखकर पंचों ने कहा तुम घर जाओ तुम्हारे पापा से बात कर लेंगे।“

अन्नू के साथ कुछ महिलाएं भी इस बैठक में गयी थी ऐसा पहली बार हुआ था जब महिलाएं पंचों की बैठक में गयी हो, अन्नू से जब पंचों ने उनकी मर्जी पूछी तो अन्नू ने कहा, “वो ये शादी तोड़ती है और उस लड़के के साथ नहीं रहना चाहती है।“ पंचों ने कहा, “अगर तुम शादी तोड़ती हो तो मोटी रकम देने को तैयार रहना, अन्नू ने कहा, “न वो पैसा देगी न ही उस लड़के के साथ रहेगी, मेरा इतना कहना पंचों के लिए बहुत बड़ा अपमान था।“

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