ग्रामीण महिलाएं बन रही आत्मनिर्भर  

Neetu SinghNeetu Singh   2 July 2017 7:58 PM GMT

ग्रामीण महिलाएं बन रही आत्मनिर्भर  अगर उन्हें मौके मिले तो आर्थिक रूप से हो सकती हैं सशक्त

नीतू सिंह/स्वाति शुक्ला, स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। ग्रामीण महिलाओं और किशोरियों को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए नि:शुल्क ब्युटीशियन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ब्युटीशियन प्रशिक्षण केंद्र खुलने से गाँव की महिलाएं यहां सीखकर खुद का रोजगार शुरू करेंगी।

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लखनऊ जिला मुख्यालय से लगभग 18 किलोमीटर दूर सरोजनी नगर ब्लॉक के जगतखेड़ा कल्ली पश्चिम में महिलाओं एवं किशोरियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक गैर सरकारी संस्था ‘एन्जिस्ल फ्रैन्ग्रेसा एंड एंजिल्स आफ़ नीडी’ ने तीन साल पहले ग्रामीण महिलाओं की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एलोवेरा ब्यूटी सेंटर खोला गया है।

अगर उन्हें मौके मिले तो आर्थिक रूप से हो सकती हैं सशक्त

विश्व स्वास्थ्य संगठन की स्टेट क्वार्डिनेटर रश्मि शुक्ला बताती हैं, "यहां पर संस्था अच्छा काम कर रही है। हमलोग यहां पर देख रहे है कि क्या कर सकते हैं। एक दो लड़कियों को कम्प्यूटर सेंटर की सुविधा दी जाएगी। महिलाएं आगे बढ़ना चाहती है हम लोग उनकी मदद करेंगे।"

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इस केंद्र पर सिलाई सीख रहीं सुधा यादव (23 वर्ष) कहते हैं, “हमलोग पढ़ लिख तो गये हैं पर नौकरी मिलना इतना आसान कहाँ है, इस केंद्र के खुलने से हमने ब्युटीशियन का पूरा कोर्स सीख लिया है, अगर खुद का पार्लर खोलेंगे तो अपने जरूरी खर्चे निकाल पाएंगे, यहां रोजगार का कोई साधन नहीं है, हम लोग पढ़ लिखकर भी बेरोजगार रहते हैं।”

ब्युटीशियन प्रशिक्षण केंद्र खुलने से गाँव की महिलाएं यहां सीखकर खुद का रोजगार शुरू करेंगी।

तीन हजार आबादी वाले इस गाँव की महिलाएं कुछ करना चाहती हैं और आगे बढ़ना चाहती हैं पर उन्हें रोजगार के कोई मौके नहीं मिलते हैं इस वजह से वो आर्थिक रूप से सशक्त नहीं हो पाती हैं। संस्था की संचालिका अनु पाण्डेय का कहना हैं, “हमारी कोशिश है महिलाएं आत्मनिर्भर बने इसी लिए यहाँ पर ये केंद्र खोला गया है, 25 लोगों को प्रशिक्षण निशुल्क दिया गया है, अब तक सैकड़ों महिलाओं को हम ट्रेनिग दे चुके हैं, कुछ लड़कियों को सिखाने के बाद अपने ही सेंटर पर नौकरी दे देते हैं।” इसकी फाइनेंस संचालिका मुक्ति मिश्रा बताती हैं, “इस गाँव से हमे बहुत लगाव है यहां की महिलाएं बहुत मेहनती हैं इस गाँव को बेहतर सुविधाएं हम मुहैया करा पायें ये हमारी कोशिश है, आने वाले समय में हम इसे गोद लेने की प्लानिंग बना रहे हैं।”

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ट्रेनिंग सेंटर पर प्रशिक्षण दे रही नीलम सिंह बताती हैं, “अगर ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को मौका मिले तो वो जरुर आगे बढ़ें, इनमे कुछ भी सीखने की बहुत ललक रहती है, गाँव में ही सेंटर खुलने से इन्हें दूर नहीं जाना पड़ता है ये गाँव में ही रहकर सीख पा रही हैं।” इस केंद्र पर सिलाई सीख रही विनीता शर्मा (18 वर्ष) बताती हैं, “ग्रेजुवेशन की पढ़ाई के लिए 20-25 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है, कुछ सीखने के लिए घर के लोग इतनी दूर नहीं भेजेंगे, ये सेंटर पास में है तो सीखे ले रहे हैं, दूर होता तो मुश्किल होता, एक बार सीख गये अब तो ये सीख गये हैं ये तो कभी भी काम आ जायेगा।”

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