महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान बढ़ जाती है थायराइड की समस्या

Shrinkhala PandeyShrinkhala Pandey   30 Dec 2017 5:51 PM GMT

महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान बढ़ जाती है थायराइड की समस्याथायराइड महिलाओं में ज्यादा।

भारतीय महिलाएं अपनी सेहत को लेकर लापरवाह होती हैं। वो कई सारी बीमारियों को दबाये रहती हैं जो आगे चलकर बड़ी समस्या में बदल जाती है। इसी तरह की एक बीमारी है थायराइड जो पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में ज्यादा होती हैं, खासकर गर्भावस्था के दौरान क्योंकि इस समय महिलाओं में कई हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिसके चलते कई बार गर्भपात की स्थिति भी आ जाती है।

थायराइड मेटाबालिज्म से जुडी बीमारी है।जिसमें थायराइड हार्मोन का स्राव असंतुलित हो जाता है और शरीर की अंदर की कई क्रियाओं में भी गड़बड़ी हो जाती है। एक हेल्थ जर्नल के अनुसार भारत में चार करोड़ से अधिक थायराइड के मरीज हैं। इनमें से नब्बे प्रतिशत यह नहीं जानते कि उन्हें थायराइड की बीमारी है जिसके कारण उन्हें तरह-तरह की शारीरिक परेशानियां हो रही हैं।

इस बारे में लखनऊ की महिला रोग विशेषज्ञ डॉ नैनी टंडन बताती हैं, “थायराइड पुरूषों की तुलना में महिलाओं को कई गुना ज्यादा है। हर दस थायराइड मरीजों में से आठ महिलाएं ही होती हैं। जिन महिलाओं को मोटापा, डिप्रेशन, कोलेस्ट्राल, अर्थराइटिस की परेशानियां होती हैं उनमें थायराइड होने की संभावना ज्यादा होती है लेकिन उन्हें इसकी जानकारी नहीं होती।”

थायराइड शरीर का एक प्रमुख एंडोक्राइन ग्रंथि है जो तितली की तरह होता है ये गले में होता है जिसमें से थायराइड हार्मोन का स्राव होता है जो हमारे मेटाबालिज्म की दर को संतुलित करता है। इसके अंसतुलन से ही थायराइड की समस्या हो जाती है।

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डॉ टंडन बताती हैं, “थायराइड में होने वाली समस्याओं को ज्यादातर महिलाएं आम समस्याएं समझ कर नजरअंदाज कर देती हैं जैसे मोटापा बढ़ना, तनाव, हाथ पैर में सूजन आदि। ये समस्या खून में थायराइड की जांच कराने से पता चलती है।” थायराइड भी दो प्रकार का होता है, पहला हाइपोथायराइड एवं दूसरा हायपरथायराइड।

हाइपोथायराइड

इस बीमारी में वजन अचानक से बढ़ने लगता है और व्यक्ति रोज के कामकाजों में रुचि नहीं लेता है। महिलाओं में माहवारी अनियमित हो जाती है। जोड़ों में पानी भर जाता है जिससे पैरों में सूजन आ जाती है। यह 30 से 60 वर्ष की महिलाओं में ज्यादा होता है।

गर्भावस्था में बढ़ती है ये परेशानी।

हायपरथायराइड

इस बीमारी में वजन अचानक से कम होने लगता है। ऐसे व्यक्तियों को गर्मी नहीं बर्दाश्त होती है। इसमें मांसपेशियां कमजोर हो जाती है और पीड़ित महिलाओं के प्रजनन शक्ति पर भी असर पड़ता है। महिलाओं में मासिक रक्तस्राव ज्यादा एवं अनियमित हो जाता है। ये बीमारी बीस साल की महिलाओं में ज्यादा होती है। गर्भपात के मामले ऐसी महिलाओं में बढ़ जाते हैं।

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जांच व उपचार

थायराइड में रक्त की जांच पहले की जाती है। रक्त में टी थ्री, टी फोर एवं टी एस एच लेवल में सक्रिय हार्मोन्स का लेवल जांच से पता चलते हैं। गर्भावस्था में महिलाओं की थायराइड की जांच जरूर की जाती है। मरीजों को आयोडीन की अधिकता वाले खाद्य पदार्थ को खाने से बचना चाहिए।

क्या खाएं

  • हल्दी दूध: आप रोजाना दूध में हल्दी को पका कर पिए। अगर हल्दी वाला दूध न पिया जाये तो हल्दी को भून कर इसका सेवन करे।
  • लौकी का जूस: रोजाना सुबह खली पेट लौकी का जूस पिने से भी थाइराइड खत्म करने में मदद मिलती है। जूस पीने के आधे घंटे तक कुछ खाएं पिए नहीं।
  • तुलसी और एलोवेरा: दो चम्मच तुलसी के रास में आधा चम्मच एलोवेरा जूस मिला कर पीने से भी फायदा मिलता है।
  • बादाम और अखरोट: बादाम और अखरोट में सेलीनीयम तत्व मौजूद होता है जो थायराइड के इलाज में फायदा करता है। इस के सेवन से गले की सूजन से भी आराम मिलता है।
  • नियमित व्यायाम करने से भी थायराइड नियंत्रित रहता है।

ये न खाएं: थायराइड होने तम्बाकू, सिगरेट या किसी नशीले पदार्थो के सेवन से बचे। सफेद नमक खाने से बचें।

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