छात्राओं ने खेल-खेल में सीखा, कैसे रखें माहवारी के दिनों में अपना ख्याल

Neetu SinghNeetu Singh   25 Feb 2018 2:59 PM GMT

छात्राओं ने खेल-खेल में सीखा, कैसे रखें माहवारी के दिनों में अपना ख्यालरंग-बिरंगे कार्ड को देखकर छात्राओं की माहवारी विषय को लेकर टूटी चुप्पी।

पिथौरागढ़ (गंगोलीहाट)। दसवीं में पढ़ने वाली कल्पना ने जब खड़े होकर धीमे से कहा, "माँ कहती है कि अलग होने (पीरियड) पर सफेद चीजें और खट्टा-मीठा नहीं खाना चाहिए।" कल्पना की इस बात की स्कूल की सभी छात्राओं ने अपने चेहरे के हाव-भाव से सहमति जताई।

कल्पना ने जो बताया वो बात पिथौरागढ़ जिले के लिए कोई नई बात नहीं थी। जागरूकता के अभाव में यहां माहवारी को लेकर तमाम तरह के मिथक और भ्रांतियां हैं। इन मिथक और भ्रांतियों को दूर करने के लिए पिथौरागढ़ प्रशासन के सहयोग से गाँव कनेक्शन फॉउंडेशन ने 12-21 फरवरी तक जिले के 16 राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में माहवारी एवं स्वच्छता प्रबंधन पर एक खास मुहिम चलाई थी।

इस मुहिम का मुख्य उद्देश्य था कि स्कूल में पढ़ने वाली छात्राओं को माहवारी शुरू होने से लेकर पैड निस्तारण तक की पूरी प्रक्रिया के बारे में सही जानकारी हो, जिससे वह माहवारी के दिनों को सुविधापूर्वक जी सकें।

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इन छात्राओं ने पहाड़ी सरस्वती वन्दना प्रस्तुत की

अभियान के इसी क्रम में 19 फरवरी को पिथौरागढ़ जिले के गंगोलीहाट ब्लॉक के राजकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय तामानौली में गाँव कनेक्शन फॉउंडेशन से माहवारी एवं स्वच्छता प्रबंधन की ट्रेनर श्वेता मिश्रा ने यहां की छात्राओं को खेल-खेल में तमाम मिथकों को दूर करने की कोशिश की।

श्वेता ने बताया, "माहवारी हर लड़की को 9 से 13 वर्ष के बीच शुरू होने वाली हर महीने की प्रक्रिया है। एक महीने में माहवारी के दिनों में सामान्यता हर लड़की और महिला को 35 से 50 एमएल खून दो से सात दिनों के चक्र में निकलता है। हर छात्रा को इन दिनों कुछ भी खाने की मनाही नहीं है,केवल ये ध्यान रखें जो भी आप खा रहे हैं उसमें प्रोटीन और विटामिन्स जरूर हों।"

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एक छात्रा ने बताया कि हमारी मम्मी माहवारी में नहीं बनाती हैं खाना

श्वेता ने आगे कहा, "पहाड़ी क्षेत्र होने की वजह से हर दिन आपको कई किलोमीटर पहाड़ियों से पैदल उतरकर स्कूल आना पड़ता है।जब आप इतनी मेहनत करते हैं ऐसे में आपका खान-पान अच्छा होना चाहिए। अगर आप माहवारी और सामान्य दिनों में भी खान-पान का ध्यान नहीं रखेंगें तो शरीर में आयरन और कैल्शियम की कमी हो जाएगी, जिससे कमजोरी, खून की कमी, चिड़चिड़ापन और तमाम तरह की बीमारियां होने की संभावना हो सकती है।"

श्वेता ने छात्राओं को कई रंग-बिरंगे कार्ड दिए जिसमें कुछ चित्र बने हुए थे। इन चित्रों में ये दिखाया गया था कि माहवारी के दिनों में किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

इन रंग-बिरंगे कार्ड को देखकर छात्राओं की माहवारी विषय को लेकर चुप्पी टूटी। चित्रों को देखकर ये छात्राएं ये बता पा रही थी कि माहवारी के दिनों में जिस कपड़े का इस्तेमाल करें वो साफ़-सुथरा धूप में सूखा हुआ हो। कपड़ा या पैड निस्तारण के लिए उसे कहीं भी ऐसे न फेंके उसको गड्ढा खोदकर निस्तारण करें। माहवारी के दिनों में नहाने से लेकर अचार छूने और खाना बनाने के साथ पूजा तक सब काम किया जा सकता है इसमें कोई मनाही नहीं है।

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छात्राओं ने हाथ उठाकर अपनी सहमति जताई कि वो माहवारी के बारे में अपनी छोटी बहनों को जरुर बताएंगी

जब इन कार्ड के द्वारा छात्राओं से अच्छी दोस्ती हो गयी तो स्कूल की एक छात्रा मीनाक्षी ने पूछा, "पीरियड के समय हमारे पेट में बहुत दर्द होता है।" दूसरा सवाल प्रिया ने पूछा, "हमारी सहेली की माहवारी कभी एक महीने पर होती है, कभी डेढ़ तो कभी दो महीने पर इससे वह परेशान रहती है।"

श्वेता ने इन सवालों के जवाब में छात्राओं को पेट और कमर के व्यायाम साथ ही गर्म पानी की थैली या बोतल से पेट की सिकाई करने को बोला। अनियमित माहवारी के लिए डॉ को दिखाने की सलाह दी। श्वेता ने कहा, "अगर आप घर में चने के बराबर गुड़ मसूर की दाल के बराबर चूना तीन से चार महीने लगातार खाते हैं तो अनियमित माहवारी और पेट दर्द में आराम मिलेगा। गुड़ में आयरन और चूने में कैल्शियम की मात्रा होने की वजह से शरीर में कैल्शियम और आयरन की भी पूर्ति होगी।"

बाल विकास परियोजना अधिकारी हेमा कुंवर बच्चों को सरकारी योजना की जानकारी देती हुई

कार्यक्रम में उपस्थित बाल विकास परियोजना अधिकारी हेमा कुंवर ने कहा, "आशा करते हैं जो आपको माहवारी पर जानकारी मिली है ये बातें आप अपनी छोटी बहनों को भी बताएंगे।इसके साथ ही अपने आसपास हो रहे बाल विवाह को आप रोकेंगे या फिर उसकी सूचना 1090 पर फोन करके जरूर बताएं।"

विद्यालय की प्रधानाचार्या नीता पंत ने खुश होकर कहा, "आज हमें ये देखकर खुशी हुई कि इतनी भीड़ में थोड़ा बहुत ही सही पर हमारे स्कूल की छात्राओं ने इस विषय पर बात की।"

कार्यक्रम में बाल विकास परियोजना की सुपरवाइजर शारदा धामी, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम ज्योति कफलिया,गुंजन तिवारी,ग्रामीण महिलाओं सहित विद्यालय परिवार शामिल रहा।

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इस चित्र में बताया गया कि सेनेटरी नैपकीन कूड़ेदान में ही डाले

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