Neetu Singh

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Swayam Desk


  • डकैत ददुआ से लोहा लेने वाली 'पाठा की शेरनी' बेरोजगारी से हार रही...

    चित्रकूट। ददुआ जो बोलता था, वह चित्रकूट के लोग करते थे। चंबल के इस खूंखार डकैत के खिलाफ बोलने की हिम्मत किसी में नहीं थी, लेकिन इसी इलाके की रामलली (50 वर्ष) ने ददुआ के खिलाफ आवाज ही नहीं उठाई, बल्कि उसके खिलाफ विद्रोह भी किया। लेकिन आज रामलली चित्रकूट छोड़ना चाहती हैं। वजह उनके पास कोई रोजगार नहीं...

  • इन ग्रामीण महिलाओं को मिली अपने नाम की पहचान, हर कोई इन्हें अब इनके नाम से है जानता

    रामगढ़ (झारखंड)। वर्षों से चाहरदीवारी के अन्दर सीमित रहने वाली महिलाओं ने जब चौखट के बाहर कदम निकाला तो उनके अपने ही विरोध करे लगे। ये अपनों की चुनौतियां और समाज के ताने सुनती रहीं, पतियों की मार सहती रहीं पर सखी मंडल की बैठक में जाना बंद नहीं किया। किसी की पत्नी, माँ और बहन के नाम से जानी जाने...

  • IIM टॉपर ने पहले दिन बेची थी 22 रुपए की सब्जियां, आज करोड़ों में है टर्नओवर

    एमबीए करने के बाद ज्यादातर लोग किसी कंपनी में मैनेजर बनते हैं। और जब किसी ने आईआईएम अहमदाबाद जैसे संस्थान से गोल्ड मेडल हासिल किया हो तो उसके लिए बहुत आसान था कि वो किसी कंपनी का सीईओ बन जाता लेकिन...स्वयं प्रोजेक्ट डेस्कखेत से आपकी कॉलोनी तक आते-आते सब्जियां इतनी महंगी क्यों हो जाती हैं, ये सवाल...

  • ये महिलाएं हैं पशु सखियां, करती हैं बकरियों का इलाज

    रांची (झारखंड)। बासमती चोड़ा सुबह साढ़े पांच बजे लाल बार्डर में आसमानी रंग की साड़ी पहनकर अपनी साइकिल में दवाइयों से भरे दो बैग टांगकर आसपास के गाँव में निकल पड़ती हैं। तीन चार घंटे में ये आसपास बीमार हुई बकरियों का इलाज करके वापस आ जाती हैं। बकरियों की असमय मौत को रोकने के लिए झारखंड की महिलाएं...

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