नहरें बेपानी, किसान परेशान

नहरें बेपानी, किसान परेशानगाँव कनेक्शन

इटवा (सिद्धार्थनगर)। स्थानीय तहसील क्षेत्र के सरयू नहर खण्ड तृतीय में पानी नहीं आने से इसके आस-पास के किसानों को लाभ नहीं मिल पाता है। किसानों की इस समस्या से जिम्मेदार अधिकारी संवेदनहीन बने हुए हैं।

तहसील क्षेत्र के उत्तरी सीमा पर किसानों को फसलों की सिंचाई के लिये उतरौला पम्प नहर प्रणाली की सरयू नहर खण्ड तृतीय तथा इसकी शाखा पकरैला माइनर में जून 2015 से पानी नहीं आया है। इटवा विकास खण्ड के ग्राम महादेव निवासी तथा भारतीय किसान यूनियन इटवा इकाई के ब्लाक अध्यक्ष 45 वर्षीय अब्दुल रहीम ने बताया, ''जून 2015 से दोनों नहरों में पानी नहीं आया है। हम लोगों ने बोरिंग चलाकर धान की फसल उगायी। जहां पानी की सुविधा नहीं थी। वहां की फसल सूख गयी। गेहूं की बुवाई में पानी की आवश्यकता है। नहर में पानी उसी समय आता है जब इसकी आवश्यकता नहीं होती उल्टे फसलों का नुकसान होता है।" महादेव गाँव के विश्वनाथ (50 वर्ष) तथा कल्लन (45 वर्ष)  ने बताया, ''पिछले वर्ष गेहूं बुवाई के एक माह बाद अचानक नहर में पानी आ गया। रबी की सारी फसल बेकार हो गयी। गेहूं में दाना लेने के समय पानी की आवश्यकता होती है तब पानी नहीं आता है।" किसानों के अनुसार यदि बड़ी नहर में समय से पानी आ जाये तो बिशुनपुर, सोन नगर, खानकोट, सेमरी, सेमरा बिशुनपुर, कम्हरिया, केसारे, बैरिहवा, रेहरा, बेलबनवा, बनदुआरी, पटना सहित नहर के आस पास के कई दर्जन गावों के फसलों की सिंचाई हो सकती है।

इसी प्रकार पकरैला माइनर से संग्रामपुर, चौखडिया, महादेव, तकियवा, पटना, गौरा पकरैला, सुहियावा, मंगुवा, सिसवा आदि गावों के किसान अपने फसलों की सिंचाई करके इसका लाभ उठा सकते हैं। इस सम्बंध में अधिशासी अभियन्ता सरयू नहर खण्ड तृतीय एस.एन. शर्मा ने बताया, ''पानी टेल तक गया था। बीच में पानी का संकट था। उस समय कुछ सशक्त किसानों ने बंधा बना कर पानी काट लिया था। मैं जिगना पुलिस को लेकर बंधा काट कर पानी छोड़वाया हूं। नवम्बर के अन्त तक दोबारा पानी नहर में छोड़ा जायेगा।"

रिपोर्टर - निसार अहमद खान

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