नीलगाय शिकार के मुद्दे पर भिड़े दो केंद्रीय मंत्री

नीलगाय शिकार के मुद्दे पर भिड़े दो केंद्रीय मंत्रीgaonconnection

पटना। बिहार के मोकामा में 200 नीलगायों की गोली मारकर हत्या के मामले में केंद्र के दो मंत्री आमने-सामने आ गए हैं। हालांकि बिहार के इस क्षेत्र के किसानों का कहना है कि यह अच्छा कदम है, खेती छोड़ चुके किसान, दोबारा फसल बो पाएंगे।

बृहस्पतिवार को महिला एवं बाल कल्याण मंत्री मेनका गांधी ने आरोप लगाया कि पर्यावरण मंत्रालय हर राज्य को चिट्ठी लिखकर पूछ रहा है कि किस जानवर को मारना है, वह आदेश दे देगा। वहीं जावड़ेकर का कहना है कि जानवरों के हाथों फसल खराब होने से परेशान किसानों ने इसकी मांग की थी, जिसके बाद जानवरों को मारने की अनुमति दी गई है।

इस मसले में किसानों की राय अलग है। पटना जिले के मोकामा ब्लॉक में रहने वाले किसान सदन सिंह (55 वर्ष) बताते हैं, “लगभग चार दिन पहले पांच नीलगाय को मरे पड़े देखा था जब पता चला कि इनको मारने का आदेश दिया गया है, तो इलाके के सभी किसान खुश थे। नीलगायों को मारना हम किसानों के लिए बहुत बड़ा वरदान है सरकार का”।

सदन आगे कहते हैं, “हम जब हम फसल बोते हैं तो नीलगाय से 50 फीसदी हिस्सा खराब होना है इस बात का हमको पता रहता है चाहे कितनी भी सुरक्षा कर लो”। सदन सिंह ने कहा कि उनके यहां बहुत से किसानों ने नीलगाय के चलते खेती करना छोड़ दिया था, अब वो दोबारा खेती शुरू कर सकेंगे।

वहीं मोकामा ब्लॉक के ब्लॉक कृषि अधिकारी रवींद्र कुमार बताते हैं, “हमारे यहां 15 पंचायत है। जिले के इस इलाके में सबसे ज्यादा नीलगाय है। इन सभी पंचायतों में हर एक किसान नीलगाय से परेशान था।  सरकार का यह कदम अच्छा है जो किसान खेती छोड़ रहे हैं वो वापस खेती शुरु कर सकेंगे।”

मेनका ने कहा कि पर्यावरण मंत्रालय ने बंगाल में कह दिया कि हाथी को मारें। हिमाचल को कहा कि हाथी को मारें। गोवा में कह दिया कि मोर को। अब कोई जानवर नहीं छूटा। चांदपुर में इतना अनर्थ हो रहा है कि उन्होंने 53 जंगली सुअर मारे हैं। अभी और 50 की इजाजत दी है। इस घटना के लिए पर्यावरण मंत्रालय जिम्मेदार है।

इस पर पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने प्रतिक्रिया में कहा कि कानून के आधार पर किसान की फसल का नुकसान होता है और राज्य सरकार प्रस्ताव देती है तो हम राज्य सरकार को मंजूरी देते हैं। ये केंद्र सरकार का नहीं, राज्य सरकार का काम है। इसके लिए पहले से ही कानून बना हुआ है।

बिहार ने राज्य में नीलगाय के कारण किसानों की फसलों की होने वाली तबाही को गवाही बनाते हुए उनकी संख्या पर नियंत्रण करने के लिए पर्यावरण मंत्रालय से नीलगायों को मारने की अनुमति मांगी थी। मंत्रालय ने इसी साल राज्य को मंजूरी दे दी थी।

हालांकि नीलगायों को मारने के लिए अनुमति मांगने वाला बिहार पहला राज्य नहीं है, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र भी इस दिशा में सख्त़ कदम उठा चुके हैं। उत्तराखंड और यूपी भी इन जीवों के ज़रिए फसलों को होने वाले नुकसान से जूझ रहे हैं।

More Stories


© 2019 All rights reserved.

Top