निर्यात शुल्क लगने से सस्ती हुई चीनी

निर्यात शुल्क लगने से सस्ती हुई चीनीgaonconnection

नई दिल्ली ( भाषा)। सरकार के चीनी के निर्यात पर सीमाशुल्क लगाने के फैसले के कारण कारोबारी अपने सौदों की कटान करने में लग गए, जिससे वायदा कारोबार में चीनी की कीमत 21 रुपए की गिरावट के साथ 3,727 रुपए प्रति क्विंटल रह गई।

एनसीडीईएक्स में चीनी के अक्टूबर डिलीवरी वाले अनुबंध की कीमत 21 रुपए अथवा 0.56 प्रतिशत की गिरावट के साथ 3,727 रुपए प्रति क्विंटल रह गई जिसमें 11,930 लॉट के लिए कारोबार हुआ। इसी प्रकार चीनी के जुलाई डिलीवरी वाले अनुबंध की कीमत नौ रुपए अथवा 0.25 प्रतिशत की गिरावट के साथ 3,617 रुपए प्रति क्विंटल रह गई जिसमें 36,570 लॉट के लिए कारोबार हुआ।  

बाजार विश्लेषकों ने कहा कि घरेलू बाजार में चीनी की घरेलू आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए सरकार के द्वारा चीनी के निर्यात पर 20 प्रतिशत का सीमाशुल्क लगाने के फैसले के बाद यहां वायदा कारोबार में कारोबारी धारणा प्रभावित हुई। वर्मा ने कहा कि पिछले साल के 70 लाख टन के बचे स्टॉक के कारण विपणन वर्ष 2016-17 में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता होगी। उन्होंने कहा कि चीनी पर 20 प्रतिशत के निर्यात शुल्क के कारण चीनी सत्र 2017-18 के लिए पर्याप्त स्टॉक उपलब्धता सुनिश्चित होगी।

दुनिया में ब्राजील के बाद चीनी का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। चीनी विपणन वर्ष 2015-16 में अभी तक करीब 16 लाख टन चीनी का निर्यात होने का अनुमान है। भारत का चीनी उत्पादन विपणन वर्ष 2015-16 में घटकर 2.5 करोड़ टन रहने का अनुमान है। पिछले वर्ष उत्पादन 2.83 करोड़ टन का हुआ था। चीनी की घरेलू मांग 2.6 करोड़ टन है। विपणन वर्ष 2016-17 के लिए सरकार ने उत्पादन में गिरावट आने और उत्पादन 2.3 से 2.4 करोड़ टन रहने की भविष्यवाणी की है हालांकि सरकार ने कहा है कि पिछले साल के बचे हुए स्टॉक को देखते हुए बाजार में चीनी आपूर्ति तीन से 3.1 करोड़ टन की रहेगी और इसमें कोई कमी नहीं होगी। 

चीनी मिलों के प्रमुख संगठन, भारतीय चीनी मिल संघ (इस्मा) ने कहा कि चीनी पर 20 प्रतिशत निर्यात शुल्क लगाने से इसका चीनी का निर्यात वित्तीय दृष्टि से अव्यावहारिक हो गया है लेकिन इससे घरेलू मांग पूरा करने के लिए देश में इसका स्टॉक समुचित स्तर पर बनाए रखने में मदद मिलेगी। सरकार ने चीनी के दामों में तेजी के बीच इस पर 20 प्रतिशत निर्यात शुल्क लगाने का निर्णय जारी किया। पिछले कुछ महीने में वैश्विक कीमतों में भारी तेजी से इसक निर्यात आकर्षक हो गया था।

इस्मा के महानिदेशक अविनाश वर्मा ने एक बयान में कहा, “ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार अगले चीनी सत्र 2016-17 (अक्तूबर से सितंबर) में चीनी उत्पादन में कमी होने की संभावना के मद्देनजर घरेलू स्तर पर चीनी का स्टॉक बचाए रखना चाहती है।” उन्होंने कहा, “वैश्विक कीमतों में हालिया तेजी से भारत से चीनी का निर्यात अब जा कर लाभप्रद होने जा रहा था लेकिन 20 प्रतिशत के निर्यात शुल्क के कारण, जो करीब 100 डॉलर प्रति टन बैठता है, निर्यात अव्यावहारिक हो जायेगा।”

  

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