नसबन्दी कराने में महिलाएं ज़्यादा जागरूक

Swati ShuklaSwati Shukla   14 July 2016 5:30 AM GMT

नसबन्दी कराने में महिलाएं ज़्यादा जागरूकजागरूक महिलाएं.प्रदेश में नसबंदी

लखनऊ। प्रदेश में जनसंख्या लगातार बढ़ती जा रही है, इसके बावजूद भी पुरुषों ने नहीं महिलाओं ने इसकी गंभीरता को समझा है तभी तो प्रदेश में नसबंदी के मामलों में पुरुषों के मुकाबले महिलाएं ज़्यादा जागरूक हैं। एनआरएचएम के आंकड़ों के मुताबिक यूपी में 60 महिलाओं पर एक ही पुरुष नसबंदी करा रहा है।

एनआरएचएम की वर्ष 2015-16 की रिपोर्ट के अनुसार अभी तक 2,59,613 महिलाओं ने नसबन्दी करवाई है और पुरुषों की संख्या 3101 है। रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि लखनऊ, कानपुर, वाराणसी और झांसी में प्रति महिला बच्चों की संख्या दो से तीन है।

वहीं 11 जिले ऐसे हैं जहां पर प्रजनन दर चार से पांच है। बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए विश्व जनसंख्या दिवस पर प्रदेश में पखवाड़ा चलाया जा रहा है। 

बाराबंकी के जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर दूर देवा ब्लॉक के दरियालपुर गाँव की रहने वाली आशा बहू शशी देवी बताती हैं, “नसबन्दी के लिए गाँव के पुरुष बात करना भी पसन्द नहीं करते है। महिलाएं अगर नसबन्दी करवाना चाहती हैं तो उनको अपने पति और सास से की सहमति लेनी पड़ती है। इसलिए भी बहुत समस्या होती है। महिला के साथ-साथ उनके परिवार की भी काउन्सिलिंग करनी पड़ती है। महिलाएं दो बच्चे होने के बाद भी परिवार नियोजन अपनाने से कतराती हैं।” 

एनआरएचएम की रिपोर्ट में अगले चार वर्षो के लिए कार्य योजना बनाई गई है। वर्तमान समय में प्रदेश 12.4 करोड़ लोग गर्भनिरोधक अपना रहे हैं। अभी 12.6 करोड़ लोगों को गर्भनिरोधक अपनाने से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। रिपोर्ट के मुताबिक इस समय प्रदेश में संतानोत्पत्ति वाले 20 फीसद दंपति किसी भी गर्भ निरोधक साधन का प्रयोग नहीं करते हैं। वर्ष 2020 तक इसे घटाकर 12.7 फीसद करने का लक्ष्य है, ताकि प्रदेश की जन्मदर 3.1 से घटाकर 2.1 पर पहुंचाई जा सके। 

सिप्सा के अधिशासी निदेशक आलोक कुमार बताते हैं, “तीन से अधिक जन्म दर राज्य स्तर में सबसे बड़ी चुनौती होगी। हम लगातार प्रयास कर रहे हैं कि ‘छोटे और नियोजित परिवार’ हों, इसके लिए आशा कार्यकर्ताओं को भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।”

बाक्स नसबन्दी करने वाले डॉक्टरों की कमी

प्रदेश में नसबन्दी करने वाले डॉक्टरों की कमी होने के कारण भी समस्या हो रही है। अभी तक प्रदेश में 10 ट्रेनिंग सेन्टर थे, अब 25 नये ट्रेनिंग सेन्टर खोले जाने की तैयारी स्वास्थ्य विभाग कर रहा है। विश्व जनसंख्या दिवस पर 10 ट्रेनिंग सेन्टर खोल दिए गए हैं। आगरा, इलाहाबाद, आजमगढ़, मेरठ, मुरादाबाद, मिर्जापुर, झासी, कानपुर नगर, बराणसी, में ये नये सेन्टर खोले गए हैं। 

परिवार नियोजन के लिए सरकार की योजनाएं और कार्यक्रम

परिवार नियोजन को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से योजनाएं और कार्यक्रम संचालित किये जा रहे हैं। इसमें नसबंदी पर मुआवजे की योजना, आशा कार्यकत्री द्वारा घर-घर भ्रमण कर गर्भ निरोधक साधनों का वितरण, आशा कार्यकत्री द्वारा दो बच्चों के जन्म में अंतराल रखने को सुनिश्चित करना, प्रेरक और सेवा प्रदाताओं को प्रसव के बाद कापर टी के लिए प्रोत्साहन राशि, परिवार नियोजन क्षतिपूर्ति योजना, बिना चीरा-बिना टांका पुरुष नसबंदी दिवस, कापर टी लगवाने के लिए निश्चित दिन, निश्चय किट औऱ हौसला साझेदारी आदि शामिल हैं।

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