नया जीवन: डॉक्टरों ने कटे बाज़ू को जोड़ा

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लखनऊ। लखनऊ के डॉक्टरों ने एक अनोखे प्रयास से सत्रह साल के कुलदीप को होली का तोहफा दिया। वो तोहफा था उसका हाथ, जो एक दुर्घटना में कट गया था। इस पूरी प्रक्रिया की सबसे सफल कड़ी रही, एक दूसरे से 150 किमी दूर बैठे डॉक्टरों का तालमेल।

ट्रामा सेंटर के हड्डी रोग विभाग में डॉक्टरों की एक टीम ने कई घंटों तक चले ऑपरेशन में प्लास्टिक सर्जरी विधि के ज़रिए कुलदीप का कटा हुआ हाथ वापस जोड़ दिया, और उसे अपंग होने से बचा लिया। मेडिकल दुनिया की सबसे पेचीदा तकनीकों में से एक के ज़रिए यह करिश्मा कर दिखाने वाली इस टीम का नेतृत्व हड्डी विभाग के प्रमुख प्रो़ बृजेश मिश्र ने किया।

सुल्तानपुर जिले का निवासी कुलदीप एक ऑयल मशीन वर्कर है। पंद्रह मार्च को उसका हाथ आयल मशीन पर काम करते समय, हाथ के कड़े की वजह से मशीन की बेल्ट में फंस गया और हाथ बाजू से अलग हो गया। उसे तत्काल जिला अस्पताल सुल्तानपुर ले जाया गया। जि़ला अस्पताल के चिकित्सकों ने समझदारी दिखाते हुए तुरंत बाजू में खून को रोकने के लिए टांके लगाकर कटे हुए हाथ को बर्फ में रखकर, 150 किमी दूर लखनऊ में स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज (केजीएमयू) रेफर कर दिया। 

यहां केजीएमयू में प्लास्टिक सर्जरी विभाग ने कटे हुए हाथ को जोड़ने की तैयारी पहले से पूरी कर रखी थी। रात 11 बजे से डॉ बृजेश मिश्र द्वारा हाथ का ऑपरेशन शुरू किया गया जो कि सुबह पांच बजे तक चला। ऑपेरशन के बाद कुलदीप को दो यूनिट खून भी चढ़ाया गया। 

कुलदीप की हालत अब पहले से काफी बेहतर है। कटा हुआ हाथ कैसे बच सका इस बारे में जागरूक करते हुए डॉ ब्रजेश ने कहा, “यदि अंग कट जाने पर उसे स्वच्छ पानी से धुलकर एक साफ पॉलेथिन में बर्फ के साथ लपेटकर जल्द से जल्द चिकित्सक के पास लाया जाए तो अंग को दोबारा से जोड़ना काफी हद तक संभव हो जाता है”।

रिपोर्टर - ज्योत्सना सिंह

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