न्यूमोनिया-डायरिया से महफूज़ रखता है माँ का दूध

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लखनऊ। छह महीने से पहले बच्चों को शहद या बकरी का दूध पिलाने से बच्चों को कोई लाभ नहीं होता है। छह महीने के अन्दर बच्चों को सिर्फ मां का ही दूध पिलाए, मां के दूध में इतना पानी होता है कि बच्चे को ऊपर के पानी की जरूरत ही नहीं पड़ती है यह जानकारी KGMU बाल विभाग की असिस्टेन्ट प्रोफेसर डॉ. शालीनी त्रिपाठी ने KGMU ओपीडी के बाल विभाग में आयोजित बेबी शो कार्यक्रम में दी।

KGMU की बाल विभाग ओपीडी में एक से सात अगस्त तक मनाए जा रहे स्तानपान सप्ताह के अर्न्तगत बुधवार को बेबी शो कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उदेदश्य KGMU में अपने नौनीहाल बच्चों के साथ आई मांओ को स्तानपान के लिए प्रेरित करना था।

कार्यक्रम में KGMU बाल स्पेशिलिस्ट डाक्टर माला ने बताया कि मां का दूध पिलाने से जो बिमारियां मां को हो चुकी होती हैं। बच्चा उन बिमारियों से महफूज हो जाता है। क्योंकि मां को जो बिमारियां होती हैं वह दूध में एन्टीबायोटिक बनाती हैं जिससे बच्चा उन बिमारियों से सुरक्षित रहता है।

साथ ही साथ जो मांएं अपने बच्चे को दूध पिलाती हैं उनका दिमाग मां का दूध न पीने वाले बच्चों से तेज होता है। आगे उन्होंने बताया की आमतौर पर मांओं की शिकायत होती है कि उनके दूध ही नहीं होता है तो वह बच्चों का क्या पिलाएं। दूध न होना सिर्फ एक भ्रम से ज्यादा और कुछ नहीं है। दूध बनना हार्मोनल होता है। अगर आपने यह भ्रम बना लिया तो दूध बनाने वाले हार्मोन खत्म हो जाते हैं और दूध बनना बन्द हो जाता है।

चिंतित होने से नहीं बनता दूध

डाक्टर माला बताती हैं कि महिला में दूध नहीं हो रहा है तो उसके लिए उसका पूरा परिवार जिम्मेदार होता है। जैसा कि इस बार स्तानपान की थीम की एक फोटो रखी गई है जिसमें दूध पिलाती हुयी मां और उसके पीछे खड़ा उसका पिता यानी स्तानपान कराने वाली मां के साथ उसके पति का सहयोग और उसके परिवार का सहयोग होना बहुत जरूरी है। महिला को कोई मानसिक तनाव न दें और उसे अच्छा खाना और पहले की अपेक्षा ढाई गुनाह ज्यादा खाना दें। यदि महिला को किसी भी तरह का तनाव होगा तो उससे फिर मां को दूध नहीं बनेगा।

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