ऑस्ट्रेलिया: 'नस्ली' कार्टून में भारतीयों को सोलर पैनल खाते दिखाया

ऑस्ट्रेलिया: नस्ली कार्टून में भारतीयों को सोलर पैनल खाते दिखायागाँव कनेक्शन

ऑस्ट्रेलिया में एक बार फिर भारतीयों पर नस्ली हमला हुआ है। इस बार यह कार्टून के जरिए किया गया है। अखबार 'द ऑस्ट्रेलियन' के एक कार्टून में भारतीयों को भूखा और सोलर पैनल खाते हुए दिखाया गया है। सोशल मीडिया में कई लोगों ने इस कार्टून पर कड़ा ऐतराज जताया है।

बता दें कि 'द ऑस्ट्रेलियन' अखबार के मालिक रूपर्ट मर्डोक हैं। पेरिस में हुई क्लाइमेट चेंज कॉन्फ्रेंस की प्रतिक्रिया में यह कार्टून छापा गया है।

क्या है कार्टून

कार्टून में एक भारतीय को सोलर पैनल तोड़ते दिखाया गया है और एक दूसरा भारतीय 'आम की चटनी' के साथ उसे खाने के लिए कह रहा है।

ये है मामला

हाल ही में पेरिस में हुई क्लाइमेट डील को अमेरिका, चीन, भारत समेत 195 देशों ने सहमति दी थी। डील में ग्लोबल वॉर्मिंग को 2 डिग्री सेल्सियस से कम रखने और भारत समेत डेवलपिंग कंट्रीज को करीब 67 हजार करोड़ (100 बिलियन डॉलर) की मदद देने के लिए कहा गया था।

सभी डेवलपिंग कंट्रीज की ओर से भारत ने समिट में सख्ती से अपना नजरिया रखा था और डेवलप्ड नेशंस को ज्यादा रिस्पॉन्सिबल और फाइनेंशियल सपोर्ट देने की बात कही थी।पेरिस कॉन्फ्रेंस के दौरान भारत ने एक इंटरनेशनल सोलर एलायंस भी किया था।

सोशल मीडिया पर आलोचना

कार्टून की सोशल मीडिया समेत एकेडमिक सर्किल में जमकर आलोचना हो रही है। मैक्वारी यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर अमांडा वाइज के मुताबिक इस तरह का कार्टून बनना शॉकिंग है। यूके, यूएस और कनाडा में कोई भी इसका सपोर्ट नहीं करेगा।

वाइज यह भी कहती हैं कि भारत इस समय दुनिया का टेक्नोलॉजी सेंटर बन चुका है। दुनिया की कई हाईटेक इंडस्ट्रीज भारत में हैं। कार्टून बताता है कि डेवलपिंग कंट्रीज को क्लाइमेट चेंज के साथ टेक्नोलॉजी नहीं बल्कि खाना चाहिए।

डीकिन यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर यिन पैराडाइज के मुताबिक कार्टून बताता है कि रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में भारत की कोशिश बेवकूफी भरी है। डेवलपिंग नेशंस को बेवकूफ बताना एक तरह का नस्लवाद है। यह उन देशों द्वारा होता है जहां नस्ली गुट (नॉन-व्हाइट्स) होते हैं।

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