पानी के बिना सूखी फसल सदमे से किसान की मौत

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मथुरा। उत्तर प्रदेश के मथुरा जनपद में लगातार तीन साल से घाटा सह रहे एक किसान को बिना पानी के कपास और ज्वार की सूखती फसल देखकर सदमा लगा, जिससे उसके प्राण निकल गये। वह खेत पर फसल का हाल देखने गया था और दूसरे दिन उसका शव वहीं खेत के पास बने मंदिर के करीब पड़ा हुआ पाया गया।

पुलिस की ओर से दी गयी जानकारी के अनुसार एक एकड़ में खेती करने वाले ऊमरी गाँव के वीरपाल सिंह (55 वर्ष) को खेती में पिछले कई वर्षों से लगातार घाटा उठाना पड़ रहा था। उसे खाद-बीज आदि के लिए लिए गए कर्ज को चुकाने के लिए कुछ महीने पूर्व खेती योग्य जमीन का कुछ हिस्सा भी बेचना पड़ा था। मगोर्रा थाना प्रभारी अनिल कुमार के अनुसार वीरपाल सिंह शनिवार की शाम घरवालों से खेत पर जाने की बात कहकर निकला था, लेकिन जब देर रात तक घर लौट कर नहीं आए, तो परिजनों को उनकी चिंता सताने लगी।

रविवार को तड़के ही उनके छोटे भाई बनवारी सिंह ने खोजबीन शुरू की तो उन्हें अपने भाई का शव खेत से कुछ दूर हनुमानजी के मंदिर के निकट पड़ा मिला। उनके शरीर पर कहीं कोई भी चोट का निशान नहीं था। उन्होंने तुरंत थाने पहुंच कर इस मामले की सूचना दी। थानाध्यक्ष ने बताया कि मृतक की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण हृदयाघात बताया गया है। उन्होंने बताया कि पुलिस अपनी तहकीकात पूरी कर इस संबंध में एक रिपोर्ट राजस्व अधिकारियों को सौंप देगी। ऐसे मामलों में सरकार किसान बीमा योजना के अंतर्गत सात लाख रपये की रुपये की धनराशि देती है।

सदमा नहीं कर सका बर्दाश्त

बताया जा रहा है कि वीरपाल सिंह की चार पुत्रियां तथा दो पुत्र हैं। खेती में नुकसान के कारण वह पहले से ही काफी तनाव में चल रहे थे और शनिवार को जब उन्होंने खेत पर जाकर मौजूदा फसल भी बर्बाद होते देखी तो वे सदमा सह नहीं सके और संभवत: इसीलिए हार्ट अटैक पड़ने से उनकी मौत हो गई।

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