पानी के लिए जद्दोजहद

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लखनऊ/सीतापुर। करीब 4 हजार से अधिक लोग मूलभूत सुविधाओं की बाट जोह रहे हैं। इस गाँव में न तो पानी है और न ही बिजली।राजधानी मुख्यालय से करीब 47 किमी की दूरी पर लखनऊ की सीमा से लगे जनपद सीतापुर की ग्राम पंचायत कोडरिया  की जनसंख्या लगभग 4000 है। ये एक ऐसा गाँव है जहां सुबह की शुरुआत पानी भरने को लेकर होने वाली लड़ाई से होती है। हालांकि ये स्थितियां महज एक वर्ष से यहां हुई हैं। पिछले एक वर्ष में इस गाँव में लगे सभी निजी नल जलस्तर गिरने के कारण सूख गए। 

शाम होते ही कोडरिया पंचायत के बिराहिम बाद गाँव में बस्ती के बीच लगे एकमात्र सरकारी नल पर लोगों की भीड़ जमा हो जाती है। बच्चे बाल्टी रखने को लेकर आपस में रोज झगड़ते हैं। सरकारी नल काफी दूर होने के कारण लोग ठेलिया पर घर के छोटे बड़े सभी बर्तनों में पानी भरकर ले जाते हैं। गाँव के ही कल्लू (55 वर्ष) पुत्र स्व. भवानी ने बताया कि गाँव में कुल छह कुएं थे जो सूख चुके हैं, तालाब भी सूखे पड़े हैं। गाँव में तीन सरकारी नल तो हैं लेकिन उनमें से केवल एक नल बस्ती के  बीच में पड़ता है, दो नल गाँव के बाहर हैं जो सिर्फ एक दो परिवारों के ही काम आते हैं गाँव वालों के नहीं।

नौ वर्ष की बच्ची माधुरी पुत्री महेंद्र कुमार ने बताया कि हम लोग रोज सुबह जल्दी उठकर नल पर अपनी बाल्टी लाइन में लगाते हैं, तब तक पापा-मम्मी दूसरे काम निपटा कर नल पर आ जाते हैं। 

गाँव के ही किसान टीकाराम (50 वर्ष) बताते हैं  कि चुनाव के वक़्त सांसद और विधायक ने गाँव का विकास कराने का वादा किया था। सपा विधायक मनीष रावत और भाजपा के सांसद कौशल किशोर ने जीतने के बाद गाँव की तरफ मुड़कर नहीं देखा। टीकाराम ने बताया कि साहब नौ लोगों का परिवार है, पीने के लिए पानी नसीब नहीं हो रहा, जानवरों को पानी कहां से लाएं। 25 हजार खर्च करके बोरिंग कराने की हमारी क्षमता नहीं है। दो साल से किसानी भी साथ नहीं दे रही।

यही हाल ग्राम पंचायत कोडरिया के अन्य मजरों गुलालपुर, चंदौली और चमरपुरवा का भी है लेकिन सबसे ज्यादा परेशानी इस समय बिराहिमबाद और गुलालपुर के लोग झेल रहे हैं। गाँव के ही 62 वर्षीय बैजनाथ मिश्र ने बताया कि वर्ष 1995 में यह पंचायत अंबेडकर गाँव में चयनित हुई थी लेकिन विकास के नाम पर बिजली के खम्बे तो तो पंचायत में लग गए लेकिन बिजली आज तक नहीं आई। 

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