पानी की डकैती

मनीष मिश्रामनीष मिश्रा   22 March 2016 5:30 AM GMT

पानी की डकैतीगाँवकनेक्शन

लखनऊ। आज विश्व जल दिवस है। देश भर में हो रही संगोष्ठियों और भाषणों से सैकड़ों किलोमीटर दूर भारत के कई गाँव ऐसे हैं, जहां देश में पहली बार पानी पर कब्जा करने वाले दंगाईयों को रोकने के लिए प्रशासन ने धारा 144 लगा रखी है। यह स्थिति यूपी में कभी भी आ सकती है। 

भारत में भयावह होती जलसंकट की समस्या को महाराष्ट्र के लातूर जिले के कई इलाकों में देखा जा सकता है। यहां पानी की समस्या इतनी बढ़ गई है कि कभी भी दंगा हो सकता है। जिला प्रशासन ने पानी की टंकियों के पास एक साथ पांच लोगों के खड़े होने पर बैन लगा दिया है।

जल संकट के मामले में यूपी में भी लातूर जैसे हालात पैदा होने में ज्यादा समय नहीं है। प्रदेश में हो रहे अंधाधुंध भू-जल के दोहन से हर साल 18 ब्लॉक भू-जल संकट की चपेट में आ रहे हैं।

केन्द्रीय भू-जल आंकलन समिति के अनुसार वर्ष 2000-2011 के बीच यूपी में अतिदोहित/संकटग्रस्त ब्लॉक नौ गुना बढ़ गए। कुल 820 ब्लॉक में से 630 में भू-जलस्तर गिरा है। केन्द्रीय भूजल आयोग की 2014 की रिपोर्ट के अनुसार 2013 व 2015 के बीच देश में भू-जल स्तर 0-4 मीटर तक गिरा है।

हालंकि वर्षा जल संरक्षण के लिए तालाब तो खोदे गए हैं, लेकिन जब बारिश ही नहीं हो रही तो इनका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा। उत्तर प्रदेश में सिंचाई के लिए उपयोग होने वाले कुल पानी का 75 प्रतिशत भूमिगत जल से आता है। इसके लिए लाखों लीटर भूमिगत जल 42 लाख ट्यूबवेल, 25 हजार कुएं व 32,047 राजकीय नलकूप हर रोज ज़मीन से खींच रह हैं।

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