परिवार की जरुरत के हिसाब से बनाना चाहिए घर का नक्शा

गाँव कनेक्शन और एमपी बिरला सीमेंट ने ग्राम प्रधानों और सचिवों को सिखाया कैसे बना सकते हैं अपने गाँव की नींव मजबूत

परिवार की जरुरत के हिसाब से बनाना चाहिए घर का नक्शा

बुलंदशहर। ग्रामीणों को भवन निर्माण के संबंध में तकनीकी ज्ञान देने के लिए गाँव कनेक्शन और एमपी बिरला सीमेंट ने उत्तर प्रदेश से एक साझा मुहिम शुरू की है। इसके तहत गाँव और ब्लॉक स्तर पर आयोजित हेाने वाले कार्यक्रमों में ग्राम प्रधानों और ग्रामीणों को भवन निर्माण के संबंध में बेसिक जानकारी दी जा रही है। जनपद के ब्लाक डिबाई में एक जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जहां 40 प्रधान और 9 सचिव उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में एमपी बिरला सीमेंट के टेक्निकल मैनेजर संदीप शुक्ला ने बताया, " पांच सौ ग्रामीणों के बीच कराए गए सर्वे के आधार पर यह बात सामने आई कि आज भी 90 प्रतिशत ग्रामीण भवन निर्माण से पहले नक्शा नहीं बनाते।ग्रामीण इसे काफी महंगा और फिजूलखर्ची मानते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी सलाहकार आसानी से उपलब्ध भी नहीं होते। मात्र आठ फीसदी लोग ऐसे हैं, जो जागरूक हैं और अपने घर का नक्शा खुद ही बनाते हैं। वहीं दो दो प्रतिशत लोग ऐसे हैं जो मकान बनाते समय किसी जानकार व्यक्ति या तकनीकी सलाहकार की मदद लेते हैं।"

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डीपो इंचार्ज ह्देश चौधरी ने कहा, " ग्रामीण क्षेत्र में राजमिस्त्री की भूमिका काफी प्रमुख है। मकान बनाते समय अधिकांश गाँव के लोग राजमिस्त्री से सलाह लेते हैं, घर का नक्शा कैसा होगा? नींव बनेगी या पिलर पर मकान बनना है, दीवार में कौन सी सीमेंट और ईंट लगेगी और छत में कौन सी ईंट और सीमेंट लगेगी, मकान की तराई कितने दिन में करनी हैं? यह सब निर्णय राजमिस्त्री की सलाह से ही लिए जाते हैं।"

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- मकान बनाते समय शुद्ध पानी का प्रयोग करना चाहिए
- परिवार की जरुरत के हिसाब से घर का नक्शा बनवाएं
- अच्छी गुणवत्ता की सीमेंट का इस्तमाल करना चाहिए
- निर्माण के बाद कम से कम 10 दिन तक तराई करनी चाहिए
- सीमेंट और निर्माण संबंधी सामग्री का जरूर ध्यान रखें


कार्यक्रम में मौजूद प्रधान धर्मपाल ने बताया," हम लोगों को बहुत अच्छी जानकारी दी गई। अभी तक हम लोग जहां पानी की व्यवस्था नहीं होती थी, तालाब का पानी प्रयोग करते थे, लेकिन अब समझ आ गया है कि सिर्फ साप पानी का ही प्रयोग करना चाहिए।"

सचिव अभिलाष कुमार ने बताया, " ज्यादातर ग्रामीण परंपरागत तरीकों से ही निर्माण कराते हैं। इस कार्यक्रम में हम लोगों को जो बातें बताई गई हैं, उसी के हिसाब से निर्माण कार्य कराए जाएंगे। "

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