पेड न्यूज़ पर रोक के लिए राज्य सभा में कड़े कदम उठाने की मांग

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नई दिल्ली (भाषा)। मीडिया में पेड न्यूज की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता ज़ाहिर करते हुए विभिन्न दलों के सदस्यों ने कहा कि ये पाठकों को गुमराह करता है और सरकार को इस पर रोक के लिए तत्काल कड़े कदम उठाने चाहिए।

खबरों की आड़ में प्रचार के लिए विज्ञापनों को लेकर विभिन्न दलों के सदस्यों द्वारा चिंता जताए जाने पर सूचना और प्रसारण मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि पेड न्यूज पथ से हटने वाली बात है लेकिन ये भी आशंका है कि सरकार के कदम उठाने पर इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप कहा जाएगा।

उन्होंने कहा कि अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया गया है और उन्हें इस बात में संदेह नहीं है कि सभी सदस्य खुल कर अपनी बात रखने के पक्षधर हैं उन्होंने कहा कि लेकिन विज्ञापन की तरह वाणिज्यिक भाषणों को भी खुल कर अपनी बात रखने का हिस्सा बताया जा रहा है।

भाजपा के विजय गोयल ने शून्यकाल में पेड न्यूज का मुद्दा उठाया था। जेटली ने कहा, ''हम सभी पेड न्यूज़ के शिकार हैं। विज्ञापन करना हर किसी का अधिकार है लेकिन जब सरकार सीमा से अधिक विज्ञापन करती है तो विज्ञापन और रिश्वत में अंतर की सीमा कहां रह जाती है।'' उन्होंने कहा कि हम इस समस्या से छुटकारा चाहते हैं। इस मुद्दे पर सदन में चर्चा होनी चाहिए ताकि इस समस्या का कोई समाधान निकल सके। ये भी आशंका है कि सरकार के कदम उठाने पर इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप कहा जाएगा।

इससे पहले ये मुद्दा उठाते हुए भाजपा के विजय गोयल ने कहा कि पेड न्यूज़ ने मीडिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठा दिए हैं क्योंकि संपादकीय या फीचर की आड़ में दिए जा रहे विज्ञापन लोगों को गुमराह करते हैं।

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