पहाड़ों पर ही नहीं, यूपी में भी पैदा हो सकेगा सेब

पहाड़ों पर ही नहीं, यूपी में भी पैदा हो सकेगा सेबगाँवकनेक्शन

लखनऊ। पहाड़ी और ठण्डे प्रदेशों में होने वाले सेब को अब जल्द ही मैदानी क्षेत्र के किसान भी अपनी बाग में उगा सकेंगे। इसे संभव बनाने के लिए सेब की एक नई प्रजाति विकसित कर ली गई है।

मेरठ के मोदीपुरम स्थित ‘भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान’ के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. दुष्यंत मिश्र और उनकी टीम ने सेब की ‘अन्ना’ किस्म ईजाद की है जो मैदानी क्षेत्रों में भी अच्छा उत्पादन देगी। 

संस्थान के फार्म हाउस में डॉ मिश्र ने इस सेब की फसल उगाकर अपनी बात साबित भी कर दी है कि गर्म क्षेत्रों में यह संभव है। न सिर्फ सेब उगेगा बल्कि उसके स्वाद में भी कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

‘‘अभी तक सेब के बारे में कहा जाता था कि ये सिर्फ ठण्डे प्रदेशों में होता है, इसकी वजह से बाजार में आते-आते इसका दाम भी काफी बढ़ जाता है। लेकिन अन्ना की बागवानी यूपी के किसान भी कर सकते हैं’’, सेब की नई किस्म के बारे में डॉ. दुष्यंत मिश्र ने बताया। 

नई किस्म की उत्पादन प्रक्रिया के बारे में डॉ मिश्र कहते हैं, ‘‘एक साल में अन्ना का पेड़ तैयार हो जाता है और एक साल में ही फूल और फल भी लगने लगते हैं। एक साल में पौधों की लंबाई करीब आठ फीट हो जाती है।’’

पौधे की रोपाई

पौधों के रोपण के बारे में डॉ. दुष्यंत मिश्र बताते हैं कि अन्ना सेब की पौध का रोपण दिसंबर से मार्च महीने तक किसान कर सकते हैं, अभी फार्म में पेड़ तैयार हुए हैं जल्द ही किसानों को बागवानी के लिए भी इसके पौधे उपलब्ध करा दिए जाएंगे। पौधों के रोपण के बाद सिंचाई करनी चाहिए। गर्मियों के मौसम में तीन से चार सिंचाई हर महीने और सर्दी में दो सिंचाई प्रतिमाह की जानी चाहिए

बारिश में पाैधों की करें खास देखभाल

बारिश में पौधों की खास देखभाल की ज़रूरत होती है, इसलिए बारिश में पानी गड्ढे के आस-पास न जमा हो, इसका ख़याल रखना ज़रूरी है। गुड़ाई साल में कम से कम चार बार की जानी चाहिए। सेब के पौधे की जड़ें सतह पर ज्यादा फैलती हैं इसलिए हल्की गुड़ाई करनी चाहिए।

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