फार्म-ओ-पीडिया ऐप किसानों का टीचर

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लखनऊ। बढ़ती आधुनिकता के साथ-साथ आज कृषि जगत में भी जबरदस्त बदलाव हो रहे हैं। इसका जीता - जागता उदाहरण हैं गुजरात, पंजाब , उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों के हज़ारों किसान,जिन्होंने फार्म-ओ-पीडिया एेप को अपनी खेती का प्रमुख अंग बना लिया है।

अपनी उपयोगिता और लाभदायक कृषि सुझावों की बदौलत उत्तर भारत में कृषि संबंधी गैर-सरकारी मोबाइल एेपों में दूसरी सबसे लोकप्रिय एेप मानी जाने वाली फार्म-ओ-पीडिया एेप का इस्तेमाल चार राज्यों में तीन हज़ार से ज़्यादा किसान कर रहे हैं।

यह एेप एंड्रॉयड 2.3 (जिंजरब्रेड) पर काम करता है। इस एेप के निर्माता आकाश शाह ने गाँव कनेक्शन को बताया,'' मेरा ये हमेशा से सपना रहा है कि मैं ग्रामीण भारत के लिए कुछ अलग कर सकूं। कम्प्यूटर एप्लीकेशन से ग्रेजुएट होने के बाद मैने यह एेेप (फार्म-ओ-पीडिया) बनाया।

इस एेप के जरिए किसान मिट्टी और मौसम के अनुसार उपयुक्त फसलों का चुनाव, पालतू जानवरों की देखभाल और मौसम की जानकारी पा सकते हैं।''

भारत सरकार के प्रगत संगठन विकास केंद्र (सीडैक) के आंकड़ों के अनुसार फार्म-ओ-पीडिया भारत की एक मात्र ऐसी निजी मोबाइल एप्लीकेशन है, जिसने काफी कम समय में इतनी लोकप्रियता प्राप्त की है। आंकड़ो के मुताबिक इस एप को अभी तक 3,383 लोगों ने डाउनलोड कर लिया है। यह एेप अंग्रेजी और गुजराती भाषाओं में उपलब्ध है।

''इस एेप से जुड़कर किसानों को बेहतर से बेहतर सुविधा दी जा सके, इसके लिए हम लगातार गुजरात और राजस्थान के प्रमुख कृषि वैज्ञानिकों की सलाह लेते रहते हैं। यह ही नहीं हम किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए गुजरात के कृषि विद्यालयों में पढ़ रहे छात्रों से भी लगातार संपर्क में रहते हैं।'' आकाश शाह ने बताया।

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