सूर्योदय से पहले घाटों पर पहुंच कर उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ श्रद्धालुओं ने छठ पर्व का आखिरी दिन मनाया

पानी वाले कच्चे नारियल, केले, आंटे और शक्कर से बानी पारम्परिक मिठाई- पीरिकीया के साथ कई अन्य फ़ल और मिठाईओं का भी अर्घ्य लगा जिसे प्रसाद के रूप में पाने के लिए लोग दूर-दूर से व्रत धारण करने वाले श्रद्धालुओं का आशीर्वाद लेने पूजा स्थल पहुंचे।

सूर्योदय से पहले घाटों पर पहुंच कर उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ श्रद्धालुओं ने छठ पर्व का आखिरी दिन मनाया

सूर्योदय से पहले घाटों पर पहुंच कर उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ श्रद्धालुओं ने छठ पर्व का आखिरी दिन मनाया

11 नवम्बर को नहाय-खाय से शुरू हुए छठ पर्व का आज भोर, उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ समापन हुआ। बिहार, झारखंड के अलावा उत्तर प्रदेश के कई जगहों पर भी श्रद्धालुओं के भारी भीड़ प्रातः काल छठी मैया का आशीर्वाद लेने घाटों पर उमड़ी।

पानी वाले कच्चे नारियल, केले, आंटे और शक्कर से बानी पारम्परिक मिठाई- पीरिकीया के साथ कई अन्य फ़ल और मिठाईओं का भी अर्घ्य लगा जिसे प्रसाद के रूप में पाने के लिए लोग दूर-दूर से व्रत धारण करने वाले श्रद्धालुओं का आशीर्वाद लेने पूजा स्थल पहुंचे।

सुबह के अर्घ्य की तसवीरें जिज्ञासा और अभिषेक की #PhotoStory में

भोर 6 बजे उगते सूर्य की अर्चना के साथ उसे अर्घ देकर छठ पूजा 2018 संपन्न जुई


लखनऊ में छठी मैया के श्रद्धालुओं की भीड़ प्रसाद और आशीर्वाद के लिए सुबह-सुबह घाट पर उमड़ पड़ी


छठ पूजा में पारम्परिक सूप या सूपे में प्रसाद का का अर्घ दिया जाता है जिनमें गन्ने, नारियल केले और अन्य फल महत्वपूर्ण माने जाते हैं


छठ के दौरान विवाहित महिलाओं की नाक से माथे तक सिन्दूर लगाने की परंपरा है



छठ का पर्व है और ठेकुआ, गुड़-पूड़ी नहीं खाया तो क्या खाया!

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यह भी देखें: 'ओहि पर सुगा मंडराय' तस्वीरों में देखिये छठ पूजा 2018 की तस्वीरें



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