डाकिया डाक लाया: भावनाओं को मंज़िल तक पहुँचाती चिट्ठियां

9 अक्टूबर, 2018 को शुरू हुए राष्ट्रीय डाक सप्ताह और विश्व डाक दिवस पर लखनऊ के डाक घर से जिज्ञासा मिश्रा की #Photostory

डाकिया डाक लाया: भावनाओं को मंज़िल तक पहुँचाती चिट्ठियां

लखनऊ। 'डाकिया डाक लाया', फिल्‍म 'पलकों की छांव में' का ये गीत जब गुलज़ार ने लिखा होगा तो जरूर चिट्ठी-पत्री का जमाना ऊरूज पर होगा। हालांकि, वक्‍त के साथ एसएमएस और फिर वॉट्सएेप ने चिट्ठी-पत्री को कहीं पीछे छोड़ दिया। लेकिन आज भी चिट्ठीयों का अपना एक अलग ही असर है। इसी लिए राष्ट्रीय डाक सप्ताह (9-15 अक्‍टूबर) व विश्व डाक दिवस पर हम आपके लिए लाए हैं लखनऊ के डाक घर की कुछ तस्‍वीरें, जिन्‍हें देखकर आप फिर वो दौर जी सकें और गा सकें- 'डाकिया डाक लाया...डाक लाया.'

#12 भारतीय डाक सेवा (डाकघर में रखे चिठ्ठियों के लिफ़ाफ़े)










#11 चिठ्ठियों को ले जाने के लिए तैयार होते हुए एक भारतीय डाकिया












#10 गोमतीनगर डाकघर की एक महिला डाकिया (पोस्टवुमेन)












#9 लखनऊ का एक डाकघर










#8 लेटर बॉक्स













#7 लिफ़ाफ़ों में बंद ख़ुशख़बरियां बटने को तैयार











#6 साइकिल पर सवार होकर दिन भर चिठ्ठियां बांटने से पहले डाकिये हर सुबह डाकघर पहुंचकर तैयारी में लग जाते हैं











#5 डाकिये का साथी











#4 30 वर्षों से डाकिये का काम कर रहे अम्बिका प्रसाद साइकिल को अपना साथी बताते हैं












#3 विभूति खंड, गोमतीनगर डाकघर का एक दृश्य












#2 गोमतीनगर डाकघर का एक दृश्य












#1 चिठ्ठियां लेकर काम पर निकलता डाकिया











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